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ट्रेनों का डायवर्जन रोकने को मुहिम तेज

Mon, 10 Aug 2020 07:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 07:57 PM IST
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Campaign to stop diversion of trains intensified
अंबेडकरनगर। प्रमुख ट्रेनों का डॉयवर्जन होने से भड़के नागरिकों ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। लोहिया से अखिलेश अभियान के प्रांतीय संयोजक सिद्धार्थ मिश्र ने लखनऊ पहुंचकर एडीआरएम को ज्ञापन सौंपा, तो वहीं मंगलवार को व बुधवार को भी अलग अलग प्रतिनिधिमण्डल लखनऊ जाकर डीआरएम से मिलने की तैयारी में हैं। इस बीच सोमवार को भी तमाम यात्रियों ने पत्र व सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेनों का डॉयवर्जन निरस्त किए जाने की अपनी मांग बुलंद की।
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अयोध्या व अंबेडकरनगर से होकर गुजरने वाली चार प्रमुख ट्रेनों का रूट बदल दिए जाने को लेकर यात्रियों व नागरिकों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। विभिन्न माध्यमों से लगातार अपनी नाराजगी का इजहार किया जा रहा है। इस बीच सपा नेता व लोहिया से अखिलेश अभियान के प्रांतीय संयोजक सिद्धार्थ मिश्र ने लखनऊ पहुंचकर डीआरएम को संबोधित ज्ञापन एडीआरएम प्रशासन एवं परिचालन अमित श्रीवास्तव को सौंपा।
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इसमें कहा गया कि देहरादून, धनबाद, गया, हावड़ा, अमृतसर आदि प्रमुख स्टेशनों तक यात्रा के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा को छीन लेना अत्यंत अनुचित है। इससे दोनों जनपदों के यात्रियों को बड़ी मुश्किल का सामना करना पडेगा। लंबी दूरी के अलावा नजदीकी स्टेशनों की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी ट्रेनों का रूट डायवर्ट होने से ज्यादा मुश्किलें खड़ी होंगी। रेलवे ने यदि अपना निर्णय वापस नहीं लिया, तो इसे लेकर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हैदर अब्बास ने बताया कि अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमण्डल भी दो दिन के भीतर डीआरएम से लखनऊ में मुलाकात करेगा और उन्हें बताएगा कि रेलवे बोर्ड के निर्णय से अयोध्या व अंबेडकरनगर के यात्रियों में किस तरह का आक्रोश है। ज्ञापन में यह भी बताया जाएगा कि दून व गंगा सतलज एक्सप्रेस का रूट बदल दिए जाने से यात्रियों को दशकों से मिली आ रही बेहतरीन सुविधा छिन जाएगा, जो अन्यायपूर्ण है।

वरिष्ठ व्यापारी वीरेंद्र सेठ व नरेंद्र जायसवाल ने रेलमंत्री को पत्र भेजकर कहा कि यह निर्णय व्यापारियों समेत कामगारों व कमजोर वर्गों के हित में नहीं है। तमाम आम यात्री दून व गंगा सतलज एक्सप्रेस के जरिए सुविधाजनक ढंग से अपने रोजगार, शिक्षा, पर्यटन व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करते आ रहे थे। रेलवे को भी व्यापक आर्थिक आय हो रही थी। इसके बावजूद इन ट्रेनों का रूट डॉयवर्ट किया जाना अत्यंत अनुचित व दुर्भाग्यपूर्ण है। रेल मंत्रालय को अविलंब यह निर्णय बदलना होगा।
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