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एक कमरे में चल रही एलोपैथ व होम्योपैथ चिकित्सा सेवा
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आलापुर। जगह की कमी की वजह से रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एलोपैथिक व होम्योथिक चिकित्सा सेवा की ओपीडी एक कक्ष में ही संचालित हो रही है। इससे अक्सर मरीजों व चिकित्सकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। भीड़ अधिक होने पर मुश्किल काफी बढ़ जाती है। शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारी मामले का संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने सभी होम्योपैथिक अस्पतालों को प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवनों में संचालित करने का निर्णय लिया था। कारण यह कि अधिकांश होम्योपैथिक अस्पतालों के पास अपना भवन नहीं था और उन्हें निजी भवनों में संचालित करना पड़ रहा था।
इसके चलते सरकार को प्रति वर्ष लाखों रुपए किराये के रूप में अदा करना पड़ता था। सरकारी राजस्व बचाने के इस प्रयास में कई जगह एक साथ दोनों अस्पताल चलाने की योजना से मुश्किल खड़ी हो गई है। वर्षों पुराना रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही भवन की समस्या से जूझ रहा है।
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इस बीच होम्योपैथिक अस्पताल इसी भवन में शिफ्ट होने के बाद मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण यह कि अस्पताल के कई कक्ष जर्जर हो चुके हैं। बारिश होने पर छतों से पानी टपकता है। ऐसे में दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए एक ही कमरा सुरक्षित है।
इसके चलते रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक ही कक्ष में एलोपैथिक व होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हो रहा है। प्रतिदिन अस्पताल में 150 मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सक को दिखाने से लेकर दवा आदि प्राप्त करने में मरीजों को काफी दिक्कत होती है। क्षेत्र के प्रदीप कुमार, मनीराम, शिवलाल व गनेश कुमार का कहना है कि कई बार मरीजों को चिकित्सकों को दिखाने में दिक्कत हो जाती है।
एलोपैथिक दवा लेने के लिए पहुंचे मरीज होम्योपैैथिक चिकित्सक के पास चले जाते हैं। दवा देने के दौरान कर्मचारियों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। उधर, पीएचसी प्रभारी डॉ. मुन्नीलाल निगम का कहना है जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गई है।
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पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने सभी होम्योपैथिक अस्पतालों को प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवनों में संचालित करने का निर्णय लिया था। कारण यह कि अधिकांश होम्योपैथिक अस्पतालों के पास अपना भवन नहीं था और उन्हें निजी भवनों में संचालित करना पड़ रहा था।
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इसके चलते सरकार को प्रति वर्ष लाखों रुपए किराये के रूप में अदा करना पड़ता था। सरकारी राजस्व बचाने के इस प्रयास में कई जगह एक साथ दोनों अस्पताल चलाने की योजना से मुश्किल खड़ी हो गई है। वर्षों पुराना रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही भवन की समस्या से जूझ रहा है।
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इस बीच होम्योपैथिक अस्पताल इसी भवन में शिफ्ट होने के बाद मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण यह कि अस्पताल के कई कक्ष जर्जर हो चुके हैं। बारिश होने पर छतों से पानी टपकता है। ऐसे में दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए एक ही कमरा सुरक्षित है।
इसके चलते रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक ही कक्ष में एलोपैथिक व होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हो रहा है। प्रतिदिन अस्पताल में 150 मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सक को दिखाने से लेकर दवा आदि प्राप्त करने में मरीजों को काफी दिक्कत होती है। क्षेत्र के प्रदीप कुमार, मनीराम, शिवलाल व गनेश कुमार का कहना है कि कई बार मरीजों को चिकित्सकों को दिखाने में दिक्कत हो जाती है।
एलोपैथिक दवा लेने के लिए पहुंचे मरीज होम्योपैैथिक चिकित्सक के पास चले जाते हैं। दवा देने के दौरान कर्मचारियों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। उधर, पीएचसी प्रभारी डॉ. मुन्नीलाल निगम का कहना है जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गई है।