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पैमाइश में ढिलाई से गांवों में बढ़ रहे भूमि विवाद

Fri, 09 Sep 2022 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Sep 2022 12:00 AM IST
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Land disputes increasing in villages due to laxity in metering
अंबेडकरनगर। जिले में लेखपालों की कमी के कारण भू स्वामित्व से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पैमाइश व चिन्हांकन का कार्य न हो पाने के कारण भूमि संबंधी विवादों के निपटारे को लेकर परेशान जरूरतमंदों को तहसीलों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। जिले में लेखपालों के कुल स्वीकृत 476 पदों के सापेक्ष 263 पद वर्तमान में खाली पड़े हैं। लेखपालों की कमी के चलते ही पैमाइश कार्य को लेकर मारपीट की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही है।
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भू राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए भले ही तहसीलों में संपूर्ण समाधान व थानों में समाधान दिवस का आयोजन किया जाता हो लेकिन इसके बाद भी भूमि संबंधी विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहे। राजस्व कर्मियों की कमी के कारण लंबित मामले निपटाने में प्रशासन को भी खासी मशक्कत करना पड़ रही है।
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जिले के अकबरपुर, टांडा, भीटी, कटेहरी, बसखारी, जलालपुर, भियांव, रामनगर व जहांगीरगंज विकास खंड में कुल 902 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में खतौनी, विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र तथा भूमि संबंधी विवादों के निपटारे के लिए लेखपालों की तैनाती जरूरी है। इसके लिए लेखपालों के 476 पद स्वीकृत हैं।
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एक दशक पहले तय हुई लेखपालों की यह संख्या बढ़ती आबादी व जिले में हुए सीमा विस्तार के कारण अब नाकाफी साबित हो रही है। परेशानी की बात यह है कि स्वीकृत 476 पदों में से भी करीब 50 फीसदी से अधिक पद भर्ती न हो पाने के कारण खाली पड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा 68 लेखपालों की कमी अकबरपुर तहसील और 55 लेखपालों की कमी जलालपुर तहसील में है। लेखपालों की कमी का खामियाजा भूमि विवाद से जुड़े पक्षकारों को उठाना पड़ रहा है।
एक लेखपाल के जिम्मे कई गांव
जिले में गांवों की संख्या के सापेक्ष लेखपालों की कमी पहले से ही है। ऐसे में जो पद स्वीकृत हैं, उनमें भी लगभग आधे पद खाली पड़े हैं। इसके चलते ही एक एक लेखपाल के जिम्मे कई कई ग्राम पंचायतों का काम परेशानी बढ़ा रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम चार से पांच पुरवे होते हैं। इस कारण गांवों में व्याप्त भूमि संबंधी विवाद पैमाइश व चिन्हांकन का कार्य न हो पाने के कारण निस्तारित नहीं हो पाते हैं।
पैमाइश के लिए लगाना पड़ रहा चक्कर
लेखपालों की पर्याप्त तैनाती न होने, इसका फायदा उठाकर तमाम लेखपालों द्वारा मनमानी करने आदि के चलते तमाम गावों में पैमाइश के लिए ग्रामीणों को महीनों भटकना पड़ता है। इस परेशानी से राहत दिलाने के लिए तहसील समाधान दिवस व थाना दिवस पर पहुंचकर ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों से पैमाइश न होने की शिकायत भी की जाती है। इनमें से कुछ मामलों में तो पैमाइश टीम बनाकर कार्रवाई हो जाती है जबकि अधिकतर अन्य मामले निपटारे के इंतजार में लंबित पड़े रहते हैं। भीटी तहसील में पैमाइश कार्य के पहुंची प्रतिमा पाल ने बताया कि वह वर्ष 2018 से पैमाइश के लिए चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हो पाई है। अकबरपुर के धीरेंद्र का कहना था कि चार बार प्रार्थनापत्र दिया गया, लेकिन लेखपाल की मनमानी के कारण पैमाइश हो पाना कठिन हो गया है। जलालपुर के विमलेश ने कहा कि रास्ते के सीमांकन के लिए लगातार प्रार्थनापत्र देने के बावजूद लेखपाल को मौके पर जाकर नाप जोख करने का समय ही नहीं मिल पाता।

भूमि की पैमाइश व अन्य विवादों के त्वरित निस्तारण का हर संभव प्रयास होता है। इसके लिए सभी एसडीएम व तहसीलदारों को भू संपदा से जुड़े विवादों का निस्तारण समयबद्ध स्तर पर कराने का निर्देश भी दिया गया है। लेखपालों के रिक्त पदों की भरपाई शासन स्तर से होने वाली तैनाती के बाद ही दूर हो सकेगी।
सैमुअल पॅाल एन, डीएम
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