{"_id":"649c6f72e198a536190c1324","slug":"alam-coffin-procession-took-place-in-a-sad-atmosphere-ambedkar-nagar-news-c-13-1-311691-2023-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: गमगीन माहौल में निकला अलम-ताबूत का जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: गमगीन माहौल में निकला अलम-ताबूत का जुलूस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित शाही इमामबारगाह में मंगलवार रात अलम-ताबूत का जुलूस निकला। इसमें अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। इससे पहले मौलाना अली रिजवान ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक कर दिया।
मीरानपुर स्थित शाही जामा मस्जिद से निकला अलम व ताबूत का जुलूस बगल स्थित शाही इमामबारगाह पहुंचा। यहां मौजूद लोगों ने बढ़ चढ़कर जियारत की। साथ ही दुआ मांगी। बाद में अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड अकबरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। रजा अनवर ने अपने साथियों के साथ मातम करो हुसैन का छोड़ो नमाज को, वल्लाह यह नहीं था मंशा हुसैन का, नौहा पढ़कर माहौल को भावुक बना दिया।
इससे पहले मौलाना अली रिजवान लखनऊ ने मजलिस को संबोधित किया। कहा कि जब बादशाह यजीद ने इस्लाम को बदलने की कोशिश की तो इमाम हुसैन आगे आए। कहा कि नाना हजरत मोहम्मद मुस्तफा अलैह के दीन को बर्बाद नहीं होने देंगे। यजीद को अपना बादशाह मानने से इंकार करते हुए इमाम हुसैन ने मदीना छोड़ दिया। छोटे से काफिले के साथ कर्बला पहुंचे। 10 मोहर्रम को उन्होंने अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी। कर्बला का वाकया हुए 1400 वर्ष से अधिक का समय बीत गया लेकिन दुनिया के कोने-कोने में इमाम हुसैन का मातम होता है जबकि यजीद का नाम लेने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन
तंजीम रजाए इलाही के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम के बाद सचिव आरिफ अनवर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान इम्तियाज हुसैन, अली अस्करी नकवी, सै. मेहदी रजा, डॉ. आमिर अब्बास, कासिम हुसैन, मंसूर अख्तर, यासिर हुसैन, वसी हसन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मीरानपुर स्थित शाही जामा मस्जिद से निकला अलम व ताबूत का जुलूस बगल स्थित शाही इमामबारगाह पहुंचा। यहां मौजूद लोगों ने बढ़ चढ़कर जियारत की। साथ ही दुआ मांगी। बाद में अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड अकबरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। रजा अनवर ने अपने साथियों के साथ मातम करो हुसैन का छोड़ो नमाज को, वल्लाह यह नहीं था मंशा हुसैन का, नौहा पढ़कर माहौल को भावुक बना दिया।
विज्ञापन
इससे पहले मौलाना अली रिजवान लखनऊ ने मजलिस को संबोधित किया। कहा कि जब बादशाह यजीद ने इस्लाम को बदलने की कोशिश की तो इमाम हुसैन आगे आए। कहा कि नाना हजरत मोहम्मद मुस्तफा अलैह के दीन को बर्बाद नहीं होने देंगे। यजीद को अपना बादशाह मानने से इंकार करते हुए इमाम हुसैन ने मदीना छोड़ दिया। छोटे से काफिले के साथ कर्बला पहुंचे। 10 मोहर्रम को उन्होंने अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी। कर्बला का वाकया हुए 1400 वर्ष से अधिक का समय बीत गया लेकिन दुनिया के कोने-कोने में इमाम हुसैन का मातम होता है जबकि यजीद का नाम लेने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन
तंजीम रजाए इलाही के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम के बाद सचिव आरिफ अनवर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान इम्तियाज हुसैन, अली अस्करी नकवी, सै. मेहदी रजा, डॉ. आमिर अब्बास, कासिम हुसैन, मंसूर अख्तर, यासिर हुसैन, वसी हसन आदि मौजूद रहे।