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अधिकार व सम्मान के लिए मजबूती से आगे आएं युवतियां
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अंबेडकरनगर। युवतियों को अपने अधिकार व सम्मान के लिए मजबूती से आगे आना होगा। जब तक वे अपने मन से डर नहीं निकालेंगी, तब तक उनकी वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। यह विचार ताइक्वांडो प्रशिक्षक मंगेश कुमार ने मंगलवार को डीएवी पब्लिक स्कूल टांडा में प्रकट किया।
वे अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत वोडाफोन सखी के सहयोग से आयोजित सेल्फ कांफिडेंस वर्कशॅाप को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कहा कि महिलाओं को किसी भी परिस्थिति को लेकर घबराने व चिंतित होने की बजाए उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। समाज में तेजी से बदलाव हो रहा है।
महिलाएं अब अलग अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं, जिसमें उन्हें समाज का साथ भी मिल रहा है। शुरुआती या आगे के दौर में यदि कोई प्रतिकूल परिस्थिति आ जाती है, तो अक्सर महिलाएं निराश होकर बैठ जाती हैं। ऐसा करने से प्रगति नहीं तय हो सकती। युवतियों व महिलाओं को मन में छिपा डर निकालना होगा।
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उन्होंने बाद में छात्राओं को आत्मरक्षा के कई जरूरी प्रशिक्षण भी दिए। प्रशिक्षक रजत मौर्या व अवधेश मिश्र ने अमर उजाला की मुहिम को दूरगामी परिणाम वाला बताते हुए कहा कि सभी को इस तरह सामाजिक जिम्मेदारी निभाना होगा।
स्वावलंबी बनें छात्राएं
डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या अनिता सिंह ने छात्राओं से आह्वान किया कि हक पाने के लिए उन्हें स्वावलंबी बनना होगा। इसके लिए उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढना होगा। अब महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं को चाहिए कि एक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ें और सफलता को अपनी मुट्ठी में कर लें। खुद को अंदर से मजबूत करें और अपनी बातों को खुलकर कहने की क्षमता पैदा करें। अन्याय का विरोध करने की ताकत अपने अंदर पैदा करें। जब तक ऐसा नहीं करेंगी, तब तक उन्हें उनका हक व सम्मान आसानी से मिलने वाला नहीं है। शिक्षक सरोज भाष्कर, रुचि, अरविंद, सुरजीत, नरेंद्र ने भी छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए टिप्स दिए।
दूसरों पर न रहें आश्रित
छात्रा अशरा अफजाल, आलमीन व मंजुसा ने कहा कि सुरक्षा के लिए किसी दूसरे पर आश्रित नहीं होना चाहिए। स्वयं को इतना मजबूत करना चाहिए कि जरूरत पडने पर विषम परिस्थितियों में उसका पुरजोर तरीके से विरोध कर सकें। साथ ही अपनी सुरक्षा भी कर सकें। जब हक अपनी सुरक्षा स्वयं करेंगे, तो महिला हिंसा पर स्वत: ही अंकुश लग जाएगा।
सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण से बढ़ता मनोबल
छात्रा शमां फिरोजा, अशरा आफरीन व शालिनी ने कहा कि युवतियों को चाहिए कि वे आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो, जूडो कराटे जैसी कला में निपुण हों। इससे न सिर्फ मानसिक मजबूती मिलती है, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही आत्मबल में भी वृद्धि होती है।
आधी आबादी को देना होगा पूरा हक
छात्रा सोनाली, रश्मि व दीपाली ने कहा कि आधी आबादी को उनका हक देने की बात तो जोर शोर से की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसे जमीनी हकीकत नहीं दी जाती। हक मांगने से मिलने वाला नहीं है। इसे हासिल करना होगा। इसके लिए अपनी ताकत का एहसास कराना होगा। ऐसा तब संभव है, जब महिलाएं शत-प्रतिशत शिक्षित हों।
गौरवपूर्ण है आयोजन में भागीदारी
छात्रा अफरा, वरीशा व मुस्कान ने कहा कि युवतियों व महिलाओं की आवाज बनकर तेजी से उभरा है अमर उजाला। यह एक सराहनीय कार्य है। हम सभी खुद को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं कि अमर उजाला की ऐसी मुहिम में भागीदारी करने का मौका मिला। कार्यशाला में आत्मरक्षा के लिए मिले प्रशिक्षण को न सिर्फ अपने जीवन में उतारेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
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वे अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत वोडाफोन सखी के सहयोग से आयोजित सेल्फ कांफिडेंस वर्कशॅाप को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कहा कि महिलाओं को किसी भी परिस्थिति को लेकर घबराने व चिंतित होने की बजाए उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। समाज में तेजी से बदलाव हो रहा है।
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महिलाएं अब अलग अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं, जिसमें उन्हें समाज का साथ भी मिल रहा है। शुरुआती या आगे के दौर में यदि कोई प्रतिकूल परिस्थिति आ जाती है, तो अक्सर महिलाएं निराश होकर बैठ जाती हैं। ऐसा करने से प्रगति नहीं तय हो सकती। युवतियों व महिलाओं को मन में छिपा डर निकालना होगा।
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उन्होंने बाद में छात्राओं को आत्मरक्षा के कई जरूरी प्रशिक्षण भी दिए। प्रशिक्षक रजत मौर्या व अवधेश मिश्र ने अमर उजाला की मुहिम को दूरगामी परिणाम वाला बताते हुए कहा कि सभी को इस तरह सामाजिक जिम्मेदारी निभाना होगा।
स्वावलंबी बनें छात्राएं
डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या अनिता सिंह ने छात्राओं से आह्वान किया कि हक पाने के लिए उन्हें स्वावलंबी बनना होगा। इसके लिए उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढना होगा। अब महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं को चाहिए कि एक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ें और सफलता को अपनी मुट्ठी में कर लें। खुद को अंदर से मजबूत करें और अपनी बातों को खुलकर कहने की क्षमता पैदा करें। अन्याय का विरोध करने की ताकत अपने अंदर पैदा करें। जब तक ऐसा नहीं करेंगी, तब तक उन्हें उनका हक व सम्मान आसानी से मिलने वाला नहीं है। शिक्षक सरोज भाष्कर, रुचि, अरविंद, सुरजीत, नरेंद्र ने भी छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए टिप्स दिए।
दूसरों पर न रहें आश्रित
छात्रा अशरा अफजाल, आलमीन व मंजुसा ने कहा कि सुरक्षा के लिए किसी दूसरे पर आश्रित नहीं होना चाहिए। स्वयं को इतना मजबूत करना चाहिए कि जरूरत पडने पर विषम परिस्थितियों में उसका पुरजोर तरीके से विरोध कर सकें। साथ ही अपनी सुरक्षा भी कर सकें। जब हक अपनी सुरक्षा स्वयं करेंगे, तो महिला हिंसा पर स्वत: ही अंकुश लग जाएगा।
सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण से बढ़ता मनोबल
छात्रा शमां फिरोजा, अशरा आफरीन व शालिनी ने कहा कि युवतियों को चाहिए कि वे आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो, जूडो कराटे जैसी कला में निपुण हों। इससे न सिर्फ मानसिक मजबूती मिलती है, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही आत्मबल में भी वृद्धि होती है।
आधी आबादी को देना होगा पूरा हक
छात्रा सोनाली, रश्मि व दीपाली ने कहा कि आधी आबादी को उनका हक देने की बात तो जोर शोर से की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसे जमीनी हकीकत नहीं दी जाती। हक मांगने से मिलने वाला नहीं है। इसे हासिल करना होगा। इसके लिए अपनी ताकत का एहसास कराना होगा। ऐसा तब संभव है, जब महिलाएं शत-प्रतिशत शिक्षित हों।
गौरवपूर्ण है आयोजन में भागीदारी
छात्रा अफरा, वरीशा व मुस्कान ने कहा कि युवतियों व महिलाओं की आवाज बनकर तेजी से उभरा है अमर उजाला। यह एक सराहनीय कार्य है। हम सभी खुद को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं कि अमर उजाला की ऐसी मुहिम में भागीदारी करने का मौका मिला। कार्यशाला में आत्मरक्षा के लिए मिले प्रशिक्षण को न सिर्फ अपने जीवन में उतारेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।