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कायम रखें ऐसा ही भाईचारा, सबकी है बराबर जिम्मेदारी

Sun, 10 Nov 2019 11:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 11:45 PM IST
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BROTHER HOOD
अंबेडकरनगर। लंबे समय से चले आ रहे अयोध्या विवाद का देश की सर्वोच्च अदालत ने जो निर्णय दिया है, उसका सभी को सम्मान करना चाहिए। किसी भी प्रकार की कड़वाहट की बजाए आपसी सौहार्द कायम रखें। हिंदुस्तान गंगा-जमुनी तहजीब का देश माना जाता है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि इसे कायम रखें। नागरिकों से यह अपील कि की अयोध्या मामले का फैसला आने के बाद दूसरे दिन रविवार को धर्मगुरुओं व गणमान्य लोगों ने किया।
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वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना सै. नूरुल हसन ने कहा कि दुनिया में हिंदुस्तान अकेला ऐसा मुल्क है, जहां सभी मजहब के लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। एक दूसरे का पर्व एक साथ मिलकर मनाते हैं। ऐसे में लंबे अर्से से चले आ रहे अयोध्या विवाद का जो फैसला मुल्क की सर्वोच्च अदालत ने दिया है, उसका हम सभी को आगे बढ़कर स्वागत करना चहिए। आपसी भाईचारगी की डोर और मजबूत करनी होगी।
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मेहंदी एजुकेशन एकेडमी के प्रबंधक मेहदी रजा ने कहा कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्तान हमारा। इस पंक्ति को और मजबूत करना होगा। अयोध्या मामले का जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, उसका हम सभी को पूरी तरह सम्मान करना चाहिए। मंदिर मस्जिद निर्माण में हम सभी को बढ़ चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए।
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शिया धर्मगुरु मौलाना सै. सना अब्बास ने कहा कि देश की न्याय पालिका पर हम सभी को भरोसा रखना चाहिए। न्यायापालिका कभी किसी के साथ अन्याय नहीं कर सकती। ऐसे में देश की सर्वोच्च अदालत ने जो भी फैसला दिया है, उसका सम्मान करते हुए हमें आपसी सौहार्द कायम रखना चाहिए।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय तिवारी ने कहा कि सभी मजहब इंसानियत का पैगाम देते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि इंसानियत दिखाते हुए एक दूसरे के सुख में भागीदारी करें। जो फैसला आया है, उसका सम्मान करते हुए आपसी सौहार्द कायम रखें।
सामाजिक कार्यकर्ता रामकेवल वर्मा ने कहा कि हम सभी को खुश होना चाहिए कि एक ऐसे विवाद का पटाक्षेप हो गया है, जो दो दिलों की दूरियां बढ़ा रहा था। जो फैसला आया है, उसे लेकर सभी को सकारात्मक सोच दिखाते हुए सम्मान करना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सिंह ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है। हम सभी को उसे स्वीकार करना चाहिए। एक दूसरे के साथ मिलकर राष्ट्र को विकास के पथ पर आगे बढ़ाना चाहिए।
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