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आग के खतरों को लेकर यहां भी पूरी तरह बेपरवाह स्वास्थ्य महकमा
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:03 PM IST
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अस्पतालों में आग लगी तो बचाना होगा मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी में आग से बचाव को लेकर पूरी तरह लापरवाही का माहौल है। लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में लगे ज्यादातर अगिभनशमन सिलेंडर एक्सपायर हो चुके हैं, तो कुछ देखरेख के अभाव में बदहाल पड़े हैं। न तो फायर अलार्म लगा है और न ही अग्निशमन उपकरण संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी ही मौजूद हैं। ऐसे में यदि लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर जैसी आग की वारदात होती है, तो किसी अप्रिय घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
शनिवार देर रात लखनऊ के केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग इतनी भयानक थी कि तीसरी मंजिल पर भी पहुंच गई। दोनों मंजिलों में करीब 150 मरीज भर्ती थे। यह संयोग ही था कि सभी मरीजों व तीमारदारों को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया। आग की इस घटना ने आग से बचाव को लेकर बरती जाने वाली बड़ी लापरवाही की पोल खोल दी है। यहां के जिला अस्पताल समेत सीएचसी व पीएचसी में भी ऐसी ही लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों व उनके तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल के परिसर से लेकर वार्डों तक में दो दर्जन से अधिक अगिभनशमन सिलेंडर लगे हैं, लेकिन इनमें से दस सिलेंडर एक्सपायर हो चुके हैं। जो अन्य एक्सपायर नहीं हैं, वह देखरेख के अभाव में पूरी तरह बदहाल हैं।
इतना ही नहीं जिला अस्पताल में न तो फायर अलार्म लगा है और न ही अगिभनशमन उपकरण का संचालन करने वाले प्रशिक्षित कर्मचारियों की ही तैनाती है। और तो और परिसर में जगह जगह खुले विद्युत तार सदैव किसी अप्रिय घटना को दावत दे रहे हैं। इन तारों में कब शॉर्ट सर्किट हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ओवरहेड देखरेख के अभाव में पूरी तरह बदहाल है। कुछ इसी प्रकार की लापरवाही जिले की सीएचसी व पीएचसी का भी है।
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सुरक्षा को लेकर दिखानी होगी गंभीरता
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग सीधे सीधे लापरवाही को दर्शाता है। कुछ इसी प्रकार की लापरवाही जिले के सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में भी देखने को मिल रहा है। आग से बचाव के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। कहा कि मरीजों के हित व ट्रॉमा सेंटर में हुई घटना को देखते संबंधित अफसरों को आग से बचाव को लेकर गंभीरता दिखानी होगी। न सिर्फ खराब पड़े अगिभनशमन यंत्रों को दुरुस्त कराना होगा, बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी करनी होगी।
दुरुस्त कराए जा रहे यंत्र
आग से बचाव को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी पर लगे अगिभनशमन सिलंडर की जांच कराई जा रही है। यदि कोई एक्सपायर होगा, तो उसे बदला जाएगा।
डॉ. मोहिबुल्लाह, सीएमओ
दिया जाता है प्रशिक्षण
समय समय पर जिला अस्पताल व सीएचसी पीएचसी के कर्मचारियों को आग से बचाव को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा जब भी प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है, तो फायरकर्मी अस्पतालों में जाते हैं।
जसवंत सिंह, प्रभारी अगिभनशमन केंद्र अकबरपुर
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी में आग से बचाव को लेकर पूरी तरह लापरवाही का माहौल है। लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में लगे ज्यादातर अगिभनशमन सिलेंडर एक्सपायर हो चुके हैं, तो कुछ देखरेख के अभाव में बदहाल पड़े हैं। न तो फायर अलार्म लगा है और न ही अग्निशमन उपकरण संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी ही मौजूद हैं। ऐसे में यदि लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर जैसी आग की वारदात होती है, तो किसी अप्रिय घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
शनिवार देर रात लखनऊ के केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग इतनी भयानक थी कि तीसरी मंजिल पर भी पहुंच गई। दोनों मंजिलों में करीब 150 मरीज भर्ती थे। यह संयोग ही था कि सभी मरीजों व तीमारदारों को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया। आग की इस घटना ने आग से बचाव को लेकर बरती जाने वाली बड़ी लापरवाही की पोल खोल दी है। यहां के जिला अस्पताल समेत सीएचसी व पीएचसी में भी ऐसी ही लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों व उनके तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल के परिसर से लेकर वार्डों तक में दो दर्जन से अधिक अगिभनशमन सिलेंडर लगे हैं, लेकिन इनमें से दस सिलेंडर एक्सपायर हो चुके हैं। जो अन्य एक्सपायर नहीं हैं, वह देखरेख के अभाव में पूरी तरह बदहाल हैं।
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इतना ही नहीं जिला अस्पताल में न तो फायर अलार्म लगा है और न ही अगिभनशमन उपकरण का संचालन करने वाले प्रशिक्षित कर्मचारियों की ही तैनाती है। और तो और परिसर में जगह जगह खुले विद्युत तार सदैव किसी अप्रिय घटना को दावत दे रहे हैं। इन तारों में कब शॉर्ट सर्किट हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ओवरहेड देखरेख के अभाव में पूरी तरह बदहाल है। कुछ इसी प्रकार की लापरवाही जिले की सीएचसी व पीएचसी का भी है।
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सुरक्षा को लेकर दिखानी होगी गंभीरता
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग सीधे सीधे लापरवाही को दर्शाता है। कुछ इसी प्रकार की लापरवाही जिले के सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में भी देखने को मिल रहा है। आग से बचाव के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। कहा कि मरीजों के हित व ट्रॉमा सेंटर में हुई घटना को देखते संबंधित अफसरों को आग से बचाव को लेकर गंभीरता दिखानी होगी। न सिर्फ खराब पड़े अगिभनशमन यंत्रों को दुरुस्त कराना होगा, बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी करनी होगी।
दुरुस्त कराए जा रहे यंत्र
आग से बचाव को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी पर लगे अगिभनशमन सिलंडर की जांच कराई जा रही है। यदि कोई एक्सपायर होगा, तो उसे बदला जाएगा।
डॉ. मोहिबुल्लाह, सीएमओ
दिया जाता है प्रशिक्षण
समय समय पर जिला अस्पताल व सीएचसी पीएचसी के कर्मचारियों को आग से बचाव को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा जब भी प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है, तो फायरकर्मी अस्पतालों में जाते हैं।
जसवंत सिंह, प्रभारी अगिभनशमन केंद्र अकबरपुर