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पदोन्नति सूची जारी होने से पहले हो गई तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Thu, 27 Aug 2015 11:08 PM IST
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खंड शिक्षा अधिकारियों को बीएसए ने पत्र जारी कर कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षक के साथ ही अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित आख्या जल्द से जल्द भेजने का निर्देश दिया है। विभाग के पास हालांकि ऐसे अध्यापकों का कोई निश्चित आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यह संख्या 50 से अधिक है।
लंबी जद्दोजहद के बाद परिषदीय विद्यालयों में पदोन्नति की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। इसके बाद कार्यभार ग्रहण करने के लिए शिक्षकों के बीच इतनी हड़बड़ी दिखी कि सूची जारी होने से पहले ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया। पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया गोपनीय होती है।
इसमें विभाग के कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताते हैं कि विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत से शिक्षकों को पदोन्नति की पूरी गोपनीय प्रक्रिया की जानकारी शिक्षकों ने पहले ही कर ली थी। इसी आधार पर सूची जारी होने के पहले ही तमाम शिक्षकों ने संबंधित पदों पर कार्टभार ग्रहण कर लिया। इस मनमानी व अवैध कृत्य से नाराज बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ राजबहादुर मौर्य ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कराने का निर्देश दिया है।
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नोटिस में कहा गया कि कार्यालय द्वारा 24 अगस्त को पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करके शाम पांच बजकर 33 मिनट पर सूची जारी की गई। इसमें प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद के लिए कुल 286 अध्यापकों का नाम शामिल थे। इनमें कुछ अध्यापकों द्वारा उसी दिन सूची जारी होने से पहले संबंधित विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लेने का मामला संज्ञान में आया है।
बीएसए ने कहा है कि जिन अध्यापकों ने 24 अगस्त को ही कार्यभार ग्रहण लिया है। उनसे जुड़े मामलों में संबंधित शिक्षक के अलावा कार्यमुक्त करने वाले प्रधानाध्यापकों तथा नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित आख्या जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं।
बीएसए ने पूरे प्रकरण से जिलाधिकारी, सीडीओ व सहायक शिक्षा निदेशक को भी पत्र भेजकर अवगत कराया है। बीएसए ने बताया कि उनके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि ऐसे कितने शिक्षक हैं। जांच में ही यह सामने आ सकेगा।
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लंबी जद्दोजहद के बाद परिषदीय विद्यालयों में पदोन्नति की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। इसके बाद कार्यभार ग्रहण करने के लिए शिक्षकों के बीच इतनी हड़बड़ी दिखी कि सूची जारी होने से पहले ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया। पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया गोपनीय होती है।
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इसमें विभाग के कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताते हैं कि विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत से शिक्षकों को पदोन्नति की पूरी गोपनीय प्रक्रिया की जानकारी शिक्षकों ने पहले ही कर ली थी। इसी आधार पर सूची जारी होने के पहले ही तमाम शिक्षकों ने संबंधित पदों पर कार्टभार ग्रहण कर लिया। इस मनमानी व अवैध कृत्य से नाराज बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ राजबहादुर मौर्य ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कराने का निर्देश दिया है।
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नोटिस में कहा गया कि कार्यालय द्वारा 24 अगस्त को पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करके शाम पांच बजकर 33 मिनट पर सूची जारी की गई। इसमें प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद के लिए कुल 286 अध्यापकों का नाम शामिल थे। इनमें कुछ अध्यापकों द्वारा उसी दिन सूची जारी होने से पहले संबंधित विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लेने का मामला संज्ञान में आया है।
बीएसए ने कहा है कि जिन अध्यापकों ने 24 अगस्त को ही कार्यभार ग्रहण लिया है। उनसे जुड़े मामलों में संबंधित शिक्षक के अलावा कार्यमुक्त करने वाले प्रधानाध्यापकों तथा नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित आख्या जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं।
बीएसए ने पूरे प्रकरण से जिलाधिकारी, सीडीओ व सहायक शिक्षा निदेशक को भी पत्र भेजकर अवगत कराया है। बीएसए ने बताया कि उनके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि ऐसे कितने शिक्षक हैं। जांच में ही यह सामने आ सकेगा।