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Ambedkar Nagar News: खराब पड़े मिले आठ में से दो वेंटीलेटर
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अंबेडकरनगर। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इससे निपटने की तैयारियों में शिथिलता बरत रहे हैं। इसका खुलासा मंगलवार को कोविड संक्रमण से निपटने की तैयारियां परखने के लिए हुई मॉकड्रिल में हुआ।
अधूरी तैयारियों के चलते ही टांडा एल वन अस्पताल के आठ में से दो वेंटिलेटर खराब मिले। परिसर में साफ सफाई व्यवस्था भी बदहाल मिली। इतना ही नहीं कोविड वार्ड के लिए जरूरी संसाधनों व स्टॉफ की कमी भी सामने आई। मंगलवार को हुई मॉक ड्रिल में कुछ अस्पतालों में तो महज रस्म अदायगी ही दिखी।
सरकारी अस्पतालों में कोविड काल के दौरान कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए विशेष वार्ड तैयार कर उन्हें संसाधन युक्त बनाने में लाखों का खर्च हुआ था। एक बार फिर से संक्रमण की बढ़ती आशंका के बाद स्वास्थ्य महकमे ने इससे निपटने के लिए अस्पतालों में मौजूद संसाधनों को परखने के लिए हुई मॉकड्रिल की अगुवाई नोडल अफसर व संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं शिक्षा डॉ. आरएस केसरी ने की।
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मातृ शिशु विंग टांडा व यहां संचालित एल वन अस्पताल में मौजूद आठ में से दो वेंटिलेटर ठीक से काम करते नहीं मिले। मौके पर छह वेंटिलेटर बेड तो पूरी क्षमता से काम करते मिले जबिक दो वेंटिलेटर में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद मिली। ऐसे में आकस्मिक स्थिति में इन वेंटिलेटर का प्रयोग मरीजों के लिए नहीं हो सकता है।
मौके पर मौजूद नोडल अफसर ने इन्हें तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। चिकित्सकों के अनुसार कोरोना का दौर थमने के बाद इन उपकरणों के रखरखाव में बरती गई लापरवाही के कारण ही परीक्षण के दौरान यह कसौटी पर खरे साबित नहीं हो पाए हैं।
टीम ने इसके साथ ही राजकीय मेडिकल कालेज सद्दरपुर, सीएचसी भीटी, जलालपुर भियांव व रफीगंज में भी मॉक ड्रिल का आयोजन कर आपातकालीन स्थिति में कोरोना संक्रमित के इलाज की व्यवस्था को परखा। इसमें सांकेतिक रूप से एंबुलेंस से मरीज को संबंधित अस्पताल ले कर आने के बाद आननफानन में पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने मरीज को स्ट्रेचर पर रखकर पीकू वार्ड में भर्ती किया गया। इसके बाद पहले से मुस्तैद डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया।
मॉक ड्रिल की पूर्व निर्धारित जानकारी के बावजूद टांडा एमपीएस विंग में साफ सफाई व्यवस्था बदहाल मिली। यहां पहुंचे नोडल अफसर अस्पताल परिसर में इधर उधर फैली गंदगी देख बिफर पड़े। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाने का निर्देश दिया। साथ ही चेताया कि इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
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अधूरी तैयारियों के चलते ही टांडा एल वन अस्पताल के आठ में से दो वेंटिलेटर खराब मिले। परिसर में साफ सफाई व्यवस्था भी बदहाल मिली। इतना ही नहीं कोविड वार्ड के लिए जरूरी संसाधनों व स्टॉफ की कमी भी सामने आई। मंगलवार को हुई मॉक ड्रिल में कुछ अस्पतालों में तो महज रस्म अदायगी ही दिखी।
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सरकारी अस्पतालों में कोविड काल के दौरान कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए विशेष वार्ड तैयार कर उन्हें संसाधन युक्त बनाने में लाखों का खर्च हुआ था। एक बार फिर से संक्रमण की बढ़ती आशंका के बाद स्वास्थ्य महकमे ने इससे निपटने के लिए अस्पतालों में मौजूद संसाधनों को परखने के लिए हुई मॉकड्रिल की अगुवाई नोडल अफसर व संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं शिक्षा डॉ. आरएस केसरी ने की।
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मातृ शिशु विंग टांडा व यहां संचालित एल वन अस्पताल में मौजूद आठ में से दो वेंटिलेटर ठीक से काम करते नहीं मिले। मौके पर छह वेंटिलेटर बेड तो पूरी क्षमता से काम करते मिले जबिक दो वेंटिलेटर में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद मिली। ऐसे में आकस्मिक स्थिति में इन वेंटिलेटर का प्रयोग मरीजों के लिए नहीं हो सकता है।
मौके पर मौजूद नोडल अफसर ने इन्हें तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। चिकित्सकों के अनुसार कोरोना का दौर थमने के बाद इन उपकरणों के रखरखाव में बरती गई लापरवाही के कारण ही परीक्षण के दौरान यह कसौटी पर खरे साबित नहीं हो पाए हैं।
टीम ने इसके साथ ही राजकीय मेडिकल कालेज सद्दरपुर, सीएचसी भीटी, जलालपुर भियांव व रफीगंज में भी मॉक ड्रिल का आयोजन कर आपातकालीन स्थिति में कोरोना संक्रमित के इलाज की व्यवस्था को परखा। इसमें सांकेतिक रूप से एंबुलेंस से मरीज को संबंधित अस्पताल ले कर आने के बाद आननफानन में पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने मरीज को स्ट्रेचर पर रखकर पीकू वार्ड में भर्ती किया गया। इसके बाद पहले से मुस्तैद डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया।
मॉक ड्रिल की पूर्व निर्धारित जानकारी के बावजूद टांडा एमपीएस विंग में साफ सफाई व्यवस्था बदहाल मिली। यहां पहुंचे नोडल अफसर अस्पताल परिसर में इधर उधर फैली गंदगी देख बिफर पड़े। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाने का निर्देश दिया। साथ ही चेताया कि इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।