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Ambedkar Nagar News: सीवर का ढक्कन खोलते ही तीनों चंद मिनट में ही टैंक में समा गए

Thu, 24 Jul 2025 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Thu, 24 Jul 2025 11:19 PM IST
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As soon as the sewer lid was opened, all three got submerged in the tank within a few minutes
अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज सदरपुर में बृहस्पतिवार को हुए दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि निजी संस्था महाकाल प्रा. लि. की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों के तीन सफाईकर्मी सेफ्टी टैंक में उतारे गए। सीवर का ढक्कन खोलते ही तीनों चंद मिनट में ही टैंक में समा गए। जिनमें से दो की मौत हो गई और एक की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
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हादसे की सूचना जैसे ही मेडिकल कॉलेज और मृतकों के परिजनों तक पहुंची, पूरे परिसर में चीख-पुकार और सन्नाटा छा गया। इमरजेंसी कक्ष के बाहर बेसुध परिजन रोते-बिलखते रहे। मेडिकल कॉलेज में सीवर लाइन चोक होने के बाद प्रशासन ने सफाई के लिए कोटेशन मांगे थे। जिम्मेदारी महाकाल लिमिटेड को सौंपी गई, जिसने बिना सुरक्षा इंतजाम किए टांडा नगर पालिका से जुड़े सफाई कर्मियों को बुला लिया। जैसे ही टैंक का ढक्कन खोला गया। सबसे पहले सुरेंद्र कुमार नीचे गिरा। उसे बचाने के प्रयास में मनीराम और देवानंद भी एक-एक कर टैंक में समा गए। आनन-फानन मंगाई गई जेसीबी से टैंक को तोड़कर सभी को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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मौत की खबर के साथ टूटी उम्मीदें

मनीराम (35) रामपुर कला, टांडा के निवासी थे। ठेका सफाई कर्मी के रूप में काम करते थे। परिवार में पत्नी पूजा, मां प्रभावती और दो छोटे बेटे आदित्य (8) व कुनाल (6) हैं। जैसे ही पूजा को पति की मौत की खबर मिली। वह इमरजेंसी कक्ष के बाहर ही बेसुध हो गईं।
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पांच बेटियों से छिन गया सहारा

देवानंद (40) नगर पालिका टांडा में संविदा सफाईकर्मी थे। वह पहले भी मेडिकल कॉलेज में काम कर चुके थे। परिवार में पत्नी गीता देवी और पांच बेटियां एकता (17), अंशिका (14), नैना (11), अनन्या (9) और लवली (5) हैं। सबसे बड़ी बेटी बीएससी कर रही है। पिता की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है।



सुरेंद्र अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे

सुरेंद्र कुमार (45) नगर पालिका टांडा के स्थायी सफाईकर्मी हैं। ठेकेदार के बुलावे पर कॉलेज पहुंचे थे। परिवार में पिता बेनी माधव, पत्नी सरोजा और तीन बेटे राजन, समर और अभिषेक (कक्षा 7 व 6 के छात्र) हैं। परिवार की पूरी आर्थिक ज़िम्मेदारी सुरेंद्र पर ही थी।



नेताओं और अफसरों ने जताया दुख

हादसे की सूचना पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा मौके पर पहुंचे और परिजनों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता ने मामले की जांच के आदेश देते हुए कहा कि बिना सुरक्षा इंतजाम काम कराने वालों पर मुकदमा दर्ज किया जाएग
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