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Ambedkar Nagar News: मारपीट के मामले में पांच दोषी परिवीक्षा पर रिहा
Sat, 14 Feb 2026 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 14 Feb 2026 12:28 AM IST
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अंबेडकरनगर। जलालपुर के ग्राम शोखपुरा राजकुमारी में जमीन विवाद के दौरान हुई मारपीट के मामले में कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए परिवीक्षा पर रिहा किया है। हरिराम ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उनके मौसा भिनकू को एक जमीन का पट्टा 96 व्यक्तियों के साथ आठ जुलाई 1983 को दिया गया था। उनके देहांत के बाद मौसी पंचवी देवी ने वर्ष 1990 में नींव खुदवाकर दीवार बनाने का प्रयास किया था। गांव के प्रधान ने एक हजार रुपये की मांग की थी। रुपये न देने पर देख लेने की धमकी दी थी।
छह अक्तूबर 1990 को गांव के मुरली प्रधान अशोक सिंह के साथ कोर्ट पहुंचे और स्टे ऑर्डर लेकर काम रुकवा दिया था। सात अक्तूबर 1990 को प्रधान अशोक सिंह, चुन्नीलाल, रामसूरत, जमुना प्रसाद, छांगुर, खेलई, मुरली, हृदेश कुमार ने चार फीट ऊंची दीवार व नींव खोद डाली और मौसी को धक्का देकर गिरा दिया था। बीच-बचाव करने पर फिरतू को घायल कर दिया था।
पुलिस ने गैर-इरादतन जानलेवा हमले, बलवे समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी और आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामविलास सिंह की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने विचारण करते हुए अशोक कुमार सिंह, हृदेश कुमार, जमुना प्रसाद, मुरली व छांगुर को मारपीट व बलवे का दोषी पाया। इन्हें गैर-इरादतन जानलेवा हमले के आरोप से दोषमुक्त किया गया। कोर्ट ने पांचों को एक वर्ष की परिविक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया।
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छह अक्तूबर 1990 को गांव के मुरली प्रधान अशोक सिंह के साथ कोर्ट पहुंचे और स्टे ऑर्डर लेकर काम रुकवा दिया था। सात अक्तूबर 1990 को प्रधान अशोक सिंह, चुन्नीलाल, रामसूरत, जमुना प्रसाद, छांगुर, खेलई, मुरली, हृदेश कुमार ने चार फीट ऊंची दीवार व नींव खोद डाली और मौसी को धक्का देकर गिरा दिया था। बीच-बचाव करने पर फिरतू को घायल कर दिया था।
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पुलिस ने गैर-इरादतन जानलेवा हमले, बलवे समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी और आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामविलास सिंह की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने विचारण करते हुए अशोक कुमार सिंह, हृदेश कुमार, जमुना प्रसाद, मुरली व छांगुर को मारपीट व बलवे का दोषी पाया। इन्हें गैर-इरादतन जानलेवा हमले के आरोप से दोषमुक्त किया गया। कोर्ट ने पांचों को एक वर्ष की परिविक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया।
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