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ट्रेनों का डायवर्जन रोकने को रेल मंत्री से मिलेंगे सांसद रितेश

Fri, 07 Aug 2020 09:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 09:36 PM IST
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अंबेडकरनगर। चार प्रमुख ट्रेनों का रूट परिवर्तित कर दिए जाने का मामला सत्र शुरू होने पर संसद में गूंजेगा। सांसद रितेश पाण्डेय ने कहा कि वे सत्र शुरू होने पर इसे संसद में उठाएंगे।इससे पहले रेल मंत्री व रेल मंत्रालय के अधिकारियों को पत्र सौंपकर यह आग्रह करेंगे कि इन ट्रेनों का रूट कतई डायवर्ट न किया जाए। यह सभी ट्रेन इस क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन हैं। ऐसे में इनका डायवर्जन कतई उचित नहीं है। इस बीच प्रमुख ट्रेनों का रूट बदले जाने को लेकर यात्रियों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
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अमर उजाला द्वारा प्रमुख ट्रेनों का रूट बदल दिए जाने की खबर प्रकाशित किए जाने के बाद आम नागरिकों व यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी नाराजगी का इजहार किया। कई सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन रेल अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने की तैयारी में हैं।
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गौरतलब है कि रेल मंत्रालय ने अकबरपुर व अयोध्या से होकर प्रतिदिन चलने वाली गंगा सतलज/किसान एक्सप्रेस ट्रेन तथा दून एक्सप्रेस ट्रेन का रूट डायवर्ट करने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन आगामी दिनों में जब फिर से चलेेगी तो बनारस के बाद प्रतापगढ़, रायबरेली होकर लखनऊ जाएगी। इन दोनों ट्रेन से दोनों जिले के अधिकांश यात्री अलग अलग क्षेत्र की यात्रा करते रहे हैं।
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ऐसे में इन ट्रेनों के रूट डायवर्जन की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की तो यात्रियों में गहरी निराशा व्याप्त हो गई। इसी बीच यह खबर भी सामने आई कि सप्ताह में एक दिन यहां रूकने वाली जयनगर अमृतसर एक्सप्रेस तथा सप्ताह में तीन दिन रूकने वाली कामाख्या गांधी धाम एक्सप्रेस ट्रेन भी इस रूट से नहीं जाएगी। ऐसे में इसे लेकर यात्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया भी दी।
इस बीच जिले के बसपा सांसद रितेश पांडेय ने चार ट्रेनों के रूट डायवर्जन को अनुचित बताते हुए कहा कि वे इसकी आवाज संसद में उठाएंगे। यह व्यापक जनहित से जुड़ा मामला है। लंबी दूरी के अलावा आसपास के कई जनपदों व छोटे कस्बों की यात्रा करने के लिए यात्री गंगा सतलज व दून एक्सप्रेस जैसी ट्रेन पर आश्रित थे।
अन्य दोनों ट्रेन का भी व्यापक लाभ क्षेत्र को मिल रहा था। ऐसे में इन चारों ट्रेन का रूट डायवर्जन न हो इसके लिए आगामी दिनों में संसद सत्र शुरू होने पर आवाज उठाने के साथ साथ उससे पहले रेल मंत्री से मिलकर व्यक्तिगत अनुरोध भी करेंगे।

रेल मंत्रालय को भी विधिवत पत्र सौंपकर क्षेत्र की जनता की भावनाओं से अवगत कराया जाएगा। इस बीच ट्रेनों के डायवर्जन की खबर सामने आते ही शुक्रवार को सोशल मीडिया पर आम नागरिकों व यात्रियों की कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों का कहना था कि यह निर्णय अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। क्षेत्र की जनता के साथ धोखा है। इसे अविलंब वापस लिया जाना चाहिए।
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