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सड़कों पर यात्रियों को लेकर दौड़ रहीं कबाड़ बसें
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर डिपो से सड़कों पर यात्रियों को लेकर कबाड़ बसें दौड़ रही हैं। हालत यह है कि 56 बसों के बेड़े में 35 बसें जहां नीलामी शर्त पूरी करने के बाद भी सड़क पर यात्रियों को ढो रही हैं, वहीं करीब 21 बसें ऐसी हैं जो निर्धारित 10 लाख किलोमीटर की यात्रा तय कर चुकी हैं। उनकी क्षमता भी अब यात्रियों को सुरक्षित ढोने की नहीं है। इसके बावजूद यात्रियों की सुविधा व जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हुए इनकी सेवाएं ली जा रही हैं। बदहाली का आलम यह है कि वर्ष 2018 के बाद अकबरपुर डिपो को एक भी नई बस नहीं मिली। वर्कशॉप में 65 टेक्नीशियन की जरूरत है, लेकिन महज 12 ही उपलब्ध हैं। इससे खराब होने वाली बसों की समय से मरम्मत हो पाना भी एक बड़ी चुनौती है।
करीब साढ़े छह दशक पहले अकबरपुर में बस स्टॉप यात्रियों को सुचारु यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया था। लगातार बढ़ती यात्रियों की संख्या व बसों की जरूरत को देखते हुए इसे बाद में डिपो का दर्जा मिल गया। इसके बाद से लगातार यहां सुविधाओं में बढ़ोतरी होती रही। पिछले कुछ समय से अकबरपुर बस स्टेशन बदहाल है।
एक तरफ जहां स्थानाभाव एक बड़ी समस्या है, वहीं यहां मैनपावर व संसाधनों का संकट बढ़ता जा रहा है। यहां 56 बसों का बेड़ा है। इनमें से 35 बसें ऐसी हैं जो नीलामी की शर्त पूरी करने के बाद भी यात्रियों को ढो रही हैं। 21 बसें ऐसी हैं जो निर्धारित 10 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग इन्हें मरम्मत कर किसी तरह सड़कों पर दौड़ा रहा है। एक दर्जन से अधिक बसें अक्सर डिपो में किसी न किसी समस्या के कारण से खड़ी रहती हैं।
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बस स्टेशन की बदहाली यहीं तक सीमित नहीं है। डिपो को 121 परिचालकों की जरूरत है, लेकिन 94 ही उपलब्ध हैं। 121 चालकों की जरूरत है, लेकिन उपलब्ध 105 हैं। परंतु विभाग इसका संकट दूर नहीं कर पा रहा है।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
अकबरपुर नगर निवासी रवीश शुक्ल ने परिवहन विभाग की इस खस्ताहाली पर कड़ी नाराजगी जतायी। कहा कि सरकार जनता के हितों को लेकर तमाम दावे करती है, लेकिन सुविधाएं देने में नाकाम है। कहा कि कबाड़ हो चुकी बसों को सड़कों पर दौड़ाना न सिर्फ यातायात नियमों की अनदेखी है, बल्कि यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा। कटरिया निवासी राकेश विश्वकर्मा ने भी बदहाल बसों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। कहा कि एक तरफ परिवहन विभाग निजी वाहनों पर फिटनेस ठीक न होने के नाम पर कार्रवाई करता है, दूसरी तरफ परिवहन विभाग की कबाड़ हो चुकी बसों से सड़क पर यात्रियों के ढोने का काम किया जाना गलत है।
किया गया है पत्राचार
विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। बसों की नियमित जांच करायी जाती है। यात्रियों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाता है।
-एसएन चौधरी, एआरएम अकबरपुर
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करीब साढ़े छह दशक पहले अकबरपुर में बस स्टॉप यात्रियों को सुचारु यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया था। लगातार बढ़ती यात्रियों की संख्या व बसों की जरूरत को देखते हुए इसे बाद में डिपो का दर्जा मिल गया। इसके बाद से लगातार यहां सुविधाओं में बढ़ोतरी होती रही। पिछले कुछ समय से अकबरपुर बस स्टेशन बदहाल है।
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एक तरफ जहां स्थानाभाव एक बड़ी समस्या है, वहीं यहां मैनपावर व संसाधनों का संकट बढ़ता जा रहा है। यहां 56 बसों का बेड़ा है। इनमें से 35 बसें ऐसी हैं जो नीलामी की शर्त पूरी करने के बाद भी यात्रियों को ढो रही हैं। 21 बसें ऐसी हैं जो निर्धारित 10 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग इन्हें मरम्मत कर किसी तरह सड़कों पर दौड़ा रहा है। एक दर्जन से अधिक बसें अक्सर डिपो में किसी न किसी समस्या के कारण से खड़ी रहती हैं।
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बस स्टेशन की बदहाली यहीं तक सीमित नहीं है। डिपो को 121 परिचालकों की जरूरत है, लेकिन 94 ही उपलब्ध हैं। 121 चालकों की जरूरत है, लेकिन उपलब्ध 105 हैं। परंतु विभाग इसका संकट दूर नहीं कर पा रहा है।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
अकबरपुर नगर निवासी रवीश शुक्ल ने परिवहन विभाग की इस खस्ताहाली पर कड़ी नाराजगी जतायी। कहा कि सरकार जनता के हितों को लेकर तमाम दावे करती है, लेकिन सुविधाएं देने में नाकाम है। कहा कि कबाड़ हो चुकी बसों को सड़कों पर दौड़ाना न सिर्फ यातायात नियमों की अनदेखी है, बल्कि यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा। कटरिया निवासी राकेश विश्वकर्मा ने भी बदहाल बसों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। कहा कि एक तरफ परिवहन विभाग निजी वाहनों पर फिटनेस ठीक न होने के नाम पर कार्रवाई करता है, दूसरी तरफ परिवहन विभाग की कबाड़ हो चुकी बसों से सड़क पर यात्रियों के ढोने का काम किया जाना गलत है।
किया गया है पत्राचार
विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। बसों की नियमित जांच करायी जाती है। यात्रियों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाता है।
-एसएन चौधरी, एआरएम अकबरपुर