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जरूरत 41 करोड़ की, मिला सिर्फ 4 करोड़
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:13 PM IST
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धान की उपज के लिए अग्रणी जनपद में शुमार अंबेडकरनगर को जब बीते दिनों शासनस्तर से सूखाग्रस्त घोषित किया तो किसानों ने राहत की सांस ली थी।
अतिवृष्ट के चलते जहां गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी वहीं बारिश न होने से धान की फसल को भी जबरदस्त नुकसान हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि धान की फसल नष्ट होने से जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई जिले के सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद मिलने वाली आर्थिक मदद से हो जाएगी।
शासन के निर्देश पर प्रभावित किसानों की सूची तैयार की गई। प्रशासन ने बीते दिनों जिले के एक लाख 75 किसानों को बर्बाद हुई धान की फसल के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए 41 करोड़ 57 लाख रुपये की मांग शासन से की गई।
गत दिवस शासन से जिले के प्रभावित किसानों को सहायता दिए जाने के लिए मात्र 4 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। 37 करोड़ 7 लाख रुपये मिलना अभी शेष है। यह राशि कब मिलेगी, इसकी कोई जानकारी प्रशासन को नहीं है।
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अब मात्र 4 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि 1 लाख 75 हजार किसानों में किस प्रकार से वितरित हो सकेगी, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा। बताते चलें शासन से प्रभावित किसानों को कम से कम 1500 रुपये व अधिक से अधिक क्षेत्रफल के आधार पर सहायता राशि दिया जाना निर्धारित है।
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अतिवृष्ट के चलते जहां गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी वहीं बारिश न होने से धान की फसल को भी जबरदस्त नुकसान हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि धान की फसल नष्ट होने से जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई जिले के सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद मिलने वाली आर्थिक मदद से हो जाएगी।
शासन के निर्देश पर प्रभावित किसानों की सूची तैयार की गई। प्रशासन ने बीते दिनों जिले के एक लाख 75 किसानों को बर्बाद हुई धान की फसल के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए 41 करोड़ 57 लाख रुपये की मांग शासन से की गई।
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गत दिवस शासन से जिले के प्रभावित किसानों को सहायता दिए जाने के लिए मात्र 4 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। 37 करोड़ 7 लाख रुपये मिलना अभी शेष है। यह राशि कब मिलेगी, इसकी कोई जानकारी प्रशासन को नहीं है।
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अब मात्र 4 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि 1 लाख 75 हजार किसानों में किस प्रकार से वितरित हो सकेगी, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा। बताते चलें शासन से प्रभावित किसानों को कम से कम 1500 रुपये व अधिक से अधिक क्षेत्रफल के आधार पर सहायता राशि दिया जाना निर्धारित है।