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Ambedkar Nagar News: सच्चे मन से पुकारने पर मदद करते भगवान
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कटेहरी (अंबेडकरनगर)। थाना क्षेत्र अहिरौली के लोकापुर गांव स्थित ककरहिया बाग में सोमवार को नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा व होमात्मक शतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन भी सामूहिक हवन-पूजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कथावाचिका ने कहा कि सच्चे मन से भगवान को पुकारने पर वह भक्तों की मदद करते हैं।
दोपहर बाद कथावाचिका साध्वी सृष्टिलता रामायणी ने संगीतमयी कथा का रसपान कराया। उन्होंने शुकदेव के जन्म से जुड़ी कथा सुनाई। बताया कि एक बार भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। कथा सुनते हुए पार्वती को नींद आ गई। वहां बैठे शुक ने हुंकार भरनी शुरू कर दी। भगवान को यह पता चला तो उन्होंने शुक को मारने के लिए अपना त्रिशूल छोड़ दिया।
शुक अपनी जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागते हुए महर्षि वेद व्यास के आश्रम में पहुंचे। लघु रूप धारण कर उनकी पत्नी के मुख में घुस गए और 12 वर्ष के बाद उनके गर्भ से बाहर आए।
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भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर शुक को आश्वासन दिया कि बाहर आने पर तुम्हें कुछ नहीं होगा। इसके बाद शुक बाहर आए और व्यास जी के पुत्र कहलाए। गर्भ में ही उन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का ज्ञान हो गया था।
कथावाचिका ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित जन्म, द्रोपदी चीर हरण आदि प्रसंगों की भी कथा सुनाई। कहा कि हमें पूरी श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करना चाहिए। आयोजन को सफल बनाने में आयोजक काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारी पं. तीर्थराज त्रिपाठी व अन्य लोग जुटे रहे।
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दोपहर बाद कथावाचिका साध्वी सृष्टिलता रामायणी ने संगीतमयी कथा का रसपान कराया। उन्होंने शुकदेव के जन्म से जुड़ी कथा सुनाई। बताया कि एक बार भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। कथा सुनते हुए पार्वती को नींद आ गई। वहां बैठे शुक ने हुंकार भरनी शुरू कर दी। भगवान को यह पता चला तो उन्होंने शुक को मारने के लिए अपना त्रिशूल छोड़ दिया।
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शुक अपनी जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागते हुए महर्षि वेद व्यास के आश्रम में पहुंचे। लघु रूप धारण कर उनकी पत्नी के मुख में घुस गए और 12 वर्ष के बाद उनके गर्भ से बाहर आए।
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भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर शुक को आश्वासन दिया कि बाहर आने पर तुम्हें कुछ नहीं होगा। इसके बाद शुक बाहर आए और व्यास जी के पुत्र कहलाए। गर्भ में ही उन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का ज्ञान हो गया था।
कथावाचिका ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित जन्म, द्रोपदी चीर हरण आदि प्रसंगों की भी कथा सुनाई। कहा कि हमें पूरी श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करना चाहिए। आयोजन को सफल बनाने में आयोजक काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारी पं. तीर्थराज त्रिपाठी व अन्य लोग जुटे रहे।