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विद्युत आपूर्ति बदहाली से परेशान हो रहे ग्रामीण
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महरुआ। अघोषित विद्युत कटौती से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। हालत यह है कि निर्धारित 18 घंटे रोस्टर के सापेक्ष महज 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। नतीजतन भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है। वहीं जर्जर विद्युत उपकरण भी सुचारु विद्युत आपूर्ति में बाधक बन रहे हैं लेकिन विभाग इन जर्जर उपकरणों को बदलने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
गौरतलब है कि महरुआ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को इन दिनों गर्मी के बीच सुचारु विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। यूं तो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विभाग ने 18 घंटे का रोस्टर निर्धारित कर रखा है लेकिन इसके सापेक्ष ग्रामीणों को सिर्फ 10 घंटे की आपूर्ति ही मिल पा रही है। इसमें कभी गड़बड़ी दूर करने के लिए शटडाउन के नाम पर बिजली काट दी जाती है तो कभी अन्य समस्या का हवाला देकर आपूर्ति बाधित कर दी जाती है।
दरअसल विभाग लंबे समय से जर्जर हो चुके तारों व अन्य उपकरणों को बदलवाने को लेकर कोई खास तेजी नहीं दिखा सका है जिसके चलते आये दिन कहीं न कहीं थोड़ा-सा ओवरलोड पड़ते ही फाल्ट अथवा ट्रांसफार्मर आदि जवाब दे जाते हैं जो सुचारु आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं। इसका असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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ग्रामीणों की मानें तो आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय से बेपटरी हो चुकी है। नतीजतन उमस के बीच लोगों को पेयजल किल्लत के साथ-साथ कई अन्य समस्याओं को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। वहीं किसान अशोक सिंह, सूरज वर्मा, मनीराम गौड़, शिवम तिवारी, सीताराम मिश्र व सोनू आदि का कहना है कि सुचारु आपूर्ति न होने से खेतीबारी के कार्य बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहे हैं।
मौजूदा समय में धान की नर्सरी व सब्जी आदि की खेती की समय से सिंचाई न होने से उस पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यदि आपूर्ति व्यवस्था ऐसी ही रही तो धान आदि की रोपाई में काफी मुश्किल होगी। अधिशाषी अभियंता वीके पटेल ने बताया कि रोस्टर के अनुरूप विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास चल रहे हैं। जल्द ही सभी जर्जर उपकरण बदलवा दिए जाएंगे।
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गौरतलब है कि महरुआ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को इन दिनों गर्मी के बीच सुचारु विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। यूं तो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विभाग ने 18 घंटे का रोस्टर निर्धारित कर रखा है लेकिन इसके सापेक्ष ग्रामीणों को सिर्फ 10 घंटे की आपूर्ति ही मिल पा रही है। इसमें कभी गड़बड़ी दूर करने के लिए शटडाउन के नाम पर बिजली काट दी जाती है तो कभी अन्य समस्या का हवाला देकर आपूर्ति बाधित कर दी जाती है।
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दरअसल विभाग लंबे समय से जर्जर हो चुके तारों व अन्य उपकरणों को बदलवाने को लेकर कोई खास तेजी नहीं दिखा सका है जिसके चलते आये दिन कहीं न कहीं थोड़ा-सा ओवरलोड पड़ते ही फाल्ट अथवा ट्रांसफार्मर आदि जवाब दे जाते हैं जो सुचारु आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं। इसका असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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ग्रामीणों की मानें तो आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय से बेपटरी हो चुकी है। नतीजतन उमस के बीच लोगों को पेयजल किल्लत के साथ-साथ कई अन्य समस्याओं को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। वहीं किसान अशोक सिंह, सूरज वर्मा, मनीराम गौड़, शिवम तिवारी, सीताराम मिश्र व सोनू आदि का कहना है कि सुचारु आपूर्ति न होने से खेतीबारी के कार्य बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहे हैं।
मौजूदा समय में धान की नर्सरी व सब्जी आदि की खेती की समय से सिंचाई न होने से उस पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यदि आपूर्ति व्यवस्था ऐसी ही रही तो धान आदि की रोपाई में काफी मुश्किल होगी। अधिशाषी अभियंता वीके पटेल ने बताया कि रोस्टर के अनुरूप विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास चल रहे हैं। जल्द ही सभी जर्जर उपकरण बदलवा दिए जाएंगे।