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शिक्षकों के सम्मान में मनमानी को लेकर जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज

Tue, 07 Sep 2021 11:20 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 11:20 PM IST
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In respect of teachers, the blame will fall on those responsible for arbitrariness
अंबेडकरनगर। शिक्षक दिवस पर अध्यापकों को सम्मानित करने के मामले में की गई मनमानी को लेकर जिम्मेदारों पर गाज गिरना तय हो गया है। डीएम सैमुअल पॉल एन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण की जांच अतिरिक्त एसडीएम भूमिका यादव को सौंप दी है। इससे पहले माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरुण सिंह ने डीएम से मुलाकात कर उन्हें शिक्षकों के सम्मान में की गई मनमानी व नियमों की अनदेखी को लेकर ज्ञापन सौंपा। उधर, मंगलवार के अंक में अमर उजाला ने शिक्षकों के सम्मान में मनमानी को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित की, जिसका भी जिला प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान लिया। डीएम ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई तो उसके अनुरूप जरूरी निर्णय लिया जाएगा।
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बीते दिनों जिला मुख्यालय पर आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों में माध्यमिक शिक्षा व बेसिक शिक्षा विभाग के 75-75 शिक्षकों को उत्कृष्ट शिक्षक के तौर पर राज्य सरकार के निर्देेेश के बाद सम्मानित किया गया था। शिक्षकों के चयन में पारदर्शिता न बरते जाने, रटे रटाए नामों को ही फिर से शामिल कर लिए जाने तथा चयन समिति के सदस्यों द्वारा खुद का नाम सूची में डाल देने आदि की मनमानी समारोह के दौरान सामने आई। शिक्षकों के चयन में की गई मनमानी को लेकर माध्यमिक व बेसिक शिक्षा के ज्यादातर शिक्षकों में आक्रोश देखने को मिला। उनकी आवाज को सिर्फ अमर उजाला ने अत्यंत प्रमुखता से प्रकाशित किया। माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी इसे लेकर आवाज उठाई। मंगलवार के अंक में शिक्षकों के चयन में की गई मनमानी की खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम सैमुअल पॉल एन ने इसे अत्यंत गंभीरता व प्राथमिकता के साथ लिया। अमर उजाला में तथ्यवार प्रकाशित खबर को पढ़ने आदि के बाद डीएम ने तय किया कि इस मनमानी की जांच मजिस्ट्रेट से कराई जाएगी।
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इसी बीच मंगलवार को दोपहर माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम से मुलाकात की। उन्होंने डीएम को बताया कि शिक्षकों के चयन में शासन की ओर से निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर घोर लापरवाही की गई है। चयन समिति के सदस्यों ने शासनादेश के विपरीत खुद का नाम सूची में डाल लिया। कई अन्य तरह के आरोप लगाते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराते हुए समुचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
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उधर, इसके अलावा डीएम को कुछ गणमान्य व्यक्तियों की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि बेसिक शिक्षा में भी मनमानी हुई है। वहां रटे रटाए तमाम नामों को इस बार भी शामिल कर दिया गया। ऐसे कई नाम हैं, जो प्रत्येक सम्मान या अन्य समारोह में मंच पर नजर आते हैं। यह भी बताया गया कि नए शिक्षकों को मौका देने की बजाय चंद शिक्षकों को ही प्रत्येक सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मंच संचालन आदि के लिए आगे कर दिया जाता है। ऐसा कर उन शिक्षकों का हक प्रभावित किया जाता है, जिन्हें आगे आकर सीखने व समझने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलना चाहिए।
डीएम ने मंगलवार को दोपहर बाद पूरी परिस्थितियों व शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शिक्षकों के सम्मान को लेकर आई आपत्तियों की जांच कलेक्ट्रेट में तैनात अतिरिक्त एसडीएम भूमिका यादव को सौंप दी। डीएम ने कहा कि प्रकरण की विस्तृत जांच सुनिश्चित करते हुए यह देखा जाए कि किस-किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के अनुरूप जरूरी एक्शन लिया जाएगा।
दागियों को चयन समिति में किया गया शामिल
माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने डीएम को सौंपे पत्र में कहा कि चयन समिति में कई दागी सदस्यों को शामिल कर लिया गया है। बताया गया कि चयन समिति के एक सदस्य का वित्तीय अनियमितता में दो बार निलंबन हो चुका है। जबकि एक सदस्य पर अपने विद्यालय के मूल्यांकन केंद्र पर भ्रष्टाचार कराने का आरोप है। चयन समिति के एक सदस्य को बोर्ड परीक्षा में गंभीर गड़बड़ी पर केंद्र व्यवस्थापक के पद से हटाया जा चुका है। जबकि एक सदस्य के ऊपर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है और उनका विद्यालय मूल्यांकन केंद्र के लिए आजीवन डिबार किया जा चुका है। चयन समिति में एक ऐसी प्रधानाचार्य को शामिल किया गया है, जिनके हाईस्कूल का परिणाम अत्यंत ही खराब रहा है। लिखित शिकायत में कहा गया कि चयन समिति के ज्यादातर सदस्य विद्यालय में रहने की बजाय डीआईओएस कार्यालय पर मंडराते रहते हैं। यह भी कहा गया कि चयन समिति के सदस्यों ने अपने-अपने विद्यालय के शिक्षकों को ही उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार दिलाने में ज्यादा ध्यान दिया। यह भी शिकायत की गई कि चयन समिति के सदस्यों ने पुरस्कार दिलाने के नाम पर तमाम अध्यापकों व प्रधानाचार्य से बड़े पैमाने पर धन उगाही भी की गई।

सोशल मीडिया पर बोले लोग, थैंक्स अमर उजाला
अमर उजाला ने शिक्षकों के सम्मान में मनमानी की खबर को जिस प्रमुखता से प्रकाशित किया, उसका नागरिकों ने थैंक्स बोलकर सोशल मीडिया पर जमकर स्वागत किया। प्रसिद्ध ओज कवि अभय निर्भीक ने इसे असली पत्रकारिता बताया तो वहीं शिक्षक उमेश कुमार पांडेय व निरंजन लाल ने पोस्ट कर कहा कि अमर उजाला सदैव सच के साथ। एक यूजर हेमंत त्रिपाठी ने सही मुद्दा उठाने के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि जो शिक्षक सम्मानित हुए हैं, उनमें से ज्यादातर की असलियत तब सामने आ जाएगी, यदि डीएम या कोई अन्य अधिकारी किसी विषय में डेमो क्लास करवा लें। कहा कि सम्मानित होने वाले शिक्षकों में से ज्यादातर ऐसे हैं, जो महीने में दस-दिन ही क्लास लेने पहुंचते हैं। कृष्ण प्रकाश राय ने खबरों को लेकर सैल्यूट किया तो वहीं आलोक त्रिपाठी ने अंधा बाटे रेवड़ी, घरे घराना खाय की कहावत पोस्ट कर डाली। अवधेश मिश्र ने खबर को जोरदार बताते हुए कहा कि अमर उजाला ऐसे मामलों में पैनी नजर रखता है तो वहीं महेंद्र मिश्र ने खबर को एकदम सही बताया तो वहीं टोनी श्रीवास्तव का कहना था कि अंदर तक की खबर सामने लाई गई है।
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