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Ambedkar Nagar News: 31 वर्ष लड़ा मुकदमा, लोक अदालत से मिली मुक्ति
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दीवानी परिसर में उपभोक्ताओं की समस्याओं का निदान कराते बैंककर्मी। संवाद
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अंबेडकरनगर। दीवानी परिसर अकबरपुर समेत सभी न्यायालयों में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे वादकारियों को राहत दिलाई। किसी को वर्षों पुराने विवाद के मुकदमे से निजात मिली, तो किसी ने पुराने कर्ज और बकाया बिजली बिल से छुटकारा पाया। न्यायालयों में वादकारियों की भीड़ उमड़ी रही।
भीटी के उमरावा निवासी रामदास ने बताया कि वर्ष 1995 में गांव में कुछ लोगों से विवाद हो गया था। इस मामले में वर्ष 18 मार्च 2026 में फैसला आ गया था, जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था और वादी रामदास के विरुद्ध परिवाद दर्ज हो गया था और झूठा साक्ष्य दाखिल करने के आरोप में नोटिस जारी हुआ था। लोक अदालत में आरोप स्वीकार कर जुर्माना अदा किया और मामले का निस्तारण कराया।
उपभोक्ता फोरम में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 12 मामले नियत किए गए थे, जिनमें सात मामलों में सुलह-समझौता कराया गया। वादकारियों को 12.48 लाख रुपये का मुआवजा दिलवाया गया। इस मौके पर अध्यक्ष दयाराम, सदस्य किरन ने मामलों का निस्तारण कराया। अधिवक्ता राहुल श्रीवास्तव, अजीत पांडेय, विनय कुमार तिवारी, मनीष श्रीवास्तव, प्रेमकार मिश्रा के अलावा दिलीप कुमार श्रीवास्तव, रीडर संजय, समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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लोक अदालत में धोखाधड़ी का हुआ खुलासा
फोटो-37
काशीराम कॉलोनी कटारिया याकूब निवासी मुन्नीलाल का था जिनके भाई संजय कुमार पर 1.83 हजार रुपये का बकाया बिजली बिल है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने 50 हजार रुपये में बिल समाप्त करने का वादा किया था, जिसके बाद कई किस्तों में 95 हजार रुपये देने के बावजूद बकाया समाप्त नहीं हुआ। लोक अदालत में आने के बाद संबंधित व्यक्ति की ओर से रुपये न जमा करने की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए।
काउंटरों पर जुटे रहे कर्मचारी
जनपद न्यायालय परिसर में जिला जज चंद्रोदय कुमार ने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। दीवानी न्यायालय परिसर के अंदर दाखिल होते ही हाॅल में विभिन्न विभागों के काउंटर पर कर्मचारी उपभोक्ताओं की समस्याओं का निपटारा करते नजर आए। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के सभी शाखा प्रबंधक बैंक संबंधित मामलों का निवारण करने में जुटे रहे। भारतीय संचार निगम व बिजली विभाग के काउंटर पर भी भीड़ नजर आई। बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई, पीएनबी, श्रीराम फाइनेंस जैसे बैंकों के प्रतिनिधियों ने लंबे समय परेशान लोगों की समस्या दूर कराई।
भीटी में 174 मामलों का निस्तारण
भीटी। ग्राम न्यायालय भीटी में न्यायाधिकारी भीटी हिमांशु वर्मा द्वितीय की मौजूदगी में 237 पत्रावली में से 174 का निस्तारण हुआ। इस दौरान 855 रुपये जुर्माना जमा किया गया। इस मौके पर पेशकार शिवराम शुक्ला, वरिष्ठ लिपिक अमित कुमार शाहू, सहायक लिपिक प्रिंस कुमार सिंह, स्टेनो निकेत कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अन्य ग्राम न्यायालयों ने भी बड़ी संख्या में वाद निस्तारित किए।
तीन माह बाद हुआ निस्तारण
मालीपुर की खालिसपुर भटउली निवासी मिथलेश यादव ने बताया कि चार फरवरी को उनके घर में बिजली विभाग की विजिलेंस ने छापा मारा था और बिना किसी गड़बड़ी के 84 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। लोक अदालत से नोटिस आने के बाद वे 24 किलोमीटर दूर दीवानी परिसर में लगे बिजली विभाग के काउंटर पर पहुंचे। बिजली विभाग में जाकर दो हजार रुपये जमा करने के बाद कई किस्तों में बिजली का बकाया जमा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि तीन माह से इस काम के लिए परेशान थी।
निस्तारण कराने पहुंचे, लौटना पड़ा वापस
अकबरपुर के सिसारा निवासी जियालाल ने बताया कि उन्होंने छह साल पहले बैंक ऑफ बड़ौदा बरियाली से 75 हजार रुपये का केसीसी ऋण लिया था, जो अब ब्याज सहित 90 हजार के करीब पहुंच गया गया है। लोक अदालत में संबंधित शाखा प्रबंधक से मिलने पर बताया गया कि अभी वह राष्ट्रीय लोक अदालत के दायरे में नहीं है। उनका निस्तारण बैंक शाखा पर किया जाएगा।
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भीटी के उमरावा निवासी रामदास ने बताया कि वर्ष 1995 में गांव में कुछ लोगों से विवाद हो गया था। इस मामले में वर्ष 18 मार्च 2026 में फैसला आ गया था, जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था और वादी रामदास के विरुद्ध परिवाद दर्ज हो गया था और झूठा साक्ष्य दाखिल करने के आरोप में नोटिस जारी हुआ था। लोक अदालत में आरोप स्वीकार कर जुर्माना अदा किया और मामले का निस्तारण कराया।
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उपभोक्ता फोरम में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 12 मामले नियत किए गए थे, जिनमें सात मामलों में सुलह-समझौता कराया गया। वादकारियों को 12.48 लाख रुपये का मुआवजा दिलवाया गया। इस मौके पर अध्यक्ष दयाराम, सदस्य किरन ने मामलों का निस्तारण कराया। अधिवक्ता राहुल श्रीवास्तव, अजीत पांडेय, विनय कुमार तिवारी, मनीष श्रीवास्तव, प्रेमकार मिश्रा के अलावा दिलीप कुमार श्रीवास्तव, रीडर संजय, समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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लोक अदालत में धोखाधड़ी का हुआ खुलासा
फोटो-37
काशीराम कॉलोनी कटारिया याकूब निवासी मुन्नीलाल का था जिनके भाई संजय कुमार पर 1.83 हजार रुपये का बकाया बिजली बिल है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने 50 हजार रुपये में बिल समाप्त करने का वादा किया था, जिसके बाद कई किस्तों में 95 हजार रुपये देने के बावजूद बकाया समाप्त नहीं हुआ। लोक अदालत में आने के बाद संबंधित व्यक्ति की ओर से रुपये न जमा करने की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए।
काउंटरों पर जुटे रहे कर्मचारी
जनपद न्यायालय परिसर में जिला जज चंद्रोदय कुमार ने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। दीवानी न्यायालय परिसर के अंदर दाखिल होते ही हाॅल में विभिन्न विभागों के काउंटर पर कर्मचारी उपभोक्ताओं की समस्याओं का निपटारा करते नजर आए। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के सभी शाखा प्रबंधक बैंक संबंधित मामलों का निवारण करने में जुटे रहे। भारतीय संचार निगम व बिजली विभाग के काउंटर पर भी भीड़ नजर आई। बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई, पीएनबी, श्रीराम फाइनेंस जैसे बैंकों के प्रतिनिधियों ने लंबे समय परेशान लोगों की समस्या दूर कराई।
भीटी में 174 मामलों का निस्तारण
भीटी। ग्राम न्यायालय भीटी में न्यायाधिकारी भीटी हिमांशु वर्मा द्वितीय की मौजूदगी में 237 पत्रावली में से 174 का निस्तारण हुआ। इस दौरान 855 रुपये जुर्माना जमा किया गया। इस मौके पर पेशकार शिवराम शुक्ला, वरिष्ठ लिपिक अमित कुमार शाहू, सहायक लिपिक प्रिंस कुमार सिंह, स्टेनो निकेत कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अन्य ग्राम न्यायालयों ने भी बड़ी संख्या में वाद निस्तारित किए।
तीन माह बाद हुआ निस्तारण
मालीपुर की खालिसपुर भटउली निवासी मिथलेश यादव ने बताया कि चार फरवरी को उनके घर में बिजली विभाग की विजिलेंस ने छापा मारा था और बिना किसी गड़बड़ी के 84 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। लोक अदालत से नोटिस आने के बाद वे 24 किलोमीटर दूर दीवानी परिसर में लगे बिजली विभाग के काउंटर पर पहुंचे। बिजली विभाग में जाकर दो हजार रुपये जमा करने के बाद कई किस्तों में बिजली का बकाया जमा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि तीन माह से इस काम के लिए परेशान थी।
निस्तारण कराने पहुंचे, लौटना पड़ा वापस
अकबरपुर के सिसारा निवासी जियालाल ने बताया कि उन्होंने छह साल पहले बैंक ऑफ बड़ौदा बरियाली से 75 हजार रुपये का केसीसी ऋण लिया था, जो अब ब्याज सहित 90 हजार के करीब पहुंच गया गया है। लोक अदालत में संबंधित शाखा प्रबंधक से मिलने पर बताया गया कि अभी वह राष्ट्रीय लोक अदालत के दायरे में नहीं है। उनका निस्तारण बैंक शाखा पर किया जाएगा।