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यूरिया के लिए भटकने को विवश अन्नदाता
AmbedkarNagar
Updated Wed, 29 Oct 2014 05:31 AM IST
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अंबेडकरनगर। जिले में लक्ष्य के अनुरूप यूरिया खाद नहीं पहुंच सकी है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता तो है लेकिन अत्यंत महंगा होने के कारण किसान उसे प्राथमिकता नहीं दे रहे। किसानों ने पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद की उपलब्धता तय करने की मांग की है। किसानों का यह भी आरोप है कि समितियों पर कर्मचारियों की मनमानी के चलते भी खाद नहीं मिल पा रही है। ऐसे में रबी की फसलों को लेकर उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ रहा हैै।
पहले सूखे व फिर अतिवृष्टि का सामना कर चुके किसानों के लिए किसी तरफ से भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोई न कोई संकट उनके सामने लगातार बना हुआ है। नई समस्या उन्हें यूरिया खाद की उपलब्धता को लेकर हो रही है। जिले में 31 मार्च 2015 तक 40 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 11 हजार 500 मीट्रिक टन डीएपी, छह हजार 500 मीट्रिक टन एनपीके तथा 700 मीट्रिक टन एनओपी खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा अक्तूबर माह के अंत तक जिले को 210 मीट्रिक टन एनओपी मिलनी चाहिए थी लेकिन मिल सकी है सिर्फ 114 मीट्रिक टन। एनपीके लक्ष्य से लगभग दो गुना प्राप्त हुआ है तो डीएपी खाद भी लक्ष्य से अधिक जिले को मिली है। यूरिया खाद का संकट कुछ इसलिए भी है क्योंकि माह के अंत तक 7600 मीट्रिक टन खाद मिल जानी चाहिए थी लेकिन उपलब्ध हुई है सिर्फ चार हजार 360 मीट्रिक टन। डीएपी खाद 1130 रुपये प्रति बोरी होने के कारण आम किसान उसे खरीदने से कतराता है। गत वर्ष से डीएपी खाद के दाम में आई भारी उछाल के बाद से किसानों ने इस खाद की तरफ से अपना मुंह मोड़ लिया है। साधारण यूरिया 334 तथा नीमकोट यूरिया खाद 348 रुपये प्रति बोरी में उपलब्ध है। सस्ती होने के कारण यह किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन इसकी भी उपलब्धता नहीं हो पा रही है। डीएपी के विकल्प के तौर पर किसान यूरिया व सुपर खाद को मिलाकर काम चला लेते हैं लेकिन इन दोनों खाद के लिए भी किसानों को भटकना पड़ रहा है। ज्यादातर समितियों पर खाद तो उपलब्ध है, लेकिन कर्मचारियों की मनमानी के कारण किसानों को निराश होकर लौटना पड़ता है। भीटी के राजेंद्र सिंह व जलालपुर के संतराम ने बताया कि यूरिया खाद की एक-एक बोरी के लिए उन्हें समितियों का चक्कर लगाने को विवश होना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें प्राइवेट दुकानों से लेना पड़ रहा है। इब्राहिमपुर के जगुई साधन सहकारी समिति पर यूरिया खाद बीते एक पखवारे से नदारद है। ऐसे में इस समिति से जुड़े किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसान राघवेंद्र व जगराम ने कहा कि प्राइवेट दुकानों से यूरिया खाद 400 रुपये प्रति बोरी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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पहले सूखे व फिर अतिवृष्टि का सामना कर चुके किसानों के लिए किसी तरफ से भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोई न कोई संकट उनके सामने लगातार बना हुआ है। नई समस्या उन्हें यूरिया खाद की उपलब्धता को लेकर हो रही है। जिले में 31 मार्च 2015 तक 40 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 11 हजार 500 मीट्रिक टन डीएपी, छह हजार 500 मीट्रिक टन एनपीके तथा 700 मीट्रिक टन एनओपी खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा अक्तूबर माह के अंत तक जिले को 210 मीट्रिक टन एनओपी मिलनी चाहिए थी लेकिन मिल सकी है सिर्फ 114 मीट्रिक टन। एनपीके लक्ष्य से लगभग दो गुना प्राप्त हुआ है तो डीएपी खाद भी लक्ष्य से अधिक जिले को मिली है। यूरिया खाद का संकट कुछ इसलिए भी है क्योंकि माह के अंत तक 7600 मीट्रिक टन खाद मिल जानी चाहिए थी लेकिन उपलब्ध हुई है सिर्फ चार हजार 360 मीट्रिक टन। डीएपी खाद 1130 रुपये प्रति बोरी होने के कारण आम किसान उसे खरीदने से कतराता है। गत वर्ष से डीएपी खाद के दाम में आई भारी उछाल के बाद से किसानों ने इस खाद की तरफ से अपना मुंह मोड़ लिया है। साधारण यूरिया 334 तथा नीमकोट यूरिया खाद 348 रुपये प्रति बोरी में उपलब्ध है। सस्ती होने के कारण यह किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन इसकी भी उपलब्धता नहीं हो पा रही है। डीएपी के विकल्प के तौर पर किसान यूरिया व सुपर खाद को मिलाकर काम चला लेते हैं लेकिन इन दोनों खाद के लिए भी किसानों को भटकना पड़ रहा है। ज्यादातर समितियों पर खाद तो उपलब्ध है, लेकिन कर्मचारियों की मनमानी के कारण किसानों को निराश होकर लौटना पड़ता है। भीटी के राजेंद्र सिंह व जलालपुर के संतराम ने बताया कि यूरिया खाद की एक-एक बोरी के लिए उन्हें समितियों का चक्कर लगाने को विवश होना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें प्राइवेट दुकानों से लेना पड़ रहा है। इब्राहिमपुर के जगुई साधन सहकारी समिति पर यूरिया खाद बीते एक पखवारे से नदारद है। ऐसे में इस समिति से जुड़े किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसान राघवेंद्र व जगराम ने कहा कि प्राइवेट दुकानों से यूरिया खाद 400 रुपये प्रति बोरी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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