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कृषि कानून को वापस लिया जाए
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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट के निकट अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते राष्ट्रीय किसान मोर्चा के सदस्?
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। कृषि कानूनों को वापस लिए जाने, किसानों को उनका हक दिए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के पास राष्ट्रीय किसान मोर्चा समेत कई संगठनों का संयुक्त रूप से धरना मंगलवार को भी जारी रहा। कहा गया कि सरकार किसानों को पूंजीपतियों के हाथों बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न सिर्फ कृषि कानून वापस लिए जाएं, बल्कि विरोध कर रहे किसानों का उत्पीड़न बंद किया जाए। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कृषि कानून के विरोध में सोमवार से राष्ट्रीय किसान मोर्चा, बहुजन मुक्ति पार्टी, बहुजन क्रांति मोर्चा, विद्यार्थी महासभा समेत कई अन्य संगठनों ने संयुक्त रूप से कलेक्ट्रेट के निकट धरना शुरू किया था। यह धरना मंगलवार को भी जारी रहा। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक लालजी गौतम ने कहा कि केंद्र सरकार देश को पूंजीपतियों के हाथों बेचना चाहती है। कृषि कानून लाकर किसानों को पूंजीपतियों के हाथों बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है। इस कानून के लागू होने से किसान फसलों की पैदावार तो करेंगे, लेकिन उन्हें उसका मूल्य निर्धारण करने का हक नहीं रहेगा। वह अपनी मर्जी से उपज की बिक्री भी नहीं कर सकेंगे।
वक्ताओं ने कहा कि कृषि कानून के विरोध में जो किसान विरोध कर रहे हैं, उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। हाड़कंपाऊ ठंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर ठंडे पानी की बौछार की जा रही है। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून वापस नहीं लिया गया और किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर जयप्रकाश, प्रदीप कुमार, विनय कुमार, कमलेश, रामकेवल, राजकुमार, अंकित, आदित्य आदि मौजूद रहे।
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कृषि कानून के विरोध में सोमवार से राष्ट्रीय किसान मोर्चा, बहुजन मुक्ति पार्टी, बहुजन क्रांति मोर्चा, विद्यार्थी महासभा समेत कई अन्य संगठनों ने संयुक्त रूप से कलेक्ट्रेट के निकट धरना शुरू किया था। यह धरना मंगलवार को भी जारी रहा। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक लालजी गौतम ने कहा कि केंद्र सरकार देश को पूंजीपतियों के हाथों बेचना चाहती है। कृषि कानून लाकर किसानों को पूंजीपतियों के हाथों बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है। इस कानून के लागू होने से किसान फसलों की पैदावार तो करेंगे, लेकिन उन्हें उसका मूल्य निर्धारण करने का हक नहीं रहेगा। वह अपनी मर्जी से उपज की बिक्री भी नहीं कर सकेंगे।
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वक्ताओं ने कहा कि कृषि कानून के विरोध में जो किसान विरोध कर रहे हैं, उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। हाड़कंपाऊ ठंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर ठंडे पानी की बौछार की जा रही है। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून वापस नहीं लिया गया और किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर जयप्रकाश, प्रदीप कुमार, विनय कुमार, कमलेश, रामकेवल, राजकुमार, अंकित, आदित्य आदि मौजूद रहे।
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