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Ambedkar Nagar News: अमृत सरोवर बन गए खेल के मैदान
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अंबेडकरनगर। जल स्तर संतुलित रखने व पशु पक्षियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए स्थापित दो दर्जन से अधिक सरोवरों में इन दिनों धूल उड़ रही है। संबंधित गांवों के बच्चों ने उसे खेल का मैदान बना रखा है। भीषण गर्मी में तालाब में पानी न होने से आदर्श जलाशय योजना के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
जलस्तर को बनाए रखने व मवेशियों की सुविधा के लिए मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवरों के निर्माण की योजना चल रही है। लाखों रुपये खर्च कर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 188 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। सरोवर का सौंदर्यीकरण भी निर्माण के दौरान किया गया। चारों तरफ से कंटीले तारों से घेरा गया। लोगों के बैठने के लिए बेंच की स्थापना की गई। झंडारोहण का स्थान बनाया गया। इसके अलावा भी कई अन्य प्रकार की व्यवस्थाएं निर्माण के दौरान की गईं। उद्देश्य यह भी था कि फुरसत के समय लोग तालाब किनारे बैठकर कुछ पल सुकून से गुजार सकें।
लेकिन थोड़े समय बाद ही इन सरोवरों की उपयोगिता समाप्त होने लगी। देखरेख के अभाव में लगभग दो दर्जन से अधिक ऐसे अमृत सरोवर हैं जिसमें पानी तक नहीं है। भीषण गर्मी में इन तालाबों में धूल उड़ रही है। गांव के बच्चों ने इन तालाबों को खेल का मैदान बना लिया है।
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उपेक्षा का शिकार हो गए अमृत सरोवर
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के बरधाभिउरा गांव में अमृत सरोवर का निर्माण तो है लेकिन उसमें पानी नहीं है। कृष्णप्रताप व बिपिन कुमार ने कहा कि ऐसे सरोवर से क्या लाभ जिसकी कोई उपयोगिता ही न हो। लाखों रुपये खर्च कर दिए गए इसके निर्माण में लेकिन पूरी तरह से निष्प्रयोज्य है। भीषण गर्मी में जब पानी की जरूरत है तो इसमें धूल उड़ रही है। कटरिया सम्मनपुर, आदमपुर तिंदौली समेत कई अन्य गावों में स्थित अमृत सरोवर में भी या तो धूल उड़ रही है या फिर नाम मात्र पानी है। तहसील क्षेत्र जलालपुर के नगपुर व गौरा कमाल गांव में निर्मित अमृत सरोवर का भी बुरा हाल है। लंबे समय से इसमें पानी नहीं डाला जा सका है। गांव के राजितराम, संतराम व मेवालाल ने कहा कि सरोवर में पानी न होने से मवेशियों के समक्ष भी समस्या खड़ी हो रही है। भीषण गर्मी में उन्हें प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
दिए गए जरूरी निर्देश
जो अमृत सरोवर नहर के किनारे हैं उनमें पानी डाले जाने के निर्देश जिम्मेदारों को दिए गए हैं। शीघ्र ही तालाबों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा। - अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
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जलस्तर को बनाए रखने व मवेशियों की सुविधा के लिए मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवरों के निर्माण की योजना चल रही है। लाखों रुपये खर्च कर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 188 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। सरोवर का सौंदर्यीकरण भी निर्माण के दौरान किया गया। चारों तरफ से कंटीले तारों से घेरा गया। लोगों के बैठने के लिए बेंच की स्थापना की गई। झंडारोहण का स्थान बनाया गया। इसके अलावा भी कई अन्य प्रकार की व्यवस्थाएं निर्माण के दौरान की गईं। उद्देश्य यह भी था कि फुरसत के समय लोग तालाब किनारे बैठकर कुछ पल सुकून से गुजार सकें।
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लेकिन थोड़े समय बाद ही इन सरोवरों की उपयोगिता समाप्त होने लगी। देखरेख के अभाव में लगभग दो दर्जन से अधिक ऐसे अमृत सरोवर हैं जिसमें पानी तक नहीं है। भीषण गर्मी में इन तालाबों में धूल उड़ रही है। गांव के बच्चों ने इन तालाबों को खेल का मैदान बना लिया है।
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उपेक्षा का शिकार हो गए अमृत सरोवर
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के बरधाभिउरा गांव में अमृत सरोवर का निर्माण तो है लेकिन उसमें पानी नहीं है। कृष्णप्रताप व बिपिन कुमार ने कहा कि ऐसे सरोवर से क्या लाभ जिसकी कोई उपयोगिता ही न हो। लाखों रुपये खर्च कर दिए गए इसके निर्माण में लेकिन पूरी तरह से निष्प्रयोज्य है। भीषण गर्मी में जब पानी की जरूरत है तो इसमें धूल उड़ रही है। कटरिया सम्मनपुर, आदमपुर तिंदौली समेत कई अन्य गावों में स्थित अमृत सरोवर में भी या तो धूल उड़ रही है या फिर नाम मात्र पानी है। तहसील क्षेत्र जलालपुर के नगपुर व गौरा कमाल गांव में निर्मित अमृत सरोवर का भी बुरा हाल है। लंबे समय से इसमें पानी नहीं डाला जा सका है। गांव के राजितराम, संतराम व मेवालाल ने कहा कि सरोवर में पानी न होने से मवेशियों के समक्ष भी समस्या खड़ी हो रही है। भीषण गर्मी में उन्हें प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
दिए गए जरूरी निर्देश
जो अमृत सरोवर नहर के किनारे हैं उनमें पानी डाले जाने के निर्देश जिम्मेदारों को दिए गए हैं। शीघ्र ही तालाबों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा। - अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ