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जिला अस्पताल में बस जांच ही होती, इलाज नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Tue, 30 Aug 2016 12:19 AM IST
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अंबेडकरनगर जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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बदलते मौसम के बीच जिले में डेंगू धीरे-धीरे पांव पसार रहा है लेकिन इस पर रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की तो व्यवस्था है लेकिन इलाज की कोई सुविधा नहीं है। डेंगू से पीड़ित मरीज को जिला अस्पताल से तत्काल रेफर कर दिया जाता है।
जिले में समुचित इलाज न होने का ही नतीजा रहा कि बीते दिनों डेंगू की चपेट में आए बालक की ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। संक्रामक रोगों पर अंकुश पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं हो पा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटने की किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है।
सीएचसी व पीएचसी की बात दूर, जिला अस्पताल में ही डेंगू बुखार के इलाज की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में मात्र डेंगू की जांच ही की जाती है। इसी का नतीजा है कि डेंगू से पीड़ित मरीज को उनके तीमारदार जिला अस्पताल ले जाने के बजाय लखनऊ या फिर अन्य बड़े शहरों में स्थित अस्पताल ले जाते हैं।
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जिला अस्पताल में डेंगू के इलाज की व्यवस्था न होने का ही नतीजा रहा कि लगभग एक पखवारा पूर्व महरुआ थाना अंतर्गत नरहरपुर गांव निवासी रमाकांत तिवारी के चार वर्षीय पुत्र आलोक की डेंगू की चपेट में आने से जान चली गई।
पिता रमाकांत ने बताया कि डेंगू की चपेट में आने के बाद आलोक को जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जिला अस्पताल में डेंगू बुखार की समुचित इलाज की व्यवस्था होती तो शायद उसके पुत्र को बचाया जा सकता था।
जलालपुर नगर के महेश कुमार ने कहा कि उनका पुत्र संतोष (15) बीते दिनों डेंगू की चपेट में आ गया था। जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था न होने पर उसे लखनऊ स्थित अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा तो कर रही है लेकिन डेंगू जैसी बीमारी के समुचित इलाज को जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं की जा रही है।
सीएमएस डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है लेकिन इलाज की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में यदि डेंगू से पीड़ित कोई मरीज आता है तो उसे लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। जिले में डेंगू का प्रकोप नहीं है। डेंगू से किसी की मौत की जानकारी नहीं है।
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जिले में समुचित इलाज न होने का ही नतीजा रहा कि बीते दिनों डेंगू की चपेट में आए बालक की ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। संक्रामक रोगों पर अंकुश पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं हो पा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटने की किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है।
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सीएचसी व पीएचसी की बात दूर, जिला अस्पताल में ही डेंगू बुखार के इलाज की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में मात्र डेंगू की जांच ही की जाती है। इसी का नतीजा है कि डेंगू से पीड़ित मरीज को उनके तीमारदार जिला अस्पताल ले जाने के बजाय लखनऊ या फिर अन्य बड़े शहरों में स्थित अस्पताल ले जाते हैं।
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जिला अस्पताल में डेंगू के इलाज की व्यवस्था न होने का ही नतीजा रहा कि लगभग एक पखवारा पूर्व महरुआ थाना अंतर्गत नरहरपुर गांव निवासी रमाकांत तिवारी के चार वर्षीय पुत्र आलोक की डेंगू की चपेट में आने से जान चली गई।
पिता रमाकांत ने बताया कि डेंगू की चपेट में आने के बाद आलोक को जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जिला अस्पताल में डेंगू बुखार की समुचित इलाज की व्यवस्था होती तो शायद उसके पुत्र को बचाया जा सकता था।
जलालपुर नगर के महेश कुमार ने कहा कि उनका पुत्र संतोष (15) बीते दिनों डेंगू की चपेट में आ गया था। जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था न होने पर उसे लखनऊ स्थित अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा तो कर रही है लेकिन डेंगू जैसी बीमारी के समुचित इलाज को जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं की जा रही है।
सीएमएस डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है लेकिन इलाज की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में यदि डेंगू से पीड़ित कोई मरीज आता है तो उसे लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। जिले में डेंगू का प्रकोप नहीं है। डेंगू से किसी की मौत की जानकारी नहीं है।