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Ambedkar Nagar News: दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार की अदालत ने आलापुर के दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट मामले में इम्तियाज अहमद की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इम्तियाज पर एक युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म का आरोप है।
युवती के पिता ने 19 मई 2026 को आलापुर में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी 20 वर्षीय पुत्री 18 मई को बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने कॉलेज गई थी। शाम तक घर न लौटने पर उसकी तलाश हुई, पर पता नहीं चला। पिता ने संदेह जताया कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर इम्तियाज को 24 मई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में बयान के आधार पर दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं।
आरोपी इम्तियाज ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि पिता से उधार के पैसे न लौटाने की रंजिश में झूठा मामला दर्ज हुआ और एफआईआर में भी देरी हुई। उसने युवती की उम्र करीब 20 वर्ष होने से पॉक्सो एक्ट लागू न होने की दलील दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता ने इम्तियाज के साथ अयोध्या जाने और शादी करने की इच्छा जताई थी, साथ ही चार वर्षों से शारीरिक संबंध होने की बात भी कही। विवेचना में पीड़िता को नाबालिग दर्शाया गया, इसलिए उसकी सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं है। इस आधार पर विशेष न्यायाधीश मोहन कुमार ने इम्तियाज अहमद की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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युवती के पिता ने 19 मई 2026 को आलापुर में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी 20 वर्षीय पुत्री 18 मई को बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने कॉलेज गई थी। शाम तक घर न लौटने पर उसकी तलाश हुई, पर पता नहीं चला। पिता ने संदेह जताया कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर इम्तियाज को 24 मई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में बयान के आधार पर दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं।
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आरोपी इम्तियाज ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि पिता से उधार के पैसे न लौटाने की रंजिश में झूठा मामला दर्ज हुआ और एफआईआर में भी देरी हुई। उसने युवती की उम्र करीब 20 वर्ष होने से पॉक्सो एक्ट लागू न होने की दलील दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता ने इम्तियाज के साथ अयोध्या जाने और शादी करने की इच्छा जताई थी, साथ ही चार वर्षों से शारीरिक संबंध होने की बात भी कही। विवेचना में पीड़िता को नाबालिग दर्शाया गया, इसलिए उसकी सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं है। इस आधार पर विशेष न्यायाधीश मोहन कुमार ने इम्तियाज अहमद की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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