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युवक की मौत की न्यायिक जांच की मांग

Sun, 19 Apr 2020 07:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 07:57 PM IST
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Demand for judicial inquiry into young man's death
अंबेडकरनगर। बसपा, सपा व कांग्रेस ने टांडा में दिहाड़ी मजदूर की संदिग्ध दशा में मौत मामले की न्यायिक या मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है। उधर पुलिस-प्रशासन ने लिखित सूचना जारी कर कहा है कि युवा मजदूर की मौत चोट के चलते नहीं, बल्कि फेफड़े में संक्रमण से हुई है। इस बीच पोस्टमार्टम के बाद मजदूर के शव को परिवारीजनों ने शनिवार देर शाम सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।
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गौरतलब है कि टांडा निवासी 22 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर रिजवान की शुक्रवार देर रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसे लेकर नागरिकों ने उसके मोहल्ले छज्जापुर में हंगामा खड़ा कर दिया था।
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पिता इसराइल ने आरोप लगाया कि तीन दिन पहले जब उसका पुत्र राशन लेने घर से निकला था, तब लॉकडाउन के उल्लंघन के नाम पर पुलिस ने जमकर पिटाई कर दी थी। इसी से उसकी मौत हो गई।
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भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष दीपक केडिया तक ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। शनिवार देर शाम परिवारीजनों ने शव को कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।
इस मामले में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व अकबरपुर विधायक रामअचल राजभर ने मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है। कहा कि गरीबों पर अत्याचार पुलिस अपना अधिकार समझने लगी है। पीड़ित परिवार को जांच के साथ ही 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामकुमार पाल, पार्टी नेता बबलू मिश्र आदि ने भी न्यायिक जांच की मांग की है। कहा कि पुलिस की बर्बरता प्रदेश में बढ़ रही है। ऐसे में न्यायिक जांच के साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाए।
सपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी हीरालाल यादव ने भी पीड़ित परिवार को 50 लाख की सहायता के साथ ही न्यायिक जांच की मांग की। इस बीच रविवार को पुलिस ने सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पुलिस पर लगा पिटाई का आरोप सत्य नहीं है।
एएसपी अवनीश कुमार मिश्र ने कहा कि युवक की मौत हृदय व फेफड़े में संक्रमण से हुई है। इससे पहले वह एक मार्ग दुर्घटना में घायल हो गया था, जिसकी पुष्टि इलाज करने वाले एक स्थानीय चिकित्सक ने की है। ऐसे में ये प्रमाणित है कि युवक की मौत किसी चोट की वजह से नहीं हुई है।
उधर, पुलिस की कथित पिटाई से मजदूर रिजवान की मौत मामले में पुलिस की थ्योरी व निजी चिकित्सक के दावे पर परिवारीजनों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। रिजवान के पिता इसराइल ने वीडियो बयान में कहा है कि मार्ग दुर्घटना की बात इसलिए असत्य है, क्योंकि उसके पुत्र के पास बाइक थी ही नहीं। दूसरी तरफ जो निजी चिकित्सक रिजवान का इलाज करने व घर आने का दावा कर रहे हैं, वह पूरी तरह फर्जी व मनगढ़ंत हैं।
पिता ने आशंका जताई कि वह चिकित्सक किसी दबाव में ऐसा गलत बोल रहे हैं। दरअसल पुलिस ने एक निजी चिकित्सक का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रिजवान की बुआ उनके पास आई थी। उस समय बाइक से एक्सीडेंट होना बताया था। दो दिन बाद मैं रिजवान के घर गया, तो देखा कि उसके दाहिने पैर में काफी सूजन है और बाएं पैर में संक्रमण है। इस पर मैंने एक्स-रे कराने की सलाह दी थी। इसके बाद वे सब अस्पताल गए थे। उस दौरान तक किसी प्रकार की पिटाई आदि की जानकारी नहीं दी गई थी।

रिजवान के पिता ने वीडियो जारी कर कहा है कि उसके बेटे की मौत पुलिस पिटाई से ही हुई है। किन पुलिसकर्मियों ने ये किया, यह नहीं पता, लेकिन पुलिस पिटाई के बाद वह किसी तरह घर पहुंच पाया था। जहां उसका देसी उपचार कराया जा रहा था। निजी चिकित्सक जो भी दावा कर रहा है, वह मनगढ़ंत है। वह न तो मेरे घर आया था और न ही उसने मेरे पुत्र का कोई उपचार किया था। रिजवान की बुआ ने भी पुलिस पिटाई से उसकी मौत होने की बात कही है।
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