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आयोग के फरमान से बढ़ी लोकसभा चुनाव के दावेदारों की मुश्किल
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अंबेडकरनगर। आपराधिक विवरण को लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली प्रत्याशियों की मुसीबत बढ़ सकती है। बीते लोकसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों में से दो प्रत्याशियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इनमें बसपा प्रत्याशी राकेश पांडेय पर तीन मुकदमे तो कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह पर एक मुकदमा दर्ज था।
चुनाव में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की दखल कम करने के लिए उच्चतम न्यायालय व चुनाव आयोग दोनों लगातार गंभीर है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही प्रारूप 26 को संशोधित किया गया है, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड को पूरी तरह दर्ज करना होगा। अब मतदान से पहले आपराधिक रिकॉर्ड की सार्वजनिक जानकारी समाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित व प्रसारित करवाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही दलों के प्रत्याशियों को अपने मुख्यालय को भी बाकायदा सूचित कर इसकी जानकारी रिटर्निंग अफसर को देनी होगी।
जाहिर तौर पर आने वाले लोकसभा चुनाव में ऐसा करना तमाम उम्मीदवारों के लिए भारी पड़ सकता है। इसी परिप्रेक्ष्य में बीते लोकसभा चुनाव की बात करें तो प्रमुख राजनीतिक दलों में से सिर्फ दो उम्मीदवारों पर हलफनामे के अनुसार केस दर्ज था। बसपा प्रत्याशी राकेश पांडेय ने जो हलफनामा दिया था, उसमें अकबरपुर के अलावा तत्कालीन फैजाबाद जनपद तथा लखनऊ में कुल तीन मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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सभी मुकदमे उस समय विचाराधीन थे। कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह के विरुद्ध हलफनामे के अनुसार एक मुकदमा थाना अयोध्या में दर्ज है। यह मुकदमा भी उस समय सीजेएम न्यायालय में विचाराधीन था। भाजपा प्रत्याशी हरिओम पांडेय व सपा प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा ने जो हलफनामा नामांकन के समय सौंपा था। उसमें कोई मुकदमा दर्ज न होने की जानकारी दी गई थी। अब आगामी लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारी पेश कर रहे प्रत्याशियों को इस बारे में सभी दस्तावेज पूरी गंभीरता से सामने रखने होंगे।
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चुनाव में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की दखल कम करने के लिए उच्चतम न्यायालय व चुनाव आयोग दोनों लगातार गंभीर है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही प्रारूप 26 को संशोधित किया गया है, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड को पूरी तरह दर्ज करना होगा। अब मतदान से पहले आपराधिक रिकॉर्ड की सार्वजनिक जानकारी समाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित व प्रसारित करवाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही दलों के प्रत्याशियों को अपने मुख्यालय को भी बाकायदा सूचित कर इसकी जानकारी रिटर्निंग अफसर को देनी होगी।
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जाहिर तौर पर आने वाले लोकसभा चुनाव में ऐसा करना तमाम उम्मीदवारों के लिए भारी पड़ सकता है। इसी परिप्रेक्ष्य में बीते लोकसभा चुनाव की बात करें तो प्रमुख राजनीतिक दलों में से सिर्फ दो उम्मीदवारों पर हलफनामे के अनुसार केस दर्ज था। बसपा प्रत्याशी राकेश पांडेय ने जो हलफनामा दिया था, उसमें अकबरपुर के अलावा तत्कालीन फैजाबाद जनपद तथा लखनऊ में कुल तीन मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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सभी मुकदमे उस समय विचाराधीन थे। कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह के विरुद्ध हलफनामे के अनुसार एक मुकदमा थाना अयोध्या में दर्ज है। यह मुकदमा भी उस समय सीजेएम न्यायालय में विचाराधीन था। भाजपा प्रत्याशी हरिओम पांडेय व सपा प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा ने जो हलफनामा नामांकन के समय सौंपा था। उसमें कोई मुकदमा दर्ज न होने की जानकारी दी गई थी। अब आगामी लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारी पेश कर रहे प्रत्याशियों को इस बारे में सभी दस्तावेज पूरी गंभीरता से सामने रखने होंगे।