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तीन दिन बाद एक यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू

Wed, 10 Nov 2021 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:42 PM IST
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After three days, electricity generation starts from one unit
अंबेडकरनगर। तीन दिन तक टांडा के एनटीपीसी बिजली घर में विद्युत उत्पादन पूरी तरह ठप रहने के बाद मंगलवार देर रात फेज टू की एक इकाई से बिजली उत्पादन फिर से शुरू हो गया। फेज टू की ही दूसरी इकाई को भी उत्पादन के लिए तैयार किए जाने की प्रक्रिया बुधवार शाम शुरू कर दी गई। फेज वन की सभी चार इकाइयों से बिजली उत्पादन शुरू किए जाने की इस बीच अभी भी कोई खबर नहीं है।
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कोयला संकट की मार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से टांडा के एनटीपीसी पावर प्लांट में देखने को मिल रही है। यहां फेज वन में लगी 110-110 मेगावाट की चार अलग अलग इकाइयों से बिजली उत्पादन लगभग एक माह पहले से ठप है। फेज टू में 660-660 मेगावाट की दो नई इकाइयों से बिजली उत्पादन का कार्य जैसे-तैसे जारी था, लेकिन कोयला संकट के चलते इसमें भी हिचकोले आ रहे थे। एनटीपीसी प्रबंधन हालांकि लगातार कोयले की कमी न होने का दावा करता रहा, लेकिन फेज वन में कुल 440 मेगावाट की सभी चार इकाइयों से उत्पादन ठप पड़ जाने को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। इस बीच 7 नवंबर को फेज टू की 1320 मेगावाट की दोनों इकाइयों से उत्पादन ठप हो गया।
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नतीजा यह हुआ कि कुल 1760 मेगावाट क्षमता की सभी छह विद्युत उत्पादन इकाइयों से बिजली बनाने का कार्य बाधित हो गया। लगभग एक दशक से भी लंबे समय में यह पहली बार हुआ, जब समूचे बिजली घर से उत्पादन का कार्य ठप पड़ा। इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आती रहीं। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। उपभोक्ताओं का कहना था कि देश की प्रतिष्ठित संस्था एनटीपीसी के साथ जो रवैया अपनाया जा रहा है, वह ठीक नहीं है।
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इस बीच लगातार तीन दिन तक पूरे बिजली घर में बिजली उत्पादन का कार्य ठप रहने के बाद मंगलवार देर रात 660 मेगावाट क्षमता की एक इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो गया। इससे एनटीपीसी के अधिकारियों के साथ सबसे ज्यादा राहत की सांस कर्मचारियों व एनटीपीसी से जुड़े संविदा वर्करों ने ली। बताया यह भी गया कि फेज टू की दूसरी इकाई से भी बिजली उत्पादन का कार्य शुरू किए जाने की तैयारी कर ली गई है। बुधवार देर रात या फिर गुरुवार को किसी समय इस इकाई से भी बिजली बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

उपभोक्ताओं ने इस तरह दी प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर उपभोक्ता संजीव कुमार ने लिखा कि एनटीपीसी को बेचने का खेल चल रहा है। कोयले की वजह अब समझ के बाहर हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता अंशू बग्गा ने लिखा कि दरअसल एनटीपीसी पर भी एक बड़े निजी ग्रुप का आधिपत्य करने की तैयारी है। असली मुद्दा कोयले की बजाय कुछ और है, जो जल्द ही सामने आएगा। उपभोक्ता अमित त्रिपाठी ने लिखा कि देश के रत्नों में शामिल एनटीपीसी में कोयले की कमी का होना किसी बड़े स्कैम का संकेत मिल रहा है। उपभोक्ता राजेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि कोयले की कमी तो सिर्फ बहाना है। असली मकसद तो पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना है। एक यूजर आलोक मिश्र ने आशंका जताते हुए लिखा कि एनटीपीसी भी जल्द ही बिक सकती है। कई अन्य उपभोक्ताओं ने एनटीपीसी की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई।
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