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Ambedkar Nagar News: सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को मिली करारी हार
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अंबेडकरनगर। लोकसभा चुनाव में जीत का लक्ष्य लेकर उतरी बीजेपी को सभी पांच विधानसभा सीट पर करारी पराजय का सामना करना पड़ा है। संदेश साफ है कि विधानसभा चुनाव में इन सभी सीट पर कोई सपा की जीत के दो वर्ष बाद भी कुछ बदला नहीं है। मतदाताओं की स्थिति जस की तस है।
लोकसभा चुनाव शुरू होने के पहले भारतीय जनता पार्टी ने अंबेडकरनगर सीट को अत्यंत प्राथमिकता पर रखा था। ऐसा इसलिए क्योंकि 2019 में हुए चुनाव में प्रदेश की जिन चंद सीटों पर भाजपा की हार हुई थी, उसमें अंबेडकरनगर सीट भी शामिल थी। तब भाजपा ने उस समय के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा था। कद्दावर नेता को टिकट देने के बाद भी उस समय के बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय उन्हें हराकर सांसद बन गए थे। रितेश अब भाजपा के पाले में आने के साथ ही पार्टी प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरे। पार्टी ने जीत तय करने के लिए संगठन से लेकर सत्ता तक पूरा जोर लगाया। कोशिश यह थी कि बड़े अंतर से अंबेडकरनगर में जीत दर्ज हो सके।
भाजपा को सबसे ज्यादा भरोसा गोसाईगंज व कटेहरी सीट से था। गोसाईगंज की दशा यह रही कि भाजपा को यहां 17462 मत से यहां पिछड़ जाना पड़ा। जिस कटेहरी से पार्टी ने लीड मिलने की उम्मीद लगाई थी वहां से 17072 मत से भाजपा की हार हुई। टांडा से उम्मीद के मुताबिक ही भाजपा को 53706 मत से भारी अंतर से पिछड़ना पड़ा। जलालपुर की सीट पर भाजपा 27357 मत से पीछे रह गई तो वहीं अकबरपुर विस क्षेत्र में सपा ने 21273 मतों से भाजपा को यहां हरा दिया। ऐसे में लोकसभा की सभी पांच विधानसभा सीट पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा।
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इन सभी पांच सीटों में से टांडा को छोड़ अन्य सीटों पर भाजपा इक्का दुक्का बार ही अलग-अलग राउंड में बढ़त लेती दिखाई पड़ी। ज्यादातर समय सभी विधानसभा क्षेत्र के अलग अलग राउंड में भाजपा प्रत्याशी सपा से पिछड़ते ही दिखे। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पहले जब विधानसभा चुनाव हुआ था तब सभी पांच विधानसभा सीट पर सपा की जीत हुई थी। जलालपुर से राकेश पांडेय, अकबरपुर से रामअचल राजभर, टांडा से राममूर्ति वर्मा, कटेहरी से लालजी वर्मा तथा गोसाईगंज से अभय सिंह को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले हुए राज्यसभा चुनाव में राकेश पांडेय व अभय सिंह ने सपा का साथ छोड़ दिया और भाजपा के खेमे में खड़े हो गए। इसके बाद भी लोकसभा चुनाव में मतदान के दौरान इन दोनों सीट के मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ा। विधानसभा चुनाव की तरह ही लोकसभा चुनाव में भी दो वर्ष बाद मतदाताओं का जनादेश जस का तस रहा।
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लोकसभा चुनाव शुरू होने के पहले भारतीय जनता पार्टी ने अंबेडकरनगर सीट को अत्यंत प्राथमिकता पर रखा था। ऐसा इसलिए क्योंकि 2019 में हुए चुनाव में प्रदेश की जिन चंद सीटों पर भाजपा की हार हुई थी, उसमें अंबेडकरनगर सीट भी शामिल थी। तब भाजपा ने उस समय के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा था। कद्दावर नेता को टिकट देने के बाद भी उस समय के बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय उन्हें हराकर सांसद बन गए थे। रितेश अब भाजपा के पाले में आने के साथ ही पार्टी प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरे। पार्टी ने जीत तय करने के लिए संगठन से लेकर सत्ता तक पूरा जोर लगाया। कोशिश यह थी कि बड़े अंतर से अंबेडकरनगर में जीत दर्ज हो सके।
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भाजपा को सबसे ज्यादा भरोसा गोसाईगंज व कटेहरी सीट से था। गोसाईगंज की दशा यह रही कि भाजपा को यहां 17462 मत से यहां पिछड़ जाना पड़ा। जिस कटेहरी से पार्टी ने लीड मिलने की उम्मीद लगाई थी वहां से 17072 मत से भाजपा की हार हुई। टांडा से उम्मीद के मुताबिक ही भाजपा को 53706 मत से भारी अंतर से पिछड़ना पड़ा। जलालपुर की सीट पर भाजपा 27357 मत से पीछे रह गई तो वहीं अकबरपुर विस क्षेत्र में सपा ने 21273 मतों से भाजपा को यहां हरा दिया। ऐसे में लोकसभा की सभी पांच विधानसभा सीट पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा।
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इन सभी पांच सीटों में से टांडा को छोड़ अन्य सीटों पर भाजपा इक्का दुक्का बार ही अलग-अलग राउंड में बढ़त लेती दिखाई पड़ी। ज्यादातर समय सभी विधानसभा क्षेत्र के अलग अलग राउंड में भाजपा प्रत्याशी सपा से पिछड़ते ही दिखे। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पहले जब विधानसभा चुनाव हुआ था तब सभी पांच विधानसभा सीट पर सपा की जीत हुई थी। जलालपुर से राकेश पांडेय, अकबरपुर से रामअचल राजभर, टांडा से राममूर्ति वर्मा, कटेहरी से लालजी वर्मा तथा गोसाईगंज से अभय सिंह को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले हुए राज्यसभा चुनाव में राकेश पांडेय व अभय सिंह ने सपा का साथ छोड़ दिया और भाजपा के खेमे में खड़े हो गए। इसके बाद भी लोकसभा चुनाव में मतदान के दौरान इन दोनों सीट के मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ा। विधानसभा चुनाव की तरह ही लोकसभा चुनाव में भी दो वर्ष बाद मतदाताओं का जनादेश जस का तस रहा।