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Ambedkar Nagar News: भक्ति ही जीवन की सबसे श्रेष्ठ साधना
Sat, 17 Jan 2026 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 17 Jan 2026 11:01 PM IST
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प्रवाचक पंकज शास्त्री।
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कटेहरी(अंबेडकरनगर)। कटेहरी के प्रह्लादपट्टी गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को भगवान कृष्ण की लीलाओं और राजा परीक्षित से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रवाचक पंकज शास्त्री ने कहा कि मनुष्य से जीवन में भूल हो जाना असामान्य नहीं है, लेकिन उस भूल को समय रहते स्वीकार कर सुधार करना जरूरी होता है। यदि गलती के बाद भी आत्ममंथन और प्रायश्चित न किया जाए, तो वही भूल आगे चलकर पाप का रूप ले लेती है।
जीवन की दिशा और दशा दोनों को सही करने के लिए आत्मचिंतन आवश्यक है।भगवान कृष्ण की बाल और युवा लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि ये प्रसंग केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को समझने के सूत्र हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, विवेक और प्रेम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि भागवत कथा मनुष्य को अहंकार, लोभ और द्वेष से दूर रखकर सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भक्ति को व्यवहार और आचरण में भी उसका उतरना आवश्यक है। राजा परीक्षित ने श्राप मिलने के बाद जीवन के अंतिम समय को व्यर्थ न करते हुए भक्ति और ज्ञान का मार्ग अपनाया। उन्होंने भागवत कथा का श्रवण कर जीवन को सार्थक किया। प्रवाचक ने कहा कि भक्ति ही जीवन की सबसे श्रेष्ठ साधना है। इस दौरान रामकमल मिश्र, शिवा, विपिन, बाल मुकुंद मिश्रा, बलभद्र मिश्रा, ओम प्रकाश मिश्रा ,मनोज उपाध्याय ,संजीव मिश्रा ,जगन्नाथ मिश्रा ,बंटी तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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जीवन की दिशा और दशा दोनों को सही करने के लिए आत्मचिंतन आवश्यक है।भगवान कृष्ण की बाल और युवा लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि ये प्रसंग केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को समझने के सूत्र हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, विवेक और प्रेम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि भागवत कथा मनुष्य को अहंकार, लोभ और द्वेष से दूर रखकर सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भक्ति को व्यवहार और आचरण में भी उसका उतरना आवश्यक है। राजा परीक्षित ने श्राप मिलने के बाद जीवन के अंतिम समय को व्यर्थ न करते हुए भक्ति और ज्ञान का मार्ग अपनाया। उन्होंने भागवत कथा का श्रवण कर जीवन को सार्थक किया। प्रवाचक ने कहा कि भक्ति ही जीवन की सबसे श्रेष्ठ साधना है। इस दौरान रामकमल मिश्र, शिवा, विपिन, बाल मुकुंद मिश्रा, बलभद्र मिश्रा, ओम प्रकाश मिश्रा ,मनोज उपाध्याय ,संजीव मिश्रा ,जगन्नाथ मिश्रा ,बंटी तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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