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टिकट वितरण में देरी, भितरघात पड़ा भारी

Fri, 11 Mar 2022 11:41 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 11:41 PM IST
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Delay in ticket distribution, contravention was heavy
अंबेडकरनगर। भरतीय जनता पार्टी के लिए इस बार का चुनाव जिले में फलदायी नहीं रहा। वर्ष 2017 के चुनाव में जीती गईं टांडा और आलापुर की दोनों सीटों पर भी उसे बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वहीं जलालपुर सीट पर भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी बन गई। भाजपा की इस पराजय के पीछे टिकट वितरण में गड़बड़ी को जिम्मेदार माना जा रहा है।
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जिस चुनाव में प्रदेश में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार दोबारा बनाने की सफलता हासिल की है। उसी में अंबेडकरनगर जिले से सभी सीटों पर उसका सफाया हो गया है। तमाम कोशिशों के बाद भी पांच में से किसी भी सीट पर भाजपा या गठबंधन के प्रत्याशी को जीत नहीं मिल सकी। पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टी सीएम केशव मौर्य, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व सांसद मनोज तिवारी ने रैली व रोड शो भी किया था। इसके बावजूद मतगणना के बाद जो परिणाम आए, वह भाजपा के लिए बेहद निराशाजनक रहे।
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पार्टी इस बार अंबेडकरनगर जिले में बसपा के कमजोर होने का फायदा उठाकर ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाने की तैयारी में थी। इसके लिए एक एक सीट पर कई स्तरों पर समीक्षा का दौर भी चला था। लेकिन इनका कोई नतीजा नहीं निकला। सभी पांच सीट पर भाजपा की उम्मीदों का कमल नहीं खिल सका। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सबसे ज्यादा निराशाजनक स्थिति तो यह रही कि बीते विधानसभा चुनाव में टांडा व आलापुर की जिन दो सीट पर भाजपा को जीत मिली थी, वह भी उनकी पार्टी से छिन गई।
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टांडा में विधायक संजू देवी का टिकट काटकर भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष कपिलदेव वर्मा को टिकट प्रत्याशी बनाया था। उन्हें सपा से निर्वाचित हुए विधायक राममूर्ति वर्मा ने 32 हजार से अधिक मतों से पराजित किया। आलापुर में सिटिंग विधायक अनीता कमल के स्थान पर उनके ससुर त्रिवेणीराम को चुनाव लड़ाया गया। वे 9 हजार 383 मतों से पीछे रह गये
। कटेहरी में भाजपा ने अपने नेता अवधेश द्विवेदी को सहयोगी दल निषाद पार्टी से चुनाव लड़ाया। वे 7 हजार 696 मतों से हार गये। अकबरपुर में भाजपा प्रत्याशी धर्मराज निषाद 12 हजार 336 मतों से पीछे रह गये। 2019 के उपचुनाव में सपा से विधायक चुने गये सुभाष राय ने इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे। मतदान से पहले भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी सिर्फ एक दो सीटों पर ही जीत की उम्मीद दिखी थी।
टिकट वितरण पर खड़े हो रहे सवाल
टिकट वितरण को लेकर पहले भी सवाल खड़े हुए थे और अब परिणाम आने के बाद भी कार्यकर्ता सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने अंतिम समय में ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की। इससे माहौल नहीं बन पाया। प्रत्याशियों की ओर से घर-घर जाकर मतदाताओं को जोड़ने का जो प्रयास होना था, वह नहीं हो पाया। ज्यादातर सीटों पर नये प्रत्याशी होने से भी दिक्कत आई। कार्यकर्ताओं में भितरघात की भी चर्चा है।

विधायक व जिला पंचायत अध्यक्ष के बूथ भी हार गई पार्टी
अंबेडकरनगर। पार्टी स्तर पर हार की समीक्षा से पहले ही सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं ने भड़ास निकालनी शुरू कर दी है। टांडा के एक कार्यकर्ता ने विधायक व जिला पंचायत अध्यक्ष के बूथ पर भाजपा की हार का जिक्र सोशल मीडिया पर कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे ही जिम्मेदारों के चलते पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। जलालपुर, अकबरपुर व आलापुर से भी ऐसे ही स्वर उठ रहे हैं। टांडा के सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि विधायक से जुड़े बूथ पर भाजपा की करारी हार हुई है। आसपास के बूथों पर भी बेहद कम वोट मिले हैं। एक और पोस्ट में लिखा गया कि भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव भसड़ा के बूथ संख्या-141 व 142 को मिलाकर भाजपा हार गई। टांडा के ही कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बसपा से भाजपा में आए नेताओं की भूमिका के चलते ही भाजपा को टांडा में पराजय का सामना करना पड़ा। उधर आलापुर में कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि भाजपा की एक सहयोगी पार्टी के सांसद को लेकर आलापुर में उनके सजातीय मतों के बीच व्यापक विरोध का नुकसान भाजपा को हुआ है। जलालपुर व अकबरपुर में कार्यकर्ताओं के बीच यह आवाज उठ रही है कि पार्टी के कई नेताओं व सक्रिय कार्यकर्ताओं ने समुचित भूमिका नहीं निभाई। यदि वे ठीक से जुटते तो तस्वीर दूसरी होती।
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