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Ambedkar Nagar News: मैं भिउरा! मेरा दामन तो कभी न था दागदार, फिर क्यों और कैसे ?
Sat, 24 May 2025 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 24 May 2025 10:58 PM IST
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भिउरा गांव में किशोरी के घर जाने वाले मार्ग पर पसरा सन्नाटा।
मैं भिउरा हूं। मेरा दामन हमेशा से साफ रहा है। इस पर आज तक कोई दाग नहीं लगा। हम तक पहुंचने वाली सड़कें भले खराब हों, लेकिन यहां रहने वाले लोगों ने कभी कोई शिकायत नहीं की। जमीन के बंटवारे के लिए भाई-भाई से नहीं लड़े। पुलिस के कदम मेरी दहलीज पर तभी पड़े, जब सुरक्षा का एहसास दिलाना हों। फिर तीन दिनों में ऐसा क्या हुआ, कैसे हुआ, जिससे मेरे माथे पर तीन-तीन मौतों का कलंक लग गया।
भिउरा की गोद में रहने वाले 1200 से ज्यादा लोगों के मन में आज यही सवाल कौंध रहा है। मंगलवार की रात जिस गांव में शादी की शहनाइयां बज रही थीं, उस गांव के लिए बुधवार की सुबह किसी अंधियारे से कम न थी। शिक्षा के मंदिर में दो युवकों का लाशों ने सिर्फ गांव ही नहीं पूरे जिले और यहां की सीमाओं को लांघकर गाजीपुर तक हंगामा मचा दिया। पहले जिसे लोग आत्महत्या समझ रहे थे, आज उन दोनों की हत्या का लांछन भी भिउरा पर है। भिउरा इस सदमे से उभरने की दिन रात कोशिश कर ही रहा था कि यहां की एक बिटिया की पारिस्थितिजन्य आत्महत्या ने दुख के समंदर में ऐसा डुबो दिया कि इससे बाहर निकल पाने में दशकों लग जाएंगे।
भिउरा से ज्यादा दिल दुखा है इस बिटिया के बुजर्गावस्था की ओर कदम बढ़ा चुके माता पिता का। नीली टीशर्ट और उस पर अलग से कपड़ा लगाकर तिरुपी गई खाली जेब पिता की बदहाली को बयां करने के लिए काफी है। दुख की इंतहा इतनी है कि अपनी बिटिया के साथ हुई अनहोनी को बयान करने में जुबां लड़खड़ा जा रही है। मां के आंखों से बहता नीर और उनका सिसकना बंद नहीं हुआ है। जिस विद्यालय में पेड़ की छांव में बच्चे अठखेलियां करते थे, वहां लोग जाने से भी डर रहे हैं। आने वाला समय भिउरा को अभी क्या क्या दिखाता है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तो तय है कि अगले कुछ समय तक गांव में चहल पहल की जगह मातमी सन्नाटा पसरा रहेगा।
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भिउरा की गोद में रहने वाले 1200 से ज्यादा लोगों के मन में आज यही सवाल कौंध रहा है। मंगलवार की रात जिस गांव में शादी की शहनाइयां बज रही थीं, उस गांव के लिए बुधवार की सुबह किसी अंधियारे से कम न थी। शिक्षा के मंदिर में दो युवकों का लाशों ने सिर्फ गांव ही नहीं पूरे जिले और यहां की सीमाओं को लांघकर गाजीपुर तक हंगामा मचा दिया। पहले जिसे लोग आत्महत्या समझ रहे थे, आज उन दोनों की हत्या का लांछन भी भिउरा पर है। भिउरा इस सदमे से उभरने की दिन रात कोशिश कर ही रहा था कि यहां की एक बिटिया की पारिस्थितिजन्य आत्महत्या ने दुख के समंदर में ऐसा डुबो दिया कि इससे बाहर निकल पाने में दशकों लग जाएंगे।
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भिउरा से ज्यादा दिल दुखा है इस बिटिया के बुजर्गावस्था की ओर कदम बढ़ा चुके माता पिता का। नीली टीशर्ट और उस पर अलग से कपड़ा लगाकर तिरुपी गई खाली जेब पिता की बदहाली को बयां करने के लिए काफी है। दुख की इंतहा इतनी है कि अपनी बिटिया के साथ हुई अनहोनी को बयान करने में जुबां लड़खड़ा जा रही है। मां के आंखों से बहता नीर और उनका सिसकना बंद नहीं हुआ है। जिस विद्यालय में पेड़ की छांव में बच्चे अठखेलियां करते थे, वहां लोग जाने से भी डर रहे हैं। आने वाला समय भिउरा को अभी क्या क्या दिखाता है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तो तय है कि अगले कुछ समय तक गांव में चहल पहल की जगह मातमी सन्नाटा पसरा रहेगा।
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