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घटने लगा तेजी से सरयू का पानी, बढ़ा संक्रामक रोगों का खतरा
Updated Thu, 06 Sep 2018 10:49 PM IST
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राजेसुल्तानपुर/टांडा (अंबेडकरनगर)। उफनाई सरयू नदी के जलस्तर में बीते 24 घंटे में कमी का दौर शुरू हो गया। गुरुवार को जलस्तर खतरे के निशान से 37 सेमी. ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गई। इससे एक तरफ जहां टांडा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है, वहीं ग्रामीणों में पेयजल का संकट बढ़ गया है। ज्यादातर हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। वहीं, आलापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत अराजद देवारा ग्राम पंचायत के तीन पुरवों में अभी बाढ़ का पानी बरकरार है। इससे संबंधित पुरवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सरयू के जलस्तर में कमी का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को जलस्तर जहां खतरे के निशान से 48 सेमी. ऊपर थी, तो वहीं गुरुवार को सुबह घटकर खतरे के निशान से 43 सेमी पर पहुंच गया। शाम चार बजे जलस्तर 93.10 मीटर मापा गया, जो खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर था। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार जलस्तर में कमी होने के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों माझा उलटहवा, माझा अवसानपुर, माझा इस्माइलपुर बेलदहा, माझा करमपुर बरसावां, माझा डुहिया, माझा कला, माझा चिंतौरा में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए न सिर्फ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाए, बल्कि समुचित साफ-सफाई भी कराई जाए। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल का भी संकट बढ़ गया है। माझा क्षेत्रों के ज्यादातर हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। इससे लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।
राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार, जलस्तर में कमी आने के बावजूद अराजी देवारा के तीन पुरवों हंसू का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा व सिद्धनाथ का पूरा में अभी भी बाढ़ का पानी बना हुआ है। नतीजा यह है कि संबंधित पुरवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा माझा कम्हरिया के पटपरवा, कल्लू का पूरा, नौका का पूरा, बद्री का पूरा व सत्य नारायन का पूरा के पास भी बाढ़ का पानी बरकरार है। इसके अलावा कम्हरिया स्थित धर्मशाला की सभी सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं।
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बरती जा रहीं सावधानियां
सरयू के जलस्तर में कमी हो रही है। बाढ़ का पानी हटने से अक्सर संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। न सिर्फ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है, बल्कि साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। -सुरेश कुमार, जिलाधिकारी
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सरयू के जलस्तर में कमी का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को जलस्तर जहां खतरे के निशान से 48 सेमी. ऊपर थी, तो वहीं गुरुवार को सुबह घटकर खतरे के निशान से 43 सेमी पर पहुंच गया। शाम चार बजे जलस्तर 93.10 मीटर मापा गया, जो खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर था। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार जलस्तर में कमी होने के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों माझा उलटहवा, माझा अवसानपुर, माझा इस्माइलपुर बेलदहा, माझा करमपुर बरसावां, माझा डुहिया, माझा कला, माझा चिंतौरा में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए न सिर्फ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाए, बल्कि समुचित साफ-सफाई भी कराई जाए। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल का भी संकट बढ़ गया है। माझा क्षेत्रों के ज्यादातर हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। इससे लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार, जलस्तर में कमी आने के बावजूद अराजी देवारा के तीन पुरवों हंसू का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा व सिद्धनाथ का पूरा में अभी भी बाढ़ का पानी बना हुआ है। नतीजा यह है कि संबंधित पुरवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा माझा कम्हरिया के पटपरवा, कल्लू का पूरा, नौका का पूरा, बद्री का पूरा व सत्य नारायन का पूरा के पास भी बाढ़ का पानी बरकरार है। इसके अलावा कम्हरिया स्थित धर्मशाला की सभी सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं।
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बरती जा रहीं सावधानियां
सरयू के जलस्तर में कमी हो रही है। बाढ़ का पानी हटने से अक्सर संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। न सिर्फ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है, बल्कि साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। -सुरेश कुमार, जिलाधिकारी