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Ambedkar Nagar News: 36 विद्यालय होंगे गुलजार 943 विद्यार्थियों को राहत
Tue, 05 Aug 2025 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 05 Aug 2025 11:17 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। परिषदीय विद्यालयों के विलय को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और अभिभावकों के विरोध के बाद आखिरकार राहत भरी खबर आई है। जिले के 36 सरकारी विद्यालयों में अब फिर से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इस निर्णय से 943 बच्चों को शिक्षा का लाभ मिलेगा, जो अब तक स्कूलों के बंद होने से प्रभावित थे।
परिषदीय स्कूलों के विलय से जुड़े नए आदेश के तहत 50 से कम संख्या वाले उन स्कूलों का विलय रद्द करने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें एक किमी से अधिक की दूरी वाले स्कूलों में विलय किया गया है। इसके साथ विद्यालय विहीन होने वाली ग्राम पंचायतों में भी विलय रोका जा रहा है। इन विद्यालयों का पहले कम नामांकन और शिक्षक अभाव जैसे कारणों के चलते अन्य स्कूलों में विलय कर दिया गया था। दूर-दराज़ के गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए बड़ी दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी गिरावट देखने को मिल रही थी। अभिभावकों और ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से मांग की थी कि उनके गांव के विद्यालयों को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि छोटे बच्चों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े। लगातार ज्ञापन, धरने और सामूहिक प्रयासों के बाद शिक्षा विभाग ने ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लिया और निर्णय पर पुनर्विचार किया गया।
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अंबेडकरनगर। परिषदीय विद्यालयों के विलय को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और अभिभावकों के विरोध के बाद आखिरकार राहत भरी खबर आई है। जिले के 36 सरकारी विद्यालयों में अब फिर से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इस निर्णय से 943 बच्चों को शिक्षा का लाभ मिलेगा, जो अब तक स्कूलों के बंद होने से प्रभावित थे।
परिषदीय स्कूलों के विलय से जुड़े नए आदेश के तहत 50 से कम संख्या वाले उन स्कूलों का विलय रद्द करने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें एक किमी से अधिक की दूरी वाले स्कूलों में विलय किया गया है। इसके साथ विद्यालय विहीन होने वाली ग्राम पंचायतों में भी विलय रोका जा रहा है। इन विद्यालयों का पहले कम नामांकन और शिक्षक अभाव जैसे कारणों के चलते अन्य स्कूलों में विलय कर दिया गया था। दूर-दराज़ के गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए बड़ी दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी गिरावट देखने को मिल रही थी। अभिभावकों और ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से मांग की थी कि उनके गांव के विद्यालयों को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि छोटे बच्चों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े। लगातार ज्ञापन, धरने और सामूहिक प्रयासों के बाद शिक्षा विभाग ने ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लिया और निर्णय पर पुनर्विचार किया गया।
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