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बिना टेंडर कार्य आवंटन की पत्रावली तलब
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अंबेडकरनगर। नियमों की धज्जियां उड़ाकर जिला पंचायत में ई-टेंडरिंग के बगैर करोड़ों के कार्यों का आवंटन कर देने का मामला शासन तक पहुंच गया है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कई ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को इस मामले को लेकर पत्र भेजा है। उधर, शासन के किसी निर्देश से पहले ही जिला प्रशासन ने अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने सभी कार्यों व टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी पूरी पत्रावली तलब की है। इसे लेकर जिला पंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत तमाम ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
बीते दिनों जिला पंचायत में मनमाने ढंग से 23 करोड़ रुपये के कार्यों का टेंडर कर देने का खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसमें 14 करोड़ की लागत से 165 कार्य शामिल थे, जबकि 9 करोड़ की लागत से 86 कार्य शामिल किए गए। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि विशेष परिस्थिति के कार्यों को छोड़कर कतई कोई कार्य बगैर ई-टेंडर के न कराए जाएं। इसमें सड़कों की मरम्मत के लिए छूट प्रदान की गई है, लेकिन वह भी सिर्फ विशेष परिस्थिति के लिए।
इसके बावजूद लगभग 23 करोड़ के कार्य मनमाने ढंग से आवंटित कर दिए गए, जबकि उन कार्यों के लिए कोई विशेष परिस्थिति नहीं थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि विशेष परिस्थिति दिखाकर कार्यों का आवंटन भी किया गया तो निर्धारित एक माह से लेकर तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्य पूरा कराने की सुध क्यों नहीं रही। तमाम नागरिक इसी बिंदु पर सवाल खड़े करते हुए कहते हैं कि दरअसल सिर्फ टेंडर निकालने व काम देने की जल्दी थी। इसके लिए नियम कानून को भी ताक पर रखा गया और उसके बाद काम जल्द पूरा कराने की भी सुध नहीं ली गई।
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यह मामला अब शासन की चौखट तक पहुंच गया है। ई-टेंडर न होने की वजह से प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए कई ठेकेदारों ने सामूहिक रूप से सीएम व मुख्य सचिव को इस मामले को लेकर पत्र भेजा है। संबंधित ठेकेदार तो सामने नहीं आ सके हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के उल्लंघन का संज्ञान लिया जाए। इस बीच शासन तक बात पहुंचने से पहले ही जिला पंचायत के प्रशासक व डीएम राकेश कुमार मिश्र ने अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू करा दी है। डीएम ने सीडीओ घनश्याम मीणा को निर्देशित किया है कि वे पूरे प्रकरण को विस्तार से देखें।
सीडीओ ने मांगी पत्रावली
मनमाने ढंग से ई-टेंडर करने से जुड़ीं सभी पत्रावली सीडीओ घनश्याम मीणा ने तलब कर ली हैं। बीते दिन उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से पूरी पत्रावली मांगी है। सूत्रों के अनुसार सीडीओ ने न सिर्फ टेंडर वरन उससे जुड़ी पूरी पत्रावली मांगी है। इसके साथ ही शासनादेश भी साथ लेकर आने को कहा गया है, जिससे विस्तृत जांच सुनिश्चित हो सके। माना जा रहा है कि पत्रावली सामने आने के बाद प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए तकनीकी समिति का गठन भी किया जा सकता है। उधर, पत्रावली तलब किए जाने से जिला पंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत तमाम ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
सपा ने भी उठाया मामला
समाजवादी पार्टी की राज्य इकाई ने भी जिला पंचायत में चल रहे गड़बड़झाले का मामला उठाया है। अमर उजाला की खबर को सोशल मीडिया पर सपा की प्रदेश कमेटी ने शेयर किया है। इसमें जिला पंचायत में कार्यों के नाम पर गड़बड़ी करने का उल्लेख करते हुए शासन से समुचित जांच व उचित निर्णय की अपेक्षा की गई है। कई सपा नेताओं ने भी इस पर समर्थन देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच करते हुए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
दिखवाया जा रहा है प्रकरण
संबंधित प्रकरण को दिखवाया जा रहा है। सीडीओ को कहा गया है कि वह पूरे मामले को विस्तार से देखें। इसमें क्या निकलकर आता है, इसे देखना होगा। इसके बाद ही कुछ कह पाना उचित होगा। यह तय है कि कहीं भी नियमों की अनदेखी नहीं स्वीकार्य होगी।
- राकेश कुमार मिश्र, प्रशासक/डीएम
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बीते दिनों जिला पंचायत में मनमाने ढंग से 23 करोड़ रुपये के कार्यों का टेंडर कर देने का खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसमें 14 करोड़ की लागत से 165 कार्य शामिल थे, जबकि 9 करोड़ की लागत से 86 कार्य शामिल किए गए। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि विशेष परिस्थिति के कार्यों को छोड़कर कतई कोई कार्य बगैर ई-टेंडर के न कराए जाएं। इसमें सड़कों की मरम्मत के लिए छूट प्रदान की गई है, लेकिन वह भी सिर्फ विशेष परिस्थिति के लिए।
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इसके बावजूद लगभग 23 करोड़ के कार्य मनमाने ढंग से आवंटित कर दिए गए, जबकि उन कार्यों के लिए कोई विशेष परिस्थिति नहीं थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि विशेष परिस्थिति दिखाकर कार्यों का आवंटन भी किया गया तो निर्धारित एक माह से लेकर तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्य पूरा कराने की सुध क्यों नहीं रही। तमाम नागरिक इसी बिंदु पर सवाल खड़े करते हुए कहते हैं कि दरअसल सिर्फ टेंडर निकालने व काम देने की जल्दी थी। इसके लिए नियम कानून को भी ताक पर रखा गया और उसके बाद काम जल्द पूरा कराने की भी सुध नहीं ली गई।
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यह मामला अब शासन की चौखट तक पहुंच गया है। ई-टेंडर न होने की वजह से प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए कई ठेकेदारों ने सामूहिक रूप से सीएम व मुख्य सचिव को इस मामले को लेकर पत्र भेजा है। संबंधित ठेकेदार तो सामने नहीं आ सके हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के उल्लंघन का संज्ञान लिया जाए। इस बीच शासन तक बात पहुंचने से पहले ही जिला पंचायत के प्रशासक व डीएम राकेश कुमार मिश्र ने अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू करा दी है। डीएम ने सीडीओ घनश्याम मीणा को निर्देशित किया है कि वे पूरे प्रकरण को विस्तार से देखें।
सीडीओ ने मांगी पत्रावली
मनमाने ढंग से ई-टेंडर करने से जुड़ीं सभी पत्रावली सीडीओ घनश्याम मीणा ने तलब कर ली हैं। बीते दिन उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से पूरी पत्रावली मांगी है। सूत्रों के अनुसार सीडीओ ने न सिर्फ टेंडर वरन उससे जुड़ी पूरी पत्रावली मांगी है। इसके साथ ही शासनादेश भी साथ लेकर आने को कहा गया है, जिससे विस्तृत जांच सुनिश्चित हो सके। माना जा रहा है कि पत्रावली सामने आने के बाद प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए तकनीकी समिति का गठन भी किया जा सकता है। उधर, पत्रावली तलब किए जाने से जिला पंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत तमाम ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
सपा ने भी उठाया मामला
समाजवादी पार्टी की राज्य इकाई ने भी जिला पंचायत में चल रहे गड़बड़झाले का मामला उठाया है। अमर उजाला की खबर को सोशल मीडिया पर सपा की प्रदेश कमेटी ने शेयर किया है। इसमें जिला पंचायत में कार्यों के नाम पर गड़बड़ी करने का उल्लेख करते हुए शासन से समुचित जांच व उचित निर्णय की अपेक्षा की गई है। कई सपा नेताओं ने भी इस पर समर्थन देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच करते हुए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
दिखवाया जा रहा है प्रकरण
संबंधित प्रकरण को दिखवाया जा रहा है। सीडीओ को कहा गया है कि वह पूरे मामले को विस्तार से देखें। इसमें क्या निकलकर आता है, इसे देखना होगा। इसके बाद ही कुछ कह पाना उचित होगा। यह तय है कि कहीं भी नियमों की अनदेखी नहीं स्वीकार्य होगी।
- राकेश कुमार मिश्र, प्रशासक/डीएम