फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   धनाभाव में छात्रवृति से वंचित रह गए 21 हजार छात्र छात्राएं

धनाभाव में छात्रवृति से वंचित रह गए 21 हजार छात्र छात्राएं

Fri, 05 Oct 2018 11:05 PM IST
Updated Fri, 05 Oct 2018 11:05 PM IST
विज्ञापन
धनाभाव में छात्रवृति से वंचित रह गए 21 हजार छात्र छात्राएं
अंबेडकरनगर। छात्रवृत्ति की आस लगाए वर्ष 2017-18 के 20 हजार 885 सामान्य, पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा है। बजट के अभाव में उन्हें यह धनराशि नहीं मिल सकी। उधर इसके अलावा 5 हजार 394 अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को भी यह लाभ नहीं मिला है, लेकिन उन्हें वित्तीय वर्ष के अंत तक लाभ मिलने की उम्मीद अभी बाकी है। दरअसल अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति मिलती है, इसके चलते इन्हें छात्रवृत्ति की धनराशि उपलब्ध कराने के लिए शासन से आवश्यक धनराशि की मांग की गई है।
विज्ञापन

छात्र-छात्राओं के हित को लेकर विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा जरूर किया जा रहा है, लेकिन उन्हें समुचित लाभ दिलाने को लेकर बेफिक्री सामने आती रहती है। वर्ष 2017-18 में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले 26 हजार 279 छात्र छात्राएं छात्रवृत्ति से महज इसलिए वंचित रह गए, क्योंकि शासन के पास इसके लिए बजट नहीं था। समाज कल्याण, जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार छात्रवृत्ति के लिए कुल 1 लाख 59 हजार 213 छात्र छात्राओं ने आवेदन किया था, लेकिन 1 लाख 32 हजार 684 छात्र छात्राओं के खाते में छात्रवृत्ति की धनराशि पहुंच सकी। बजट के अभाव के चलते 26 हजार 529 छात्र-छात्राओं को इससे वंचित रहना पड़ा। हालांकि इनमें से 5 हजार 394 अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति मिलने की उम्मीद अभी बाकी है। कारण यह कि उन्हें केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति मिलती है। केंद्र सरकार द्वारा ऐसे छात्र-छात्राओं को दूसरे वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति दिए जाने का प्राविधान है। अन्य वर्ग के छात्र छात्राओं को प्रदेश सरकार से छात्रवृत्ति मिलती है। प्रदेश शासन से वंचित छात्र छात्राओं को दूसरे वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति मिलने का प्राविधान नहीं है।
विज्ञापन


550 अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की रुकी छात्रवृत्ति
केस एक
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
लिपिक आनंद पांडेय ने बताया कि वर्ष 2017-18 में छात्रवृत्ति के लिए कुल 11 हजार 862 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था। इनके सापेक्ष 11 हजार 312 को छात्रवृत्ति मिली। बजट के अभाव के चलते 550 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति से वंचित रहना पड़ा। इन विद्यार्थियों को दूसरे वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति मिलने का कोई प्राविधान नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछड़े वर्ग के 7 हजार छात्र-छात्राएं वंचित
केस दो
पिछड़ा कल्याण विभाग
वरिष्ठ लिपिक रामजी मौर्या ने बताया कि वर्ष 2017-18 में छात्रवृत्ति के लिए कुल 73 हजार 351 छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन आवेदन किया था। शासन से मिले बजट के आधार पर 66 हजार 325 के खाते में राशि भेज दी गई। 7 हजार 26 छात्र-छात्राओं को बजट न होने से छात्रवृत्ति योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा। इन छात्र-छात्राओं को दोबारा छात्रवृत्ति की कोई योजना नहीं है।

5 हजार से अधिक अनुसूचित छात्रों को मिलेगा लाभ
केस तीन
समाज कल्याण विभाग
लिपिक लालजी यादव ने बताया कि छात्रवृत्ति योजना के लाभ के लिए कुल 74 हजार छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था। इनके सापेक्ष शासन से मिले बजट के आधार पर 55 हजार 47 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिल सका। 18 हजार 953 छात्र छात्राओं को बजट न होने के चलते छात्रवृत्ति योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा। बताया कि वंचित रहने वालों में 5 हजार 394 अनुसूचित जाति के छात्र छात्राएं शामिल हैं। इन्हें केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिलता है। ऐसे में इन्हें वित्तीय वर्ष 2018-19 में बकाया धनराशि मिलेगी। योजना का लाभ मिल सके, इसके लिए आवश्यक धनराशि की मांग शासन से की गई है।


नियमानुसार दिलाया अपनाई जाएगी प्रक्रिया
छात्रवृत्ति के मामले में शासन से ही बजट व लक्ष्य का निर्धारण होता है। जरूरी डिमांड पूर्व में जा चुकी है। जैसा निर्णय आगे होगा, उसी के अनुरूप पालन कराया जाएगा। -उमेशनरायन पांडेय, सीडीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed