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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   It Could stablush any industry yet

अब तक नहीं लग सका कोई उद्योग

Wed, 19 Aug 2015 10:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Wed, 19 Aug 2015 10:01 PM IST
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व्यापारियों को उनके क्षेत्र में ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर लघु उद्योगों की स्थापना का मौका प्रदान करने के लिए स्थापित मिनी औद्योगिक क्षेत्र अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रहे हैं। नियमत: इसमें सरकार एक निश्चित क्षेत्र का चयन करती है और वहां व्यापारियों को सस्ते दर पर 99 वर्ष के लिए लीज पर भूमि प्रदान करती है।

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इस भूमि पर व्यापारी अपनी योजना के अनुसार लघु उद्योगों की स्थापना कर सकते हैं। इस तरह जिले में तीन मिनी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की गई थी। इनमें से एक अकबरपुर तहसील क्षेत्र के ककरडिला में है। इसकी बदहाली की खबर अमर उजाला ने बुधवार के अंक में प्रकाशित किया था।
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इसी सिलसिले में अमर उजाला टीम पड़ताल के लिए एक अन्य मिनी औद्योगिक क्षेत्र जलालपुर तहसील के कन्नूपुर गांव पहुंची। यहां ढाई एकड़ भूमि में मिनी औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना का निर्णय लिया गया था। कुल 42 भूखंड तैयार किए गए थे। इन सभी का आवंटन भी कर दिया गया लेकिन अब तक संबंधित भूमि पर कोई उद्योग नहीं लग सका।
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संबंधित क्षेत्रफल में अब घासफूस उगी हुई है। स्थानीय नागरिक रामप्यारे व सुरेश के मुताबिक यहां जब मिनी औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना का निर्णय हुआ था, तब ग्रामीणों में इस बात की खुशी थी कि आस पास कई और व्यापार को मजबूती मिलेगी। छोटी छोटी दुकानों पर रोजगार बढ़ेगा, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र ही आबाद नहीं हो सका।

एक अन्य ग्रामीण जानकी कहते हैं कि असल में सरकार योजनाएं तो तमाम बनाती है, लेकिन उसे पूरा करने की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। इसी के चलते लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी तमाम मामलों में पात्रों को लाभ नहीं मिल पाता है।

मिनी औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुए तीन दशक से भी अधिक का लम्बा समय बीत गया। वर्ष 1985 में यहां औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि का चयन हुआ था। कुछ दिनों बाद विद्युतीकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए खंभे आदि भेजे गए। वे लगे भी, लेकिन उनमें तार नहीं खींचे जा सके।

समय के थपेड़ों के बीच तमाम खंभे गायब हो चुके हैं, जबकि जो मौजूद हैं, वे लगातार जर्जर हो रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अब यदि यहां फिर से उद्योगों की स्थापना का कार्य शुरू करना होगा तो नए सिरे से विद्युतीकरण कराना होगा। ऐसे में पहले विद्युतीकरण पर जो धनराशि खर्च हुई थी, उसका कोई मायने नहीं रह गया।

मिनी औद्योगिक क्षेत्र कन्नूपुर में व्यापारियों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 38 लाख 71 हजार रुपए का प्रस्ताव उद्योग निदेशालय भेजा गया है। दरअसल मौके पर न तो विद्युतीकरण की सुविधा है, और न ही मार्ग व अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। इसके चलते ही व्यापारी इधर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति से उबरने के लिए उद्योग विभाग ने सड़क एवं खड़ंजा निर्माण के लिए 38 लाख 71 हजार रुपए का प्रस्ताव भेजा है।

व्यापारी नेता शत्रुघन सोनी ने कहा कि सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना से बात नहीं बनने वाली। भूमि के आवंटन से ही व्यापारी अपना व्यापार कैसे कर सकेगा। उसे आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया कराने की तरफ ध्यान देना होगा। मिनी औद्योगिक क्षेत्रों को उसकी आवश्यकता के अनुरूप बिजली, आवागमन, पेयजल व प्रकाश व्यवस्था मुहैया करानी होगी।

व्यापारी नेता सुरेश गुप्त ने कहा कि दरअसल कागजी औपचारिकता से व्यापारियों का कभी भला होने वाला नहीं है। मिनी औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर कवायद सिर्फ कागजों पर सीमित है। सरकारों को इससे ऊपर उठकर सोचना होगा।


उपायुक्त उद्योग यूसी श्रीवास्तव ने बताया कि कन्नूपुर मिनी औद्योगिक क्षेत्र के लिए 38 लाख से अधिक का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेजा गया है। उसे अनुमति मिलने का इंतजार है। इसके बाद वहां आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करा दी जाएंगी।

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