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Ambedkar Nagar News: गरीबी से लड़कर बनीं आत्मनिर्भर, डिप्टी सीएम ने सराहा
Mon, 22 Dec 2025 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 22 Dec 2025 11:31 PM IST
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रविवार को लखनऊ में डिप्टी सीएम से सम्मानित होती बैंक सखी रेनू विश्वकर्मा।
अंबेडकरनगर। अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर गरीबी को मात देने वाली रामनगर गोविंद साहब, अहिरौली की बैंक सखी रेनू विश्वकर्मा आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
रविवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनको सम्मानित किया। रेनू का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। बचपन में ही पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया था। सहारा न होने के कारण रेनू ने वर्ष 2019 में घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए अपने गांव में ब्यूटी पार्लर शुरू किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय बैंक सखी के रूप में नई शुरुआत की।
शुरुआती दौर में रेनू को कई बाधाओं और परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन निरंतर प्रयासों ने रंग दिखाया। आज वे बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए प्रति माह 8 से 10 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
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रेनू ने बताया कि परिवार में भाई या किसी अन्य पुरुष सदस्य का सहारा न होने के बावजूद उन्होंने शादी के बाद मायके में ही रहकर अपनी मां का हाथ बंटाया और आत्मनिर्भर बनकर परिवार को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने की ठानी। उनकी इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि साहस और परिश्रम से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
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रविवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनको सम्मानित किया। रेनू का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। बचपन में ही पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया था। सहारा न होने के कारण रेनू ने वर्ष 2019 में घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए अपने गांव में ब्यूटी पार्लर शुरू किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय बैंक सखी के रूप में नई शुरुआत की।
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शुरुआती दौर में रेनू को कई बाधाओं और परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन निरंतर प्रयासों ने रंग दिखाया। आज वे बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए प्रति माह 8 से 10 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
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रेनू ने बताया कि परिवार में भाई या किसी अन्य पुरुष सदस्य का सहारा न होने के बावजूद उन्होंने शादी के बाद मायके में ही रहकर अपनी मां का हाथ बंटाया और आत्मनिर्भर बनकर परिवार को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने की ठानी। उनकी इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि साहस और परिश्रम से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।