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Ambedkar Nagar News: सोलर पैनल के लिए किसानों का एक करोड़ रुपये दबाया
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अंबेडकरनगर। किसानों को सोलर पैनल देने की सुविधा के नाम पर एक कार्यदायी संस्था किसानों का लगभग एक करोड़ रुपये दबाकर बैठ गई है। इससे पहले गुजरात की एक कंपनी ने जहां 13 किसानों को सोलर पैनल देकर 62 किसानों को सुविधा दे देने की फर्जी जानकारी शासन को दी थी वहीं अब कर्नाटक की कार्यदायी संस्था ने किसानों को ठेंगा दिखा दिया है। सोलर पैनल लगवाने के लिए 59 लोगों ने रकम जमा किया लेकिन सिर्फ छह लोगों को ही सुविधा दी गई। विभाग अब दूसरी कार्यदायी संस्था के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी में है।
किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा दिलाने के नाम पर शुरू की गई योजना किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (कुसुम योजना) की शुरूआत केंद्र सरकार ने की है। इसमें किसानों को बोरिंग कराने के बाद सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन लेने या फिर डीजल के खर्चीले संचालन से निजात दिलाने के लिए सोलर पंप देने की सुविधा है। अनुदान पर मिलने वाली यह सुविधा किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।
लेकिन योजना से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी ने किसानों का हद दर्जे तक शोषण किया है। बीते वर्ष के लिए चयनित गुजरात की एक संस्था ने डिमांड ड्राफ्ट लेने के बाद भी सिर्फ 13 किसानों को ही सोलर पैनल दिए। 62 किसानों को सोलर पैनल दिए बगैर ही शासन को इन किसानों को लाभान्वित करने की जानकारी दे दी। एक दिन पहले जिले में आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संबंधित संस्था के खिलाफ केस दर्ज करने व काली सूची में डालने का निर्देश दिया था। इस खबर के बाद विभाग में जाकर जब योजना से जुड़ी पड़ताल की गई तो मौजूदा वर्ष के लिए एक नई कार्यदायी संस्था द्वारा भी बड़ी मनमानी का खुलासा हुआ है।
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खबर है कि जनवरी माह में कर्नाटक की एक कार्यदायी संस्था को योजना के लिए अधिकृत किया गया। कुल 59 किसानों ने आवेदन किया। इनमें से सिर्फ छह किसानों को ही सोलर पैनल का लाभ मिला। करीब चार माह बाद भी अभी 53 किसानों को यह पता नहीं चल सका है कि सोलर पैनल कब तक मिलेगा। बताया जाता है कि अलग-अलग क्षमता के आधार पर करीब एक करोड़ रुपये इस सुविधा के लिए किसानों ने संस्था के खाते में जमा किए थे।
पैसा जमा किया, नहीं मिला लाभ
श्रवणक्षेत्र के बैजपुर निवासी रानाप्रताप सिंह ने बताया कि सात सितंबर 2022 को तीन किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल के लिए 77,384 रुपये जमा किए थे। बोरिंग कराने के लिए भी 60 हजार रुपये खर्च हुआ था। इसके बाद से सोलर पैनल मिलने का इंतजार है। अब तक यह सुविधा न मिल पाने से गहरी निराशा है।
उम्मीदें हुईं चकनाचूर
केशवपुर निवासी प्रेमशंकर मिश्र ने बताया कि जुलाई 2022 में तीन किलोवॉट के लिए करीब 80 हजार रुपये जमा करना पड़ा था। इससे पहले विभाग की योजना के अनुसार उन्होंने 55 हजार से अधिक रुपये खर्च कर बोरिंग भी करा डाली। उम्मीद थी कि सोलर पैनल लग जाएगा तो इसके जरिए सिंचाई करने से बिजली के खर्च से मिल सकेगी। हालांकि अब तक ऐसा नहीं हो पाया।
किसानों ने जताई नाराजगी
भियांव के मीरपुर निवासी तिलकधारी तिवारी ने बताया कि 10 किलोवॉट सोलर पैनल के लिए फरवरी माह में 2.42 लाख रुपये जमा किया तो वहीं पटोहा गानेपुर निवासी जीतबहादुर सिंह ने पांच किलोवॉट के लिए 1 लाख 9 हजार, हासिमगढ़ छितूनी निवासी हरिगोपाल ने साढ़े सात किलोवॉट के लिए 1.48 लाख, जबकि ज्ञानपुर निवासी उमाशंकर वर्मा ने पांच किलोवॉट के लिए 1 लाख 9 हजार रुपये जमा किए। इन किसानों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि कई माह बीत जाने के बाद अब तक लाभ नहीं मिल सका है।
भेजा गया है पत्र
कार्यदायी संस्था टाटा पावर सोलर प्राइवेट लिमिटेड ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए कार्य में तेजी नहीं दिखाई है। इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है। गत वित्तीय वर्ष के लिए कार्यदायी संस्था सहज सोलर प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई की जा रही है। इस वित्तीय वर्ष के लिए नामित संस्था ने जल्द ही लाभ नहीं दिया तो एक्शन लिया जाएगा। - बृजेश कुमार, उप कृषि निदेशक
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किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा दिलाने के नाम पर शुरू की गई योजना किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (कुसुम योजना) की शुरूआत केंद्र सरकार ने की है। इसमें किसानों को बोरिंग कराने के बाद सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन लेने या फिर डीजल के खर्चीले संचालन से निजात दिलाने के लिए सोलर पंप देने की सुविधा है। अनुदान पर मिलने वाली यह सुविधा किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।
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लेकिन योजना से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी ने किसानों का हद दर्जे तक शोषण किया है। बीते वर्ष के लिए चयनित गुजरात की एक संस्था ने डिमांड ड्राफ्ट लेने के बाद भी सिर्फ 13 किसानों को ही सोलर पैनल दिए। 62 किसानों को सोलर पैनल दिए बगैर ही शासन को इन किसानों को लाभान्वित करने की जानकारी दे दी। एक दिन पहले जिले में आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संबंधित संस्था के खिलाफ केस दर्ज करने व काली सूची में डालने का निर्देश दिया था। इस खबर के बाद विभाग में जाकर जब योजना से जुड़ी पड़ताल की गई तो मौजूदा वर्ष के लिए एक नई कार्यदायी संस्था द्वारा भी बड़ी मनमानी का खुलासा हुआ है।
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खबर है कि जनवरी माह में कर्नाटक की एक कार्यदायी संस्था को योजना के लिए अधिकृत किया गया। कुल 59 किसानों ने आवेदन किया। इनमें से सिर्फ छह किसानों को ही सोलर पैनल का लाभ मिला। करीब चार माह बाद भी अभी 53 किसानों को यह पता नहीं चल सका है कि सोलर पैनल कब तक मिलेगा। बताया जाता है कि अलग-अलग क्षमता के आधार पर करीब एक करोड़ रुपये इस सुविधा के लिए किसानों ने संस्था के खाते में जमा किए थे।
पैसा जमा किया, नहीं मिला लाभ
श्रवणक्षेत्र के बैजपुर निवासी रानाप्रताप सिंह ने बताया कि सात सितंबर 2022 को तीन किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल के लिए 77,384 रुपये जमा किए थे। बोरिंग कराने के लिए भी 60 हजार रुपये खर्च हुआ था। इसके बाद से सोलर पैनल मिलने का इंतजार है। अब तक यह सुविधा न मिल पाने से गहरी निराशा है।
उम्मीदें हुईं चकनाचूर
केशवपुर निवासी प्रेमशंकर मिश्र ने बताया कि जुलाई 2022 में तीन किलोवॉट के लिए करीब 80 हजार रुपये जमा करना पड़ा था। इससे पहले विभाग की योजना के अनुसार उन्होंने 55 हजार से अधिक रुपये खर्च कर बोरिंग भी करा डाली। उम्मीद थी कि सोलर पैनल लग जाएगा तो इसके जरिए सिंचाई करने से बिजली के खर्च से मिल सकेगी। हालांकि अब तक ऐसा नहीं हो पाया।
किसानों ने जताई नाराजगी
भियांव के मीरपुर निवासी तिलकधारी तिवारी ने बताया कि 10 किलोवॉट सोलर पैनल के लिए फरवरी माह में 2.42 लाख रुपये जमा किया तो वहीं पटोहा गानेपुर निवासी जीतबहादुर सिंह ने पांच किलोवॉट के लिए 1 लाख 9 हजार, हासिमगढ़ छितूनी निवासी हरिगोपाल ने साढ़े सात किलोवॉट के लिए 1.48 लाख, जबकि ज्ञानपुर निवासी उमाशंकर वर्मा ने पांच किलोवॉट के लिए 1 लाख 9 हजार रुपये जमा किए। इन किसानों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि कई माह बीत जाने के बाद अब तक लाभ नहीं मिल सका है।
भेजा गया है पत्र
कार्यदायी संस्था टाटा पावर सोलर प्राइवेट लिमिटेड ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए कार्य में तेजी नहीं दिखाई है। इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है। गत वित्तीय वर्ष के लिए कार्यदायी संस्था सहज सोलर प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई की जा रही है। इस वित्तीय वर्ष के लिए नामित संस्था ने जल्द ही लाभ नहीं दिया तो एक्शन लिया जाएगा। - बृजेश कुमार, उप कृषि निदेशक