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Ambedkar Nagar News: सवालों के घेरे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन
Wed, 18 Sep 2024 10:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 18 Sep 2024 10:41 PM IST
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अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न को लेकर उठा विवाद पुलिस की जांच के बाद समाप्त हो गया, लेकिन अब कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। पूरे प्रकरण में आरोपी छात्र के पकड़े जाने और ईमेल भेजे जाने में दो बड़ी बात निकलकर सामने आई है। एक तो रैगिंग और दूसरे यौन शोषण की। इन दोनों आरोपों से जुड़ी सच्चाई की तह तक जाने और ऐसी किसी घटना के बारे में पता लगाने लिए अब आगे आने की बारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है।
बीते दिनों एक पैरा मेडिकल कॉलेज छात्रा के फर्जी नाम एस कुमारी का उल्लेख कर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भेजे गए ईमेल ने खासा हड़कंप मचा दिया था। इसमें यौन शोषण का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर लेने की चेतावनी दी गई थी। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि ईमेल किसी छात्रा ने नहीं बल्कि यहीं के एक पैरामेडिकल छात्र ने भेजा था। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया था कि रैगिंग से नाराज होकर उसने यह सब संबंधित लोगों को सबक सिखाने के लिए किया।
अब आरोपी के जेल भेजे जाने के साथ ही ईमेल प्रकरण तो खत्म हो गया, लेकिन कॉलेज प्रशासन की भूमिका बढ़ गई है। दरअसल पकड़े गए छात्र ने रैगिंग का आरोप लगाया है। उसने बाकायदा नाम भी गिनाए। अब यहीं कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी शुरू हो जाती है कि यदि रैगिंग हो रही है तो एंटी रैगिंग कमेटी क्या कर रही है। यदि छात्रों के बीच आपसी विवाद के चलते भी रैगिंग का आरोप लगाया जा रहा है तो ऐसे किसी विवाद पर कॉलेज प्रशासन की नजर क्यों नहीं है। सवाल यह भी है कि सिर्फ फर्जी ईमेल भेज देने के कारण क्या पकड़े गए छात्र के लगाए गए रैगिंग के आरोप को कॉलेज प्रशासन गंभीरता से नहीं लेगा।
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उधर, फर्जी नाम से भेजे गए ईमेल में जिस तरह एक छात्रा और कर्मचारी के बीच नाजायज रिश्ते का जिक्र किया गया वह भी बड़ी आंतरिक जांच का विषय है। इसमें एक कर्मचारी पर आरोप लगा कि उसने अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए एक छात्रा को एक लिपिक से शारीरिक संबंध बनाकर उसे खुश करने को कहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर आरोप पर चुप्पी साध लेने या इसे फर्जी करार देने भर से बात बनने वाली नहीं है। न सिर्फ कॉलेज प्रशासन वरन जिला प्रशासन को भी आगे आकर विस्तृत जांच कराना चाहिए।
वर्जन
निराधार है आरोप
रैगिंग का आरोप ही मनगढ़ंत था। कॉलेज में रैगिंग जैसा कुछ नहीं है। दूसरी बात यह कि ईमेल में जिन बातों का जिक्र किया गया है उनका कोई आधार नहीं है।
विवेक श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज
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बीते दिनों एक पैरा मेडिकल कॉलेज छात्रा के फर्जी नाम एस कुमारी का उल्लेख कर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भेजे गए ईमेल ने खासा हड़कंप मचा दिया था। इसमें यौन शोषण का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर लेने की चेतावनी दी गई थी। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि ईमेल किसी छात्रा ने नहीं बल्कि यहीं के एक पैरामेडिकल छात्र ने भेजा था। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया था कि रैगिंग से नाराज होकर उसने यह सब संबंधित लोगों को सबक सिखाने के लिए किया।
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अब आरोपी के जेल भेजे जाने के साथ ही ईमेल प्रकरण तो खत्म हो गया, लेकिन कॉलेज प्रशासन की भूमिका बढ़ गई है। दरअसल पकड़े गए छात्र ने रैगिंग का आरोप लगाया है। उसने बाकायदा नाम भी गिनाए। अब यहीं कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी शुरू हो जाती है कि यदि रैगिंग हो रही है तो एंटी रैगिंग कमेटी क्या कर रही है। यदि छात्रों के बीच आपसी विवाद के चलते भी रैगिंग का आरोप लगाया जा रहा है तो ऐसे किसी विवाद पर कॉलेज प्रशासन की नजर क्यों नहीं है। सवाल यह भी है कि सिर्फ फर्जी ईमेल भेज देने के कारण क्या पकड़े गए छात्र के लगाए गए रैगिंग के आरोप को कॉलेज प्रशासन गंभीरता से नहीं लेगा।
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उधर, फर्जी नाम से भेजे गए ईमेल में जिस तरह एक छात्रा और कर्मचारी के बीच नाजायज रिश्ते का जिक्र किया गया वह भी बड़ी आंतरिक जांच का विषय है। इसमें एक कर्मचारी पर आरोप लगा कि उसने अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए एक छात्रा को एक लिपिक से शारीरिक संबंध बनाकर उसे खुश करने को कहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर आरोप पर चुप्पी साध लेने या इसे फर्जी करार देने भर से बात बनने वाली नहीं है। न सिर्फ कॉलेज प्रशासन वरन जिला प्रशासन को भी आगे आकर विस्तृत जांच कराना चाहिए।
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निराधार है आरोप
रैगिंग का आरोप ही मनगढ़ंत था। कॉलेज में रैगिंग जैसा कुछ नहीं है। दूसरी बात यह कि ईमेल में जिन बातों का जिक्र किया गया है उनका कोई आधार नहीं है।
विवेक श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज