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करेंसी संकट ने रोके सभी जरूरी खर्च
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:39 PM IST
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एचडीएफसी एटीएम के सामने धन निकासी के लिए लगी उपभोक्ताओं की लंबी लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
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बैंकों में करेंसी का संकट शुक्रवार को गहरा सकता है। कारण यह कि कई बैंक शाखाओं के पास पर्याप्त पैसा ही नहीं बचा। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाएं मुख्य रूप से शामिल हैं। चेस्ट से यदि उन्हें आवश्यक रकम नहीं मिल पायी तो शुक्रवार को भुगतान में मुश्किलें खड़ी होंगी। बैंक ऑफ इंडिया समेत अन्य बैंकों को भी धनाभाव का सामना करना पड़ रहा है।
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उधर इन सब का सीधा खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं। गुरुवार को भी बैंकों के सामने धन निकासी के लिए उपभोक्ताओं की भारी भीड़ जमा हुई। पैसे की समुचित निकासी के लिए मची मारामारी के बीच आम लोगों को अपने तमाम खर्च में कटौती की मजबूरी भी झेलनी पड़ रही है। जैसे-तैसे तमाम लोग जरूरी दैनिक काम ही निपटा रहे हैं।
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पुराने बड़े नोटों पर लगे प्रतिबंध के बाद से हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। लोगों में इसे लेकर अब नाराजगी देखने को मिल रही है। दरअसल आठ दिन बीत जाने के बाद भी करेंसी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पा रही। लोगों के पास पुराने बड़े नोट तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें बदले जाने में आ रही कठिनाई ने उनकी मुसीबतें और बढ़ा दी हैं।
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पुराने बड़े नोट बदले नहीं जा पा रहे तो नए बड़े नोट या फिर 100, 50 या 20 के नोट पाने को लेकर मची मारामारी के बीच ज्यादातर लोग मुश्किल में हैं। हालत यह है कि तमाम परिवारों ने अपने जरूरी खर्च में कटौती कर दी है। बहुत जरूरी काम ही निपटाए जा रहे हैं। जो काम टाले जा सकते हैं, उन्हें स्थगित किया जा रहा है। कई जरूरी काम तक लोग आने वाले दिनों के लिए टाल दे रहे हैं।
अकबरपुर नगर के व्यवसायी नरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि उनके पास प्रतिदिन कारोबार की रकम आती रहती है। इसके बाद भी कई जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने सोचा था कि ठंड शुरु होने से पहले ही लखनऊ जाकर एक प्रतिष्ठित कंपनी का कोट लेंगे लेकिन अब इस फैसले को कुछ दिन के लिए टाल दिया है।
शिक्षक सुरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि धन निकासी की मुश्किलों के चलते ही उन्होंने माइक्रोवेव ओवेन लेने का निर्णय कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। खाते में पैसा है, लेकिन उसे किसी आकस्मिक जरूरत के लिए नहीं निकाला जा रहा है। गृहणी शालिनी श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी बहन का विवाह 1 दिसंबर को है।
उन्होंने सोचा था कि बहुत अच्छे ढंग से वे शादी में शामिल होंगी, लेकिन उत्साह पर पानी फिरता दिख रहा है। अभी समय है यदि निकासी हो पायी तो ही बात बन पाएगी। कुछ इसी तरह की समस्या से कई अन्य लोग भी जूझ रहे हैं। बहुत जरूरी चीजों व कार्यों के लिए ही धन खर्च करने की मजबूरी का ही नतीजा है कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में भी अब सन्नाटा ही पसरा रहता है।
विभिन्न प्रकार के व्यवसायों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। उधर गुरुवार को भी बैंकों के सामने उपभोक्ताओं की भारी भीड़ लगी रही। ज्यादातर लोगों को उम्मीदों के अनुरूप पैसा नहीं मिल पाया। एचडीएफसी व स्टेट बैंक जैसे कुछ अन्य बैंक शाखाएं ही निर्धारित 24 हजार की रकम की निकासी कर रही हैं। अन्य शाखाओं से दो से चार हजार तक ही निकासी हो पा रही है।
इस बीच बैंकों का धनाभाव संकट शुक्रवार को और गहरा सकता है। दरअसल जितनी रकम की जरूरत है वह बैंक शाखाओं तक पहुंच नहीं पा रही। बैंक ऑफ इंडिया अकबरपुर के शाखा प्रबंधक राकेश कुमार ने कहा कि बैंक बंदी जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन धनाभाव है। कहा कि किसी तरह लोगों को संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने भी यही स्थिति है।
गुरुवार को लगभग 50 लाख रुपए का भुगतान किया गया। अब शुक्रवार के लिए ज्यादा रकम नहीं बची। शाखा प्रबंधक ए सिंह ने बताया कि यदि फैजाबाद चेस्ट से पैसा नहीं मिल पाया तो शुक्रवार को भुगतान में कठिनाई आ सकती है। कई अन्य बैंक शाखाओं में भी यही स्थिति बनी रही।
बड़े नोटों पर प्रतिबंध के बाद वैवाहिक आयोजनों की तैयारी को लेकर संकट से जूझ रहे लोगों को मदद दिलाने के लिए जिला प्रशासन आगे आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर शुक्रवार से कलेक्ट्रेट में मैरिज हेल्प कैंप काम करना शुुरू कर देगा।
गौरतलब है कि कुछ दिनों से यह खबर सामने आ रही थी कि वैवाहिक आयोजनों से जुड़े लोगों को भी निर्धारित रकम नहीं मिल पा रही है। इसे देखते हुए ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने कलेक्ट्रेट में विशेष मैरिज हेल्प कैंप शुरू करने का निर्देश दिया।
डीएम ने कहा कि जो लोग आवश्यक प्रमाण के साथ यहां पहुंचेंगे, उनकी मदद सुनिश्चित की जाएगी। बैंकों से उन्हें वह रकम दिलायी जाएगी, जिसका लिखित निर्देश यहां मौजूद है। एलडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि निजी कार्यों से बाहर हूं लेकिन स्थिति जल्द ही सुधरेगी। आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। किसी भी बैंक में भुगतान का संकट नहीं होने पाएगा। चेस्ट से रुपये की उपलब्धता हो रही है।