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फाल आर्मी वार्म कीट को लेकर सतर्कता बरतें किसान
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अंबेडकरनगर। प्रदेश के कई जनपदों में फाल आर्मी वार्म कीट की पहचान हुई है। धान, मक्का, ज्वार, बजरा व गन्ना आदि फसलों को ये कीट तेजी से नुकसान पहुंचते हैं। इस कीट की मादा ज्यादातर पत्तियों के निचले सतह पर अंडे देती है। इसकी मादा एक से ज्यादा पर्त में अंडे देकर सफेद झसर से ढक देती हैं। फसलों में इनका प्रकोप जब होता है, तो यह काफी तेजी से फैलता है। ऐसे में जरूरी है कि किसान अपनी फसलों की गहनता से निगरानी करें। यदि ऐसा कोई लक्षण दिखाई पड़े तो तत्काल जरूरी प्रबंधन करें।
जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि इस कीट का लार्वा भूरा धूसर रंग का होता है। उसके शरीर के साथ साथ अलग से टयूबरकल दिखता है। इस कीट के लार्वा अवस्था में पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियां और सिर पर सफेद उल्टा अंग्रेजी शब्द का वाई दिखता है। शरीर के दूसरे अंतिम खंड पर वर्गाकार चार बिन्दु दिखाई देते हैं।
यह कीट फसल को लगभग सभी अवस्थाओं में नुकसान पहुंचाता है, लेकिन मक्का इस कीट की रुचिकर फसल है। यह कीट मक्का के पत्तों के साथ साथ बाली को विशेष रूप से प्रभावित करता है। इस कीट के लार्वा मक्के के छोटे पौधे के डंठल आदि के अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं। कीट के प्रकोप की पहचान फसल की बढ़वार की अवस्था में पत्तियों के खुरच कर खाने से पारदर्शी झिल्ली बनने, पत्तियों में छिद्र एवं कीट के मलमूत्र से की जा सकती है।
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जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि इस कीट से बचाव के लिए फसल बुवाई से पूर्व खेत की गहरी जुताई करना चाहिए। एफएडब्लू के अंडों एवं लार्वा को एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिए। एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम (नीम आयल) का छिड़काव करने से यह कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा कई तरह की कीटनाशक दवाएं हैं, जिसका प्रयोग किसानों को करना चाहिए।
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जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि इस कीट का लार्वा भूरा धूसर रंग का होता है। उसके शरीर के साथ साथ अलग से टयूबरकल दिखता है। इस कीट के लार्वा अवस्था में पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियां और सिर पर सफेद उल्टा अंग्रेजी शब्द का वाई दिखता है। शरीर के दूसरे अंतिम खंड पर वर्गाकार चार बिन्दु दिखाई देते हैं।
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यह कीट फसल को लगभग सभी अवस्थाओं में नुकसान पहुंचाता है, लेकिन मक्का इस कीट की रुचिकर फसल है। यह कीट मक्का के पत्तों के साथ साथ बाली को विशेष रूप से प्रभावित करता है। इस कीट के लार्वा मक्के के छोटे पौधे के डंठल आदि के अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं। कीट के प्रकोप की पहचान फसल की बढ़वार की अवस्था में पत्तियों के खुरच कर खाने से पारदर्शी झिल्ली बनने, पत्तियों में छिद्र एवं कीट के मलमूत्र से की जा सकती है।
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जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि इस कीट से बचाव के लिए फसल बुवाई से पूर्व खेत की गहरी जुताई करना चाहिए। एफएडब्लू के अंडों एवं लार्वा को एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिए। एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम (नीम आयल) का छिड़काव करने से यह कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा कई तरह की कीटनाशक दवाएं हैं, जिसका प्रयोग किसानों को करना चाहिए।