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बैंकों से निराश लौटे पेंशनर्स व कर्मचारी

Thu, 01 Dec 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Thu, 01 Dec 2016 11:30 PM IST
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Disappointed pensioners and employees returned from bank
बैंक के सामने गुरुवार को धन-निकासी के लिए लगी उपभोक्ताओं की लंबी कतार। - फोटो : अमर उजाला

वेतन व पेंशन के भुगतान की उम्मीद लगाए पहुंचे कर्मचारियों व पेंशनधारकों को गुरुवार को बैंकों से निराश होकर लौटना पड़ा। जिन लोगों का वेतन व पेंशन बैंक में पहुंच चुकी थी, उनमें से ज्यादातर को दो से पांच हजार तक का ही भुगतान हो सका। शहरी क्षेत्र के कुछ बैंकों में जरूर स्थिति बेहतर रही। यहां ज्यादातर ग्राहकों की अधिकतम 10 हजार रुपये की निकासी हो पाई।

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गौरतलब है कि जिले में कैश का टोटा बना हुआ है। बैंकों को चेस्ट से जिस कैश का भुगतान गुरुवार को होना था, वह देर शाम तक नहीं हो पाया। ऐसे में शुक्रवार को भुगतान के लिए पहुंचने वाले पेंशनर्स व कर्मचारियों को और ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। जाहिर तौर पर ऐसा हुआ तो वेतन व पेंशन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को तगड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।
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हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कैश न होने की आशंका के चलते ही ज्यादातर पेंशनर्स व कर्मचारी गुरुवार को बैंकों तक नहीं पहुंचे। उधर, लगातार कैश संकट को देखते हुए आम ग्राहकों ने भी बैंकों की तरफ से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। लोगों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में जब स्थिति कुछ सुधरेगी, तभी बैंक जाकर धन-निकासी करना बेहतर रहेगा।
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राज्य कर्मचारी बाल गोविंद ने बताया कि धन-निकासी की समस्या लंबे समय बनी ही हुई है। 24 हजार रुपये सप्ताह में अधिकतम निकासी की सीमा तय तो कर दी गई लेकिन इसका भी पालन नहीं हो पा रहा है। बमुश्किल 10 हजार रुपये की ही निकासी हो पाई। ऐसे में घर का खर्च चलाने में आने वाले दिन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आ सकती हैं।

राज्य कर्मचारी जय प्रकाश ने बताया कि खाते में वेतन तो आ गया लेकिन आवश्यकतानुसार धन-निकासी होना संभव नहीं दिख रहा है। माह भर के पारिवारिक खर्च के लिए वेतन आने पर आवश्यक तैयारियां करनी पड़ती हैं। वेतन की निकासी के लिए गुरुवार को बैंक गया था लेकिन पता चला कि अभी वेतन भुगतान होना संभव नहीं। बैंककर्मी लगातार कैश संकट का रोना रो रहे हैं।

पेंशनर खुशीराम ने बताया कि सरकार का नोटबंदी का फैसला तो उचित है लेकिन उसके लिए पूरी तैयारी की जानी चाहिए थी। बैंकों व एटीएम में कैश है नहीं। जो कैश बैंकों में पहुंच रहा है, उससे आवश्यक धनराशि लोगों को मिल नहीं पा रही। मुझे जितनी धनराशि की जरूरत थी, वह वह गुरुवार को नहीं मिल सकी। ऐसे में आने वाले दिनों में समस्या खड़ी हो सकती है।

पेंशनर परशुराम ने बताया कि लंबी लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त धनराशि नहीं मिल सकी। घर का लंबा खर्च है। आने वाले दिनों में कई वैवाहिक आयोजनों में भी जाना है। गुरुवार को सिर्फ पांच हजार रुपये का भुगतान हो पाया। अलग से कोई लाइन भी नहीं है। अब फिर से घंटों लाइन लगाकर अगले दिनों धन-निकासी के लिए जूझना पड़ेगा। समझ में नहीं आता कि यह संकट कब दूर होगा।


एलडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जिले में कैश संकट स्वाभाविक है।  गुरुवार को शाम तक कैश नहीं पहुंच पाया था। देर रात तक कैश आने की उम्मीद तो है लेकिन यदि रकम नहीं मिली तो शुक्रवार को और दिक्कत आएगी। कर्मचारियों व पेंशनर्स के पैसे तो बैंकों में पहुंच गए हैं लेकिन बैंकों को मिलने वाली रकम के अनुरूप ही जैसे-तैसे भुगतान हो पा रहा है।

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