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पेंशन को भटक रहे लोहिया गांवों के 3 हजार पात्र
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2015 10:04 PM IST
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वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री की अतिमहत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल लोहिया समग्र गांव के तहत जिले के जिन 29 गावों का चयन किया गया था, उन गावों में विकास का पहिया अब तक गति नहीं पकड़ सका है। न तो संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण हो सका है और न ही विद्युतीकरण का ।
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नालियों का निर्माण आधा अधूरा है। पेयजल की व्यवस्था भी अब तक नहीं की जा सकी है। ग्रामीण विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल लोहिया समग्र गांव योजना जिले में पूरी तरह धराशायी होकर रह गई है।
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तमाम दिशा निर्देश के बाद भी चयनित गावों में न तो विकास कार्य गति पकड़ पा रहा है और न ही पात्रों को योजनाओं का लाभ ही मिल पा रहा है। योजना के तहत वर्ष 2015-16 में जिले के 29 गावों का चयन किया गया था। ग्रामीणों में आस बंधी कि समस्याओं से निजात मिल जाएगी लेकिन समय बीतने के साथ ही उनकी उम्मीदें टूटने लगीं।
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चालू वित्तीय वर्ष का मात्र तीन माह का समय शेष रह गया है, लेकिन संबंधित गावों में विकास कार्य को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 29 गांवों के सापेक्ष मात्र एक गांव में ही संपर्क मार्ग का कार्य पूर्ण हो सका है।
किसी भी गांव में विद्युतीकरण नहीं हो सका है तो सभी गावों में गलियों का निर्माण कार्य आधा अधूरा है। मात्र एक गांव में पेयजल की समुचित व्यवस्था हो सकी है जबकि अन्य 28 गांवों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। कहीं हैंडपंप खराब हैं तो कहीं गंदा पानी उगल रहे हैं।
सभी गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना होनी थी, लेकिन एक भी गांव में अब तक भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। इतना ही नहीं, पिछड़ा वर्ग के 86 छात्र-छात्राओं को जहां अब तक छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी है।
इसी तरह अल्पसंख्य के 60 छात्र छात्राओं को भी छात्रवृत्ति नहीं मिली। 205 निशक्त , 1411 वृद्धा व 350 विधवा पात्रों को अब तक पेंशन नहीं मिल सकी है। समाजवादी पेंशन योजना के तहत चयनित 1194 पात्र पेंशन की बाट जोह रहे हैं।