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जिला अस्पताल को खुद है इलाज की दरकार, मरीज हो रहे परेशान
Updated Tue, 28 Aug 2018 10:33 PM IST
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अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल को मौजूदा समय में खुद ही इलाज की दरकार है। समुचित साफ-सफाई न होने से परिसर से लेकर वार्ड तक गंदगी का अंबार है। इसके चलते मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। परिसर में लगा एकमात्र इंडिया मार्का हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहा है। दो वाटर कूलर के सापेक्ष एक वाटर कूलर खराब है, तो दूसरा गर्म पानी दे रहा है। तीमारदारों के लिए परिसर में स्थापित रैन बसेरे पर लंबे समय से एंबुलेंस के कर्मचारियों का कब्जा है। इससे तीमारदारों को रात में बारिश होने पर सिर छिपाने के लिए विभिन्न प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ती हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। सफाईकर्मियों की मनमानी के चलते परिसर से लेकर वार्ड तक गंदगी ही गंदगी है। न सिर्फ जगह जगह कूड़ा करकट का ऐर लगा हुआ है, बल्कि नियमित साफ-सफाई न होने पर नालियां भी बजबजा रही हैं।
बारिश के मौसम में कूड़े के सड़ने व जगह-जगह गंदा पानी एकत्र होने से मच्छरों का प्रकोप अचानक बढ़ गया है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को रात गुजारने में मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। ज्यादातर मरीज मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए मच्छर मारने वाली क्वायल का प्रयोग करने को मजबूर हो रहे हैं। कूड़ों के सड़ने से उठने वाली दुर्गंध भी मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशान किए रखती है।
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तीमारदारों के लिए परिसर में ही रैन बसेरे की स्थापना है, लेकिन शुरुआत से ही उस पर एंबुलेंस कर्मचारियों का कब्जा बना हुआ है। इससे मौजूदा समय में दिन तो किसी प्रकार तीमारदार गुजार देते हैं, लेकिन रात में बारिश होने पर उन्हें इधर उधर की भागदौड़ लगानी पड़ती है।
रैन बसेरा खाली कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन इसे लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। पेयजल के लिए परिसर में मात्र एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है, लेकिन वह भी दूषित पानी दे रहा है। शीतल पेयजल के लिए दो वाटर कूलर लगे हैं, उनमें से एक खराब है, तो दूसरा गर्म पानी दे रहा। मरीजों व तीमारदारों की मांग के बावजूद समस्याओं को दूर करने को लेकर अस्पताल प्रशासन सुध नहीं ले रहा।
सीएमएस डॉ. सीपी गौतम ने कहा कि मरीजों व उनके तीमारदारों को किसी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। सफाईकर्मियों की मनमानी के चलते परिसर से लेकर वार्ड तक गंदगी ही गंदगी है। न सिर्फ जगह जगह कूड़ा करकट का ऐर लगा हुआ है, बल्कि नियमित साफ-सफाई न होने पर नालियां भी बजबजा रही हैं।
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बारिश के मौसम में कूड़े के सड़ने व जगह-जगह गंदा पानी एकत्र होने से मच्छरों का प्रकोप अचानक बढ़ गया है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को रात गुजारने में मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। ज्यादातर मरीज मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए मच्छर मारने वाली क्वायल का प्रयोग करने को मजबूर हो रहे हैं। कूड़ों के सड़ने से उठने वाली दुर्गंध भी मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशान किए रखती है।
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तीमारदारों के लिए परिसर में ही रैन बसेरे की स्थापना है, लेकिन शुरुआत से ही उस पर एंबुलेंस कर्मचारियों का कब्जा बना हुआ है। इससे मौजूदा समय में दिन तो किसी प्रकार तीमारदार गुजार देते हैं, लेकिन रात में बारिश होने पर उन्हें इधर उधर की भागदौड़ लगानी पड़ती है।
रैन बसेरा खाली कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन इसे लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। पेयजल के लिए परिसर में मात्र एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है, लेकिन वह भी दूषित पानी दे रहा है। शीतल पेयजल के लिए दो वाटर कूलर लगे हैं, उनमें से एक खराब है, तो दूसरा गर्म पानी दे रहा। मरीजों व तीमारदारों की मांग के बावजूद समस्याओं को दूर करने को लेकर अस्पताल प्रशासन सुध नहीं ले रहा।
सीएमएस डॉ. सीपी गौतम ने कहा कि मरीजों व उनके तीमारदारों को किसी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।