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फाइलों में दबी राजकीय पार्क की हरियाली
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अंबेडकरनगर। जिला मुख्यालय स्थित एक मात्र राजकीय पार्क को विकसित कर हरा भरा बनाने का प्रस्ताव बीते दो साल से उद्यान निदेशालय की फाइलों में दबा है। एक तरफ अमृत सरोवर योजना के तहत गांवों में तालाबों का निर्माण कर इसके किनारे पार्क विकसित कराए जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ शहर का एकमात्र राजकीय उद्यान जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बदहाल हालत में पड़ा है। मरम्मत व अनुश्रवण कार्य न होने से पार्क में संचालित मोटर बोटिंग व फव्वारा जहां सालों से बंद पड़ा है वही झूले व पार्क के अंदर की सड़के भी बदहाल पड़ी हैं।
राजकीय पार्क की बदहाली दूर कर इसे शहर का एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाने के लिए दो करोड़ की धनराशि का एक प्रस्ताव दो साल निदेशालय को भेजा गया था। इसके तहत पार्क में नए सिरे से पिच मार्ग बनवाने, इंटरलाकिंग लगवाने के साथ ही नया फव्वारा व झूले लगवाने के साथ ही पार्क को हरा भरा बनाकर खूबसूरत बनाने का कार्य किया जाना था।
शहर स्थिति इस एकमात्र राजकीय पार्क के विकसित होने से शहरवासियों को भी सुबह शाम टहलने के साथ ही पर्यटन के लिए एक बेहतर स्थान मिलने की उम्मीद थी। करीब दो दशक पहले विकसित राजकीय पार्क की देखभाल न होने से साल दर साल इसकी हालत बदहाल हो चुकी है। पार्क के नाम पर यहां सिर्फ पेड़ पौधे व बेतरतीब उगी घास ही दिखती हैं। पार्क में न तो बच्चों के मनोरंजन से जुड़े कोई संसाधन व झूले बचे हैं और न ही बैठने के लिए बैंच व पेयजल की व्यवस्था है। कभी पूरे पार्क का आकर्षण बना फव्वारा भी लंबे समय से बंद पड़ा है।
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मार्च 2021 में उद्यान निदेशालय को शहर के एकमात्र राजकीय पार्क की बदहाली दूर कराने के लिए दो करोड़ की लागत से कराए जाने कार्यों का एक प्रस्ताव भेजा गया था। अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली है। मरम्मत व अनुश्रवण कार्य के लिए अपेक्षित धनराशि न मिल पाने के कारण ही पार्क की बदहाली दूर नहीं हो पा रही। जल्द ही इस संबंध में उद्यान निदेशालय को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
संजय रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी
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राजकीय पार्क की बदहाली दूर कर इसे शहर का एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाने के लिए दो करोड़ की धनराशि का एक प्रस्ताव दो साल निदेशालय को भेजा गया था। इसके तहत पार्क में नए सिरे से पिच मार्ग बनवाने, इंटरलाकिंग लगवाने के साथ ही नया फव्वारा व झूले लगवाने के साथ ही पार्क को हरा भरा बनाकर खूबसूरत बनाने का कार्य किया जाना था।
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शहर स्थिति इस एकमात्र राजकीय पार्क के विकसित होने से शहरवासियों को भी सुबह शाम टहलने के साथ ही पर्यटन के लिए एक बेहतर स्थान मिलने की उम्मीद थी। करीब दो दशक पहले विकसित राजकीय पार्क की देखभाल न होने से साल दर साल इसकी हालत बदहाल हो चुकी है। पार्क के नाम पर यहां सिर्फ पेड़ पौधे व बेतरतीब उगी घास ही दिखती हैं। पार्क में न तो बच्चों के मनोरंजन से जुड़े कोई संसाधन व झूले बचे हैं और न ही बैठने के लिए बैंच व पेयजल की व्यवस्था है। कभी पूरे पार्क का आकर्षण बना फव्वारा भी लंबे समय से बंद पड़ा है।
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मार्च 2021 में उद्यान निदेशालय को शहर के एकमात्र राजकीय पार्क की बदहाली दूर कराने के लिए दो करोड़ की लागत से कराए जाने कार्यों का एक प्रस्ताव भेजा गया था। अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली है। मरम्मत व अनुश्रवण कार्य के लिए अपेक्षित धनराशि न मिल पाने के कारण ही पार्क की बदहाली दूर नहीं हो पा रही। जल्द ही इस संबंध में उद्यान निदेशालय को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
संजय रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी