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माफिया खान मुबारक पर कार्रवाई कर वाहवाही लूटने में लापरवाही भी हुई उजागर
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Criminal
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। माफिया सरगना खान मुबारक पर शिकंजा कसने की वाहवाही के बीच पुलिस का वर्षों पुराना निकम्मापन भी सामने आ रहा है। न्याय का गला घोंटने की कहानी की परतें खुल रही हैं। दरअसल, पुलिस अब वर्षों पुराने अपहरण, कब्जे व रंगदारी के मामलों में माफिया पर केस दर्ज कर रही है। इनमें 14 वर्ष तक पुराने मामले भी शामिल हैं। 36 घंटे के भीतर ऐसे तीन केस दर्ज हुए हैं। सवाल यह कि आखिर उस समय पुलिस ने इन मामलों को नजरअंदाज क्यों किया था। यदि उसी समय केस दर्ज होते तो लगातार जमीन कब्जाने, अपहरण व रंगदारी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता था। लोगों का कहना है कि तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अपराध जगत में माफिया के नाम से कुख्यात हो चुके हंसवर थाना क्षेत्र के हरसम्हार निवासी खान मुबारक की करतूतों पर पुलिस की नजर अब वाकई टेढ़ी हो गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, खान मुबारक ने अपराध की शुरुआत वर्ष 2007 में इलाहाबाद शहर में हत्या की वारदात को अंजाम देकर की थी। इसके बाद लगातार दुस्साहसिक वारदातों से वह छुटभैया बदमाश से माफिया बन गया। खान मुबारक ने इसके बाद अपने गांव व आसपास के क्षेत्रों में जोर जबरदस्ती के बल पर संपत्ति बनाना शुरू कर दी। इसके लिए निर्मम पिटाई व अपहरण की तमाम वारदातों को बेधड़क अंजाम दिया गया। इक्का-दुक्का मामलों में केस दर्ज हुए, लेकिन ज्यादातर घटनाओं में या तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया या फिर पीड़ितों ने हिम्मत ही नहीं दिखाई। नतीजा यह कि खान मुबारक व उसके गुर्गों का मनोबल लगातार बढ़ता गया और अपराध दर अपराध क्षेत्र में होते गए।
अब लंबे समय बाद पुलिस प्रशासन ने माफिया सरगना खान मुबारक व उसके गुर्गों को ठीक से निशाने पर लिया है। पांच करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त करने के साथ ही माफिया के हंसवर स्थित बीस दुकानों वाले कॉम्प्लेक्स को जमींदोज करा दिया गया। उसके व गुर्गों के बेशकीमती खेत व अन्य भूमि को कुर्क कर लिया गया। कई दिनों की शांति के बाद पुलिस ने अब वर्षों पुराने खान मुबारक के अपराधों का संज्ञान लेकर केस दर्ज करना शुरू कर दिया है।
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बस इसी मुहिम ने न्याय का गला घोंटे जाने के सच को भी उजागर कर डाला है। पुलिस ने 36 घंटे के भीतर भूमि पर कब्जे, अपहरण व रंगदारी के तीन अलग-अलग मामले खान मुबारक व सहयोगियों पर दर्ज किए हैं। इसमें दो मामले हंसवर थाने में दर्ज हुए हैं जबकि एक केस बसखारी थाने में दर्ज हुआ है। इनमें से एक मामला तो 14 वर्ष पुराना है, जबकि एक छह वर्ष। एक पांच वर्ष पुराना भी है। वर्षों पुराने इन मामलों में केस दर्ज होने के साथ ही पुलिस पर सवालिया निशान भी लग गए हैं।
लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस अब कोशिश कर वर्षों पुराने मामलों में पीड़ितों को न्याय का भरोसा दिला रही है, यही प्रक्रिया अपराध होते समय क्यों नहीं अमल में लाई गई। पुलिस पर सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर उस समय पुलिस किसी दबाव में थी या उसने जानबूझकर न्याय का गला घोंटने की कोशिश की। पुलिस ने यदि उसी समय ऐसे केस दर्ज किए होते तो जाहिर तौर पर माफिया खान मुबारक व उसके गुर्गों की करतूतों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकता था।
माफिया सरगना खान मुबारक के बड़े भाई खान जफर का रिश्ता अंडरवर्ल्ड से रहा है। उस पर समय-समय पर दाउद इब्राहिम व छोटा राजन के लिए काम करने का भी आरोप लगा। मुंबई के प्रसिद्ध कालाघोड़ा शूट आउट में जफर का नाम प्रमुखता से आया था। खान जफर को जफर सुपारी के नाम से भी जाना जाता है। बड़े भाई के नक्शे कदम पर चलकर ही खान मुबारक ने भी अपराध जगत में तेजी से पांव पसारने पर फोकस किया।
माफिया खान मुबारक इतना दुस्साहसिक हो गया था कि वह किसी को भी पकड़वा लेता था। बसखारी के एक शिक्षक को भूमि विवाद मामले में उसने अपने गुर्गों से घर बुलवा लिया। इसके बाद उसकी कोड़े से पिटाई की गई। इसका बाकायदा वीडियो भी बना। खान मुबारक ने डरे-सहमे शिक्षक के सिर पर एक बोतल रख दी। इसके बाद हंसते हुए बोतल पर निशान लगाने का अभिनय करने लगा। डर के चलते शिक्षक कांपने लगा, लेकिन माफिया खान मुबारक को रहम नहीं आई। उसने शिक्षक को गोली तो नहीं मारी लेकिन सिर पर रखी बोतल को फायरिंग से उड़ा दिया। इसके अलावा फैजाबाद जेल में निरुद्ध रहने के दौरान उसकी तमाम करतूतें सामने आती रहीं।
आपराधिक तत्वों के विरुद्ध प्रभावी व कड़ी कार्रवाई लगातार जारी है। नए-पुराने जो भी मामले सामने आएंगे, उनमें कठोरतम कार्रवाई होगी। पहले क्या हुआ और क्या नहीं, इस पर ध्यान देने के बजाए अब वक्त है अपराधियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त करने का। इसी दिशा में प्रभावी कार्रवाई जारी है।
- आलोक प्रियदर्शी, एसपी
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अपराध जगत में माफिया के नाम से कुख्यात हो चुके हंसवर थाना क्षेत्र के हरसम्हार निवासी खान मुबारक की करतूतों पर पुलिस की नजर अब वाकई टेढ़ी हो गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, खान मुबारक ने अपराध की शुरुआत वर्ष 2007 में इलाहाबाद शहर में हत्या की वारदात को अंजाम देकर की थी। इसके बाद लगातार दुस्साहसिक वारदातों से वह छुटभैया बदमाश से माफिया बन गया। खान मुबारक ने इसके बाद अपने गांव व आसपास के क्षेत्रों में जोर जबरदस्ती के बल पर संपत्ति बनाना शुरू कर दी। इसके लिए निर्मम पिटाई व अपहरण की तमाम वारदातों को बेधड़क अंजाम दिया गया। इक्का-दुक्का मामलों में केस दर्ज हुए, लेकिन ज्यादातर घटनाओं में या तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया या फिर पीड़ितों ने हिम्मत ही नहीं दिखाई। नतीजा यह कि खान मुबारक व उसके गुर्गों का मनोबल लगातार बढ़ता गया और अपराध दर अपराध क्षेत्र में होते गए।
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अब लंबे समय बाद पुलिस प्रशासन ने माफिया सरगना खान मुबारक व उसके गुर्गों को ठीक से निशाने पर लिया है। पांच करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त करने के साथ ही माफिया के हंसवर स्थित बीस दुकानों वाले कॉम्प्लेक्स को जमींदोज करा दिया गया। उसके व गुर्गों के बेशकीमती खेत व अन्य भूमि को कुर्क कर लिया गया। कई दिनों की शांति के बाद पुलिस ने अब वर्षों पुराने खान मुबारक के अपराधों का संज्ञान लेकर केस दर्ज करना शुरू कर दिया है।
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बस इसी मुहिम ने न्याय का गला घोंटे जाने के सच को भी उजागर कर डाला है। पुलिस ने 36 घंटे के भीतर भूमि पर कब्जे, अपहरण व रंगदारी के तीन अलग-अलग मामले खान मुबारक व सहयोगियों पर दर्ज किए हैं। इसमें दो मामले हंसवर थाने में दर्ज हुए हैं जबकि एक केस बसखारी थाने में दर्ज हुआ है। इनमें से एक मामला तो 14 वर्ष पुराना है, जबकि एक छह वर्ष। एक पांच वर्ष पुराना भी है। वर्षों पुराने इन मामलों में केस दर्ज होने के साथ ही पुलिस पर सवालिया निशान भी लग गए हैं।
लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस अब कोशिश कर वर्षों पुराने मामलों में पीड़ितों को न्याय का भरोसा दिला रही है, यही प्रक्रिया अपराध होते समय क्यों नहीं अमल में लाई गई। पुलिस पर सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर उस समय पुलिस किसी दबाव में थी या उसने जानबूझकर न्याय का गला घोंटने की कोशिश की। पुलिस ने यदि उसी समय ऐसे केस दर्ज किए होते तो जाहिर तौर पर माफिया खान मुबारक व उसके गुर्गों की करतूतों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकता था।
माफिया सरगना खान मुबारक के बड़े भाई खान जफर का रिश्ता अंडरवर्ल्ड से रहा है। उस पर समय-समय पर दाउद इब्राहिम व छोटा राजन के लिए काम करने का भी आरोप लगा। मुंबई के प्रसिद्ध कालाघोड़ा शूट आउट में जफर का नाम प्रमुखता से आया था। खान जफर को जफर सुपारी के नाम से भी जाना जाता है। बड़े भाई के नक्शे कदम पर चलकर ही खान मुबारक ने भी अपराध जगत में तेजी से पांव पसारने पर फोकस किया।
माफिया खान मुबारक इतना दुस्साहसिक हो गया था कि वह किसी को भी पकड़वा लेता था। बसखारी के एक शिक्षक को भूमि विवाद मामले में उसने अपने गुर्गों से घर बुलवा लिया। इसके बाद उसकी कोड़े से पिटाई की गई। इसका बाकायदा वीडियो भी बना। खान मुबारक ने डरे-सहमे शिक्षक के सिर पर एक बोतल रख दी। इसके बाद हंसते हुए बोतल पर निशान लगाने का अभिनय करने लगा। डर के चलते शिक्षक कांपने लगा, लेकिन माफिया खान मुबारक को रहम नहीं आई। उसने शिक्षक को गोली तो नहीं मारी लेकिन सिर पर रखी बोतल को फायरिंग से उड़ा दिया। इसके अलावा फैजाबाद जेल में निरुद्ध रहने के दौरान उसकी तमाम करतूतें सामने आती रहीं।
आपराधिक तत्वों के विरुद्ध प्रभावी व कड़ी कार्रवाई लगातार जारी है। नए-पुराने जो भी मामले सामने आएंगे, उनमें कठोरतम कार्रवाई होगी। पहले क्या हुआ और क्या नहीं, इस पर ध्यान देने के बजाए अब वक्त है अपराधियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त करने का। इसी दिशा में प्रभावी कार्रवाई जारी है।
- आलोक प्रियदर्शी, एसपी