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Ambedkar Nagar News: तारीखी जुलूस-ए-अजा में अजादारों का हुजूम
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जलालपुर के मछलीगांव में बृहस्पतिवार को नौहाख्वानी व सीनाजनी करते अकीदतमंद। स्रोत : आयोजक
जलालपुर। क्षेत्र के मछली गांव में बृहस्पतिवार को 16 मुहर्रम का तारीखी जुलूस-ए-अजा अंजुमन असगरिया के नेतृत्व में अकीदत, एहतराम और गमगीन माहौल के बीच निकाला गया। पूरे मार्ग पर या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
अजादारों ने दुलदुल, अलम और ताबूत की जियारत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। जुलूस से पहले आयोजित मजलिस में मौलाना सैयद अब्बास इरशाद नकवी ने कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यजीद के अत्याचार, अन्याय और इस्लाम की मूल शिक्षाओं को बदलने के प्रयासों के सामने कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने सत्य, इंसाफ और दीन-ए-इस्लाम की असल रूह की हिफाजत के लिए अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ कर्बला की तपती जमीन पर शहादत दी। उनकी कुर्बानी हर दौर में इंसाफ, सब्र, त्याग और जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।
जुलूस में स्थानीय अंजुमनों के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई अंजुमनों ने भी हिस्सा लिया। अंजुमन हैदरिया सुल्तानपुर, अंजुमन हुसैनिया जौनपुर, अंजुमन गुलशन-ए-इस्लाम भौंरा (अंबेडकरनगर), अंजुमन पंजतनी तुराबखानी सुल्तानपुर, अंजुमन हैदरिया अब्दुल्लाहपुर, अंजुमन असगरिया अमहट (सुल्तानपुर), अंजुमन सफीरे नासेरुल अज़ा कटघर कमाल तथा अंजुमन मोइनुल अज़ा दाऊदपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मजलिस में मौलाना सैयद कल्बे रुशैद रिजवी, मौलाना साबिर रजा साबिर और मौलाना नूरुल हसन ने भी तकरीर की। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश इंसानियत, न्याय, सच्चाई और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने और समाज में अमन, भाईचारे तथा इंसाफ की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
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अजादारों ने दुलदुल, अलम और ताबूत की जियारत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। जुलूस से पहले आयोजित मजलिस में मौलाना सैयद अब्बास इरशाद नकवी ने कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यजीद के अत्याचार, अन्याय और इस्लाम की मूल शिक्षाओं को बदलने के प्रयासों के सामने कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने सत्य, इंसाफ और दीन-ए-इस्लाम की असल रूह की हिफाजत के लिए अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ कर्बला की तपती जमीन पर शहादत दी। उनकी कुर्बानी हर दौर में इंसाफ, सब्र, त्याग और जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।
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जुलूस में स्थानीय अंजुमनों के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई अंजुमनों ने भी हिस्सा लिया। अंजुमन हैदरिया सुल्तानपुर, अंजुमन हुसैनिया जौनपुर, अंजुमन गुलशन-ए-इस्लाम भौंरा (अंबेडकरनगर), अंजुमन पंजतनी तुराबखानी सुल्तानपुर, अंजुमन हैदरिया अब्दुल्लाहपुर, अंजुमन असगरिया अमहट (सुल्तानपुर), अंजुमन सफीरे नासेरुल अज़ा कटघर कमाल तथा अंजुमन मोइनुल अज़ा दाऊदपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मजलिस में मौलाना सैयद कल्बे रुशैद रिजवी, मौलाना साबिर रजा साबिर और मौलाना नूरुल हसन ने भी तकरीर की। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश इंसानियत, न्याय, सच्चाई और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने और समाज में अमन, भाईचारे तथा इंसाफ की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
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