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भीषण गर्मी के कहर से लोग बेहाल, तापमान 44 डिग्री के पार
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पशु पक्षियों के समक्ष बढ़ा पेयजल का संकट
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। बढ़ते तापमान से आमजन को राहत नहीं मिल रही। आसमान से आग का बरसना लगातार जारी है। गत दिनों आसमान पर छाए बादल से जो उम्मीद लोगों में जगी थी, वह भी टूटती नजर आ रही है शनिवार को तापमान का पारा 44 डिग्री के पार रहा। इससे लोगों को सुबह से ही भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। तपिशभरी धूप से बचाव के लिए लोग जरूरी कार्य से ही घर से बाहर निकले। उधर भीषण गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव मवेशियों पर भी पडने लगा है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा हैै।
भीषण गर्मी का दौर कम होने का नाम नहीं ले रहा। बढ़ते तापमान से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। शनिवार सुबह हुई तो आम लोगों को जो अंदेशा था, वही हुआ। सुबह से ही तापमान में इजाफा होना शुरु हो गया। समय बढ़ने के साथ ही पूरे दिन लोगों को बदन झुलसा देने वाली धूप का सामना हुआ। धूप व गर्मी का यह कहर देखकर हर कोई परेशान है। रिकार्ड तोड़ हो रही तपिस से लोग बेहाल हैं। लोगों की मानें तो दशकों वर्ष बाद इस तरह की गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मार से लोगों का शेड्यूल ही बदल गया है। लोग के बीच सुबह ही अपने काम निपटा लेने की आपाधापी दिख रही है। धूप इतनी तेज हो रही है कि लोग 10 मिनट भी सहन करने से घबरा रहे हैं। शनिवार पूरे दिन लोगों का झुलसाती धूप व गर्मी से सामना हुआ। सुबह बाजार के लिए निकलने वाले लोग धूप तेज होने से पहले अपने घरों की तरफ रुख कर लिए, तो वहीं पूर्वाह्न से अपराह्न बाद तक लोगों ने घरों से बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझा। मजबूरी में ही लोग दोपहर में घरों से बाहर निकले।
मौसम का मौजूदा रुख देखकर आम लोगों के साथ ही किसानों की चिंता खासी बढ़ गई है। किसानों को गन्ना, मेंथा व सब्जियों की फसलों को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं। तालाबों, पोखरों के सूखने से मवेशियों के समक्ष पेयजल संकट खड़ा होने लगा है। भीषण गर्मी ने मवेशियों को भी बेहाल कर रखा है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से उनके समक्ष प्यास बुझाने का संकट खड़ा हो गया है। तालाबों में पानी नहीं है, जिससे पेयजल समस्या और भी बढ़ गई है। जिला प्रशासन के तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद एक भी ग्राम पंचायत में तालाबों में पानी भरवाने की कवायद नहीं की जा रही है। ऐसे में इसका का प्रतिकूल असर पशु पक्षियों पर देखने को मिल रहा है।
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सभी निभाएं अपनी विशेष जिम्मेदारी
तपिस भरी धूप व गर्मी से आम जनजीवन से लेकर पशु पक्षियों तक के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। शुद्घ व शीतल पेयजल का संकट जिले में गहराने लगा है। आम आदमी तो अपने लिए व्यवस्था तो कर रहा है, लेकिन पशु पक्षियों के लिए ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि हमें पशु पक्षियों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। जरूरी है कि सभी लोग अपने घरों के क्षत पर या फिर घर के सामने स्थित पेड़ के छांव में प्रतिदिन किसी पात्र में पानी भरकर रखें। इससे पक्षियों को पेयजल संकट से निजात मिलायी जा सकेगी। यह संकट की घड़ी है। इसमें सभी को एक दूसरे के हितों का ख्याल रखना चाहिए।
डॉ रमाकांत मिश्र सामाजिक कार्यकर्ता
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। बढ़ते तापमान से आमजन को राहत नहीं मिल रही। आसमान से आग का बरसना लगातार जारी है। गत दिनों आसमान पर छाए बादल से जो उम्मीद लोगों में जगी थी, वह भी टूटती नजर आ रही है शनिवार को तापमान का पारा 44 डिग्री के पार रहा। इससे लोगों को सुबह से ही भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। तपिशभरी धूप से बचाव के लिए लोग जरूरी कार्य से ही घर से बाहर निकले। उधर भीषण गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव मवेशियों पर भी पडने लगा है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा हैै।
भीषण गर्मी का दौर कम होने का नाम नहीं ले रहा। बढ़ते तापमान से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। शनिवार सुबह हुई तो आम लोगों को जो अंदेशा था, वही हुआ। सुबह से ही तापमान में इजाफा होना शुरु हो गया। समय बढ़ने के साथ ही पूरे दिन लोगों को बदन झुलसा देने वाली धूप का सामना हुआ। धूप व गर्मी का यह कहर देखकर हर कोई परेशान है। रिकार्ड तोड़ हो रही तपिस से लोग बेहाल हैं। लोगों की मानें तो दशकों वर्ष बाद इस तरह की गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मार से लोगों का शेड्यूल ही बदल गया है। लोग के बीच सुबह ही अपने काम निपटा लेने की आपाधापी दिख रही है। धूप इतनी तेज हो रही है कि लोग 10 मिनट भी सहन करने से घबरा रहे हैं। शनिवार पूरे दिन लोगों का झुलसाती धूप व गर्मी से सामना हुआ। सुबह बाजार के लिए निकलने वाले लोग धूप तेज होने से पहले अपने घरों की तरफ रुख कर लिए, तो वहीं पूर्वाह्न से अपराह्न बाद तक लोगों ने घरों से बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझा। मजबूरी में ही लोग दोपहर में घरों से बाहर निकले।
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मौसम का मौजूदा रुख देखकर आम लोगों के साथ ही किसानों की चिंता खासी बढ़ गई है। किसानों को गन्ना, मेंथा व सब्जियों की फसलों को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं। तालाबों, पोखरों के सूखने से मवेशियों के समक्ष पेयजल संकट खड़ा होने लगा है। भीषण गर्मी ने मवेशियों को भी बेहाल कर रखा है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से उनके समक्ष प्यास बुझाने का संकट खड़ा हो गया है। तालाबों में पानी नहीं है, जिससे पेयजल समस्या और भी बढ़ गई है। जिला प्रशासन के तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद एक भी ग्राम पंचायत में तालाबों में पानी भरवाने की कवायद नहीं की जा रही है। ऐसे में इसका का प्रतिकूल असर पशु पक्षियों पर देखने को मिल रहा है।
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तपिस भरी धूप व गर्मी से आम जनजीवन से लेकर पशु पक्षियों तक के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। शुद्घ व शीतल पेयजल का संकट जिले में गहराने लगा है। आम आदमी तो अपने लिए व्यवस्था तो कर रहा है, लेकिन पशु पक्षियों के लिए ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि हमें पशु पक्षियों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। जरूरी है कि सभी लोग अपने घरों के क्षत पर या फिर घर के सामने स्थित पेड़ के छांव में प्रतिदिन किसी पात्र में पानी भरकर रखें। इससे पक्षियों को पेयजल संकट से निजात मिलायी जा सकेगी। यह संकट की घड़ी है। इसमें सभी को एक दूसरे के हितों का ख्याल रखना चाहिए।
डॉ रमाकांत मिश्र सामाजिक कार्यकर्ता