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Ambedkar Nagar News: स्टाफ नर्स व तीन कर्मियों पर दर्ज होगी प्राथमिकी
Fri, 03 Apr 2026 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 12:23 AM IST
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अंबेडकरनगर। भीटी सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स को स्थायी नौकरी के साथ संविदा का मानदेय देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. रामानंद ने स्टाफ नर्स सहित मानदेय भेजने वाले तीन कर्मियों पर प्राथमिकी के लिए अकबरपुर कोतवाली में तहरीर दी है।
भीटी सीएचसी में अंजू मिश्रा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर तैनात थीं जिसका इन्हें मानदेय मिलता था। सितंबर 2023 में इनको स्टाफ नर्स की स्थायी नौकरी मिल गई थी। इसके बाद भी इनके खाते में मानदेय जाता रहा और अपना सरकारी वेतन भी लेती रहीं।
शिकायत के बाद सीएमओ ने लेखा प्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता से दस्तावेज मांगे। जांच में अंजू के भारतीय स्टेट बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक में पैसा जाने की पुष्टि हुई। जांच में एसबीआई खाता में 59,250 रुपये व कोटक महिंद्रा बैंक 2,23,195 रुपये वेतन के अतिरिक्त मिले थे। इसके बाद बैंक खातों में रोक लगा दी गई थी।
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अंजू मिश्रा ने अपने स्पष्टीकरण में बताया था कि एसबीआई में आया पैसा एनएचएम से इंसेंटिव के रूप में मिला है। संविदा का भी वेतन उनके खाते में आने की जानकारी हुई तो तो उन्होंने एनएचएम कार्यालय में डीपीएम अनिल मिश्रा, डीडीएम वंशमणि पांडेय को सूचना दी।
इन दोनों ने लिपिकीय त्रुटि होने व परेशान न होने की बात कहकर वापस भेज दिया था। इसके बाद भी किसी स्तर पर वसूली नहीं हुई। शिकायत होने के बाद छह फरवरी 2026 को अंजू मिश्रा ने यह रकम ब्याज समेत वापस जमा कर दी थी। 19 फरवरी को इन्हें निलंबित कर दिया गया था। वंशमणि से पहले डीडीएम दिनेश गुप्ता ने मानदेय स्थानांतरित किया था।
बिना उपस्थिति के जारी कर दिया मानदेय
सीएचसी भीटी से जब कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका देखी गई तो उसमें पता चला कि एएनएम के स्थान पर अंजू मिश्रा ने हस्ताक्षर नहीं किए थे। ऐसे में बिना उपस्थिति के ही मानदेय भेजा गया। इसके जवाब में डीडीएम वंशमणि व डीपीएम अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि विभाग में एक ही नाम के नौ कर्मचारी होने के कारण गड़बड़ी हुई है।
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भीटी सीएचसी में अंजू मिश्रा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर तैनात थीं जिसका इन्हें मानदेय मिलता था। सितंबर 2023 में इनको स्टाफ नर्स की स्थायी नौकरी मिल गई थी। इसके बाद भी इनके खाते में मानदेय जाता रहा और अपना सरकारी वेतन भी लेती रहीं।
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शिकायत के बाद सीएमओ ने लेखा प्रबंधक दिनेश कुमार गुप्ता से दस्तावेज मांगे। जांच में अंजू के भारतीय स्टेट बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक में पैसा जाने की पुष्टि हुई। जांच में एसबीआई खाता में 59,250 रुपये व कोटक महिंद्रा बैंक 2,23,195 रुपये वेतन के अतिरिक्त मिले थे। इसके बाद बैंक खातों में रोक लगा दी गई थी।
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अंजू मिश्रा ने अपने स्पष्टीकरण में बताया था कि एसबीआई में आया पैसा एनएचएम से इंसेंटिव के रूप में मिला है। संविदा का भी वेतन उनके खाते में आने की जानकारी हुई तो तो उन्होंने एनएचएम कार्यालय में डीपीएम अनिल मिश्रा, डीडीएम वंशमणि पांडेय को सूचना दी।
इन दोनों ने लिपिकीय त्रुटि होने व परेशान न होने की बात कहकर वापस भेज दिया था। इसके बाद भी किसी स्तर पर वसूली नहीं हुई। शिकायत होने के बाद छह फरवरी 2026 को अंजू मिश्रा ने यह रकम ब्याज समेत वापस जमा कर दी थी। 19 फरवरी को इन्हें निलंबित कर दिया गया था। वंशमणि से पहले डीडीएम दिनेश गुप्ता ने मानदेय स्थानांतरित किया था।
बिना उपस्थिति के जारी कर दिया मानदेय
सीएचसी भीटी से जब कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका देखी गई तो उसमें पता चला कि एएनएम के स्थान पर अंजू मिश्रा ने हस्ताक्षर नहीं किए थे। ऐसे में बिना उपस्थिति के ही मानदेय भेजा गया। इसके जवाब में डीडीएम वंशमणि व डीपीएम अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि विभाग में एक ही नाम के नौ कर्मचारी होने के कारण गड़बड़ी हुई है।