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धूप तो निकली, लेकिन नहीं मिली गलनभरी ठंड से राहत
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अंबेडकरनगर के इल्तिफातगंज मार्ग पर मंगलवार को घने कोहरे के बीच आवागमन को विवश हुए लोग।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। धुंध, धूप, सर्द हवा व गलन के बीच मंगलवार को भी लोगों को हांड़कंपाऊ ठंड से राहत नहीं मिल सकी। दोपहर तक छाए घने कोहरे व सर्द हवाओं के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। लोग घरों में ही कैद रहे। दोपहर बाद धूप तो निकली, लेकिन उसमें तपिश न होने से इसका लाभ लोगों को नहीं मिल सका। हालांकि धूप निकलने पर लोगों ने बाजारों में पहुंचकर जरूरी सामानों की खरीददारी की और जल्दी जल्दी अपने अपने घर चले गए। जैसे जैसे शाम होती गई घने कोहरे का प्रकोप एक बार फिर से शुरू हो गया, जिससे बाजारों में फिर से सन्नाटा पसर गया। ठंड से बचाव के लिए लोग जगह जगह अलाव का सहारा लेते दिखे।
मंगलवार सुबह से ही सर्द हवा, गलन व घने कोहरे का प्रकोप रहा। लोग सुबह उठे, तो कड़ाके की ठंड से राहत न मिलती देख घरों से बाहर कदम निकालने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सुबह दस बजे तक बाजारों व सड़कों पर सन्नाटे का माहौल रहा। बाजारों में दुकानदारों ने पहुंचकर दुकाने तो खोलीं, लेकिन सामानों की खरीददारी के लिए खरीददार नदारद रहे। हांड़कंपाऊ ठंड के चलते लोग बाजारों का रुख करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। इसके चलते दुकानदार अपनी अपनी दुकानों के सामने अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश करते दिखे।
सरकारी व निजी कार्यालयों में भी लोग विलंब से पहुंचे। जिला अस्पताल में एक बार फिर से चिकित्सकों की मनमानी सामने आई। मरीज व उनके तीमारदार तो समय से पहुंच गए, लेकिन पूर्व की तरह ही चिकित्सक विलंब से पहुंचे और समय से पहले ही चलते बने। इससे दूरदराज के क्षेत्रों से बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीजों व उनके तीमारदारों को मायूस होकर लौटना पड़ा। इस बीच मंगलवार को हालांकि धूप निकलने से बाजारों में कुछ देर के लिए चहल पहल जरूर हो गई। लोगों ने बाजारों में पहुंचकर जरूरी सामानों की खरीददारी की, लेकिन जल्दी जल्दी वापस घर चले गए। इससे एक बार फिर से बाजारों में सन्नाटा पसर गया। शाम होते होते एक बार फिर से घने कोहरे का प्रकोप शुरू हो गया।
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अभी भी है कंबल का इंतजार
हांड़कंपाऊ ठंड के बावजूद अभी भी गरीबों में कंबल का वितरण नहीं हो सका है। ठंड से ठिठुरते लोगों को अभी भी कंबल का इंतजार है। उनका कहना है कि जब ठंड समाप्त हो जाएगी, तो क्या कंबल का वितरण किया जाएगा। अकबरपुर की फूलकुमार व छोहारा देवी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब जरूरत है, तो कंबल मिल नहीं रहा, जब जरूरत समाप्त हो जाएगी, तो उस समय कंबल मिलने से क्या लाभ है। अच्छेलाल व लंबू ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दिन तो किसी प्रकार अलाव के सामने बैठकर गुजार लेते हैं, लेकिन रात नहीं गुजर पाती।
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मंगलवार सुबह से ही सर्द हवा, गलन व घने कोहरे का प्रकोप रहा। लोग सुबह उठे, तो कड़ाके की ठंड से राहत न मिलती देख घरों से बाहर कदम निकालने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सुबह दस बजे तक बाजारों व सड़कों पर सन्नाटे का माहौल रहा। बाजारों में दुकानदारों ने पहुंचकर दुकाने तो खोलीं, लेकिन सामानों की खरीददारी के लिए खरीददार नदारद रहे। हांड़कंपाऊ ठंड के चलते लोग बाजारों का रुख करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। इसके चलते दुकानदार अपनी अपनी दुकानों के सामने अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश करते दिखे।
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सरकारी व निजी कार्यालयों में भी लोग विलंब से पहुंचे। जिला अस्पताल में एक बार फिर से चिकित्सकों की मनमानी सामने आई। मरीज व उनके तीमारदार तो समय से पहुंच गए, लेकिन पूर्व की तरह ही चिकित्सक विलंब से पहुंचे और समय से पहले ही चलते बने। इससे दूरदराज के क्षेत्रों से बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीजों व उनके तीमारदारों को मायूस होकर लौटना पड़ा। इस बीच मंगलवार को हालांकि धूप निकलने से बाजारों में कुछ देर के लिए चहल पहल जरूर हो गई। लोगों ने बाजारों में पहुंचकर जरूरी सामानों की खरीददारी की, लेकिन जल्दी जल्दी वापस घर चले गए। इससे एक बार फिर से बाजारों में सन्नाटा पसर गया। शाम होते होते एक बार फिर से घने कोहरे का प्रकोप शुरू हो गया।
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अभी भी है कंबल का इंतजार
हांड़कंपाऊ ठंड के बावजूद अभी भी गरीबों में कंबल का वितरण नहीं हो सका है। ठंड से ठिठुरते लोगों को अभी भी कंबल का इंतजार है। उनका कहना है कि जब ठंड समाप्त हो जाएगी, तो क्या कंबल का वितरण किया जाएगा। अकबरपुर की फूलकुमार व छोहारा देवी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब जरूरत है, तो कंबल मिल नहीं रहा, जब जरूरत समाप्त हो जाएगी, तो उस समय कंबल मिलने से क्या लाभ है। अच्छेलाल व लंबू ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दिन तो किसी प्रकार अलाव के सामने बैठकर गुजार लेते हैं, लेकिन रात नहीं गुजर पाती।