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कम दाम पर क्रेशरों को गन्ना दे रहे किसान
अंबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2015 10:42 PM IST
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शासन से जहां गन्ना का मूल्य न्यूनतम 240 रुपये निर्धारित किया गया है, वहीं क्रेशर मालिकों द्वारा 100 से 110 रुपये में ही गन्ने की खरीद की जा रही है। पर्ची न मिलने से किसानों को मजबूर होकर औने पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है।
चीनी मिल के तमाम आश्वासन के बावजूद जिले के गन्ना किसानों की मुश्किलें दूर नहीं हो रही हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल गन्ना पर्ची को लेकर आ रही है। इससे जो किसान पेड़ी गन्ने की बिक्री कर गेहूं व अन्य फसल का लाभ लेना चाहते हैं, उनकी उम्मीदों को झटका लग रहा है। खेत समय से खाली हो जाए उन्हें इसके लिए कड़ी मेहनत कर पैदा की गई गन्ने की फसल को क्रेशरों पर बेचना पड़ रहा है।
किसानों की इस मजबूरी का फायदा क्रेशर मालिक खूब उठा रहे हैं। शासन से जहां गन्ने का न्यूनतम मूल्य 240 रुपये निर्धारित किया गया है, वहीं किसानों को क्रेशरों पर अपने गन्ने की फसल महज 100 से 110 रुपये में बेचने काे विवश होना पड़ रहा है।
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जमुनीपुर के किसान रामतीरथ ने बताया कि उनके पास करीब ढाई बीघा पेड़ी गन्ना था। उन्हें उम्मीद थी कि समय से पर्ची मिल जाएगी और वे इसकी बिक्री कर लेंगे। इसके बाद उस खेत में गेहूं या फिर अन्य फसल की बोआई कर लेंगे।
पर्ची में विलंब के चलते उन्हें करीब 1 बीघा गन्ने की फसल क्रेशर पर बेचना पड़ा, वह भी 110 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से। कहा कि क्रेशरों पर दाम तो मनमाना लगाया ही जाता है, तौल में व्यापक पैमाने पर घटतौली भी की जाती है। यहां पर आधुनिक कांटे लगाने की बजाए गन्ने को ईंट व पत्थर के बाट बनाकर तौले जाते है। कुछ ऐसा ही हालत बेवाना के शिवमूरत व हौसिला भी बयां करते हैं।
तकिया सरैया के महेन्द्र तिवारी, शिवनायक व पूजन का कहना है कि उनके यहां तो और भी मनमानी है। क्रेशर तो कई हैं, लेकिन इसके बावजूद गन्ने का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता। तौल में मनमानी तो होती ही है, साथ में पैसों के भुगतान के लिए भी लम्बा चक्कर लगाना पड़ता है।
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चीनी मिल के तमाम आश्वासन के बावजूद जिले के गन्ना किसानों की मुश्किलें दूर नहीं हो रही हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल गन्ना पर्ची को लेकर आ रही है। इससे जो किसान पेड़ी गन्ने की बिक्री कर गेहूं व अन्य फसल का लाभ लेना चाहते हैं, उनकी उम्मीदों को झटका लग रहा है। खेत समय से खाली हो जाए उन्हें इसके लिए कड़ी मेहनत कर पैदा की गई गन्ने की फसल को क्रेशरों पर बेचना पड़ रहा है।
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किसानों की इस मजबूरी का फायदा क्रेशर मालिक खूब उठा रहे हैं। शासन से जहां गन्ने का न्यूनतम मूल्य 240 रुपये निर्धारित किया गया है, वहीं किसानों को क्रेशरों पर अपने गन्ने की फसल महज 100 से 110 रुपये में बेचने काे विवश होना पड़ रहा है।
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जमुनीपुर के किसान रामतीरथ ने बताया कि उनके पास करीब ढाई बीघा पेड़ी गन्ना था। उन्हें उम्मीद थी कि समय से पर्ची मिल जाएगी और वे इसकी बिक्री कर लेंगे। इसके बाद उस खेत में गेहूं या फिर अन्य फसल की बोआई कर लेंगे।
पर्ची में विलंब के चलते उन्हें करीब 1 बीघा गन्ने की फसल क्रेशर पर बेचना पड़ा, वह भी 110 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से। कहा कि क्रेशरों पर दाम तो मनमाना लगाया ही जाता है, तौल में व्यापक पैमाने पर घटतौली भी की जाती है। यहां पर आधुनिक कांटे लगाने की बजाए गन्ने को ईंट व पत्थर के बाट बनाकर तौले जाते है। कुछ ऐसा ही हालत बेवाना के शिवमूरत व हौसिला भी बयां करते हैं।
तकिया सरैया के महेन्द्र तिवारी, शिवनायक व पूजन का कहना है कि उनके यहां तो और भी मनमानी है। क्रेशर तो कई हैं, लेकिन इसके बावजूद गन्ने का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता। तौल में मनमानी तो होती ही है, साथ में पैसों के भुगतान के लिए भी लम्बा चक्कर लगाना पड़ता है।